ब्रिक्स समिट से ठीक पहले जारी एक नए अध्ययन से पता चला है कि वर्ष 2025-26 में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े 71 उत्पाद श्रेणियों के आयात में चीन की हिस्सेदारी कम से कम 80 प्रतिशत रही। इसमें चीन पर निर्भरता तैयार सामान के बजाय मोटर, केबल और स्विचिंग उपकरण जैसे मुख्य कलपुर्जों पर अधिक थी।
अध्ययन से पता चला है कि इस तरह की उत्पाद श्रेणियों की संख्या 2018-19 के 44 से बढ़कर 2025-26 में 71 हो गई है, जो 60 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी है। कोआन एडवाइजरी ग्रुप और इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज की संयुक्त रूप से तैयार की गई यह रिपोर्ट हार्मोनाइज़्ड सिस्टम (एचएस) के चैप्टर 85 के तहत इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लेकर प्रोडक्ट-लाइन के स्तर पर द्विपक्षीय व्यापार का बारीकी से विश्लेषण करती है।
एचएस एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत कोड है जिसका इस्तेमाल व्यापार की जाने वाली वस्तुओं को वर्गीकृत करने के लिए किया जाता है। एचएस चैप्टर 85 में इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं।
चीन से होने वाले आयात में कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली 71 टैरिफ लाइनों में से 46 लाइनें 2018-19 के बाद ही इस स्तर तक पहुंचीं, जिससे पता चलता है कि समय के साथ भारत की आयात पर निर्भरता बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘90-99 प्रतिशत के दायरे में बड़ी संख्या में टैरिफ लाइनों का होना यह दिखाता है कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स आयात में चीन से खरीदारी कितनी ज्यादा पैठ बना चुकी है।’
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यह निर्भरता कुछ खास मुख्य घटकों पर टिकी है, जो पूरी अर्थव्यवस्था में दूरसंचार ढांचे, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक मशीनरी के लिए जरूरी हैं।
रिपोर्ट में इस असंतुलन को लंबे समय तक चलने वाली समस्या बताया गया है। इसमें कहा गया है, ‘चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा चक्रीय नहीं, बल्कि ढांचागत है। यह समय के साथ उन्हीं प्रमुख एचएस चैप्टर्स तक सीमित रहा है और लगातार बढ़ता जा रहा है।’
इस असंतुलन का पैमाना काफी बड़ा है। 2025-26 में चीन के साथ भारत का कुल व्यापार घाटा 112.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें अकेले इलेक्ट्रिकल मशीनरी का हिस्सा 43.1 अरब डॉलर था, जो कुल घाटे का लगभग 38 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हालांकि एचएस 85 श्रेणी के तहत चीन को भारत का निर्यात सबसे ज्यादा (3.18 अरब डॉलर) है, लेकिन इसी श्रेणी में आयात के मुकाबले यह आंकड़ा बहुत कम है। लिथियम-आयन बैटरी एक अहम मुद्दा बनकर उभरी हैं। 2021-22 के बाद से चीन से भारत का आयात दोगुने से ज्यादा बढ़कर 3.9 अरब डॉलर हो गया है, जिसमें चीन की हिस्सेदारी 83.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
इस तरह 2025-26 में यह पहली बार 80 प्रतिशत निर्भरता की सीमा को पार कर गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इसमें हुई तेजी से बढ़ोतरी यह दिखाती है कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम के लिए लिथियम-आयन बैटरी प्रमुख निर्भरता का एक उभरता हुआ क्षेत्र हैं।’
अध्ययन में यह भी पाया गया कि भारत के सेमीकंडक्टर आयात में चीन की हिस्सेदारी एक साल पहले के लगभग 64 प्रतिशत से घटकर 48.9 प्रतिशत होने के बावजूद, चीन ने ही इसकी सबसे ज्यादा आपूर्ति की। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की निर्भरता को आयात पर रोक लगाकर दूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि कमी तैयार उत्पादों के बजाय शुरुआती स्तर के पुर्जों (अपस्ट्रीम कंपोनेंट्स) को लेकर है।