facebookmetapixel
Advertisement
SBI ने AT-1 बॉन्ड से जुटाए ₹4,691 करोड़, 7.75% कूपन पर निवेशकों का जबरदस्त भरोसा₹25,000 करोड़ का दांव, Tata Power की इस रणनीति पर क्यों भरोसा जता रहे ब्रोकरेज? 29% तक अपसाइड के टारगेटAI छीन लेगा नौकरी या बढ़ाएगा कमाई? Goldman Sachs की रिपोर्ट में भारत के 48% कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरीहोर्मुज-लाल सागर संकट से बढ़ेंगी भारत की मुश्किलें! 130 डॉलर पार जा सकता है कच्चा तेलArdee Industries IPO: ₹50-53 प्राइस बैंड तय, 5 अगस्त से खुलेगा इश्यू, जानें निवेश से पहले हर जरूरी बातShree Balaji (Mala) IPO Listing: 90% प्रीमियम पर लिस्ट हुआ इश्यू, लेकिन मिनटों में लगा लोअर सर्किट! निवेशकों को लगा झटकाCoforge Share Price: मजबूत नतीजों के बाद ब्रोकरेज बुलिश, 36% तक अपसाइड का अनुमानManipal Health IPO: सब्सक्रिप्शन के लिए खुला ₹9,275 करोड़ का IPO; जानें प्राइस बैंड, GMP समेत अन्य डीटेल्सMid Cap Stocks: अभी भी कमाई का मौका या दिखेगी उठापटक, निवेशकों के लिए क्या है बड़ी सलाह?HUL में अभी खरीदारी का मौका? ब्रोकरेज को दिख रहा 35% तक का अपसाइड

चुनिंदा क्षेत्रों में कर्ज के पुनर्गठन की वकालत

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 3:47 AM IST

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अर्थशास्त्रियों ने सोमवार को चुनिंदा क्षेत्रों में कर्ज पुनर्गठन पैकेज की वकालत की है। उनका कहना है कि 31 अगस्त को कर्ज भुगतान के लिए दी गई मोहलत समाप्त होने के बाद कुछ क्षेत्रों के लिए कर्ज पुनर्गठन जरूरी है।
अर्थशास्त्रियों ने कहा कि कर्ज लौटाने के लिए दी गई मोहलत से संबद्ध आंकड़ा कोई बड़ा परेशान करने वाला नहीं है लेकिन उन्होंने कई जगहों पर अनियोजित और अविवेकपूर्ण तरीके से लॉकडाउन लगाए जाने की आलोचना की। कोरोनावायरस महामारी का आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव को देखते हुए कर्ज पुनगर्ठन की मांग बढ़ती जा रही है। हालांकि वैश्विक वित्तीय संकट के अनुभव के आधार पर इसके विरोध में भी कुछ बिंदु है। इन मामलों में ऋण पुनर्गठन से फंसे कर्ज में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और उससे अभी तक व्यवस्था उबर नहीं पाई है।
एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘दबाव को कम करने के लिए नीतिगत विकल्प के तौर पर 31 अगस्त के बाद चुनिंदा क्षेत्रों में कर्ज पुनर्गठन जरूरी है। इसमें कहा गया है कि लगातार सीमित क्षेत्रों में लॉकडाउन और रोजगार की कटौती से झटके अभी आ रहे हैं।’
रिपोर्ट के अनुसार अर्थशास्त्रियों ने कहा है, ‘हमारा मानना है कि स्थिति से पार पाने के लिए कुछ क्षेत्रों की कंपनियों को एक बारगी पुनर्गठन, समर्थन आदि की जरूरत हो सकती है।’
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह कहा था कि सरकार कर्ज के पुनर्गठन के बारे में रिजर्व बैंक के साथ बातचीत कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘पुनर्गठन पर ध्यान है। वित्त मंत्रालय इस पर आरबीआई के साथ बातचीत कर रहा है…।’
एसबीआई अर्थशास्त्रियों ने कहा कि कर्ज लौटाने को लेकर दी गई मोहलत लेने वाले खुदरा कर्जदारों की संख्या दी गई जानकारी के मुकाबले कम है क्योंकि आंकड़ा जारी करने के बाद कई कर्जदारों ने ऋण की किस्त देनी शुरू कर दी। उनका कहना है कि कॉरपोरेट क्षेत्र में जिन कंपनियों का बही-खाता मजबूत है, उन्होंने राहत के लिए इस विकल्प को चुना है। वे अनिश्चितता भरे समय में नकदी अपने पास रखने के लिए कर्ज लौटाने को लेकर दी गई मोहलत का लाभ उठा रहे हैं।
रिपोर्ट में एक स्वतंत्र विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि 40 प्रतिशत मोहलत का लाभ उन क्षेत्रों में लिया गया है, जहां कर्ज-इक्विटी अनुपात संतोषजनक है। इनमें औषधि, दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। इस विश्लेषण में 300 से अधिक कंपनियों का आकलन किया गया जिनके ऊपर 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर्ज है। अर्थशास्त्रियों ने यह भी कहा कि बैंकों में पर्याप्त पूंजी की जरूरत है।

Advertisement
First Published - August 4, 2020 | 12:13 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement