जाइडस कैडिला अपने डीएनए-प्लाज्मा तकनीक पर आधारित कोविड टीके के आपात इस्तेमाल की इजाजत भारतीय दवा नियामक से मांग सकती है। अगर उसे मंजूरी मिली तो यह डीएनए-प्लाज्मा तकनीक पर आधारित विश्व का पहला टीका होगा।
साथ ही यह 12 वर्ष या उससे ऊपर आयु वाले लोगों के लिए भारत का पहला टीका होगा क्योंकि कंपनी ने इस आयु वर्ग पर इसका ट्रायल किया है। यह फैसला हालांकि नियामक पर निर्भर करेगा। भारत के पास तीन टीके पहले से हैं : कोवैक्सीन (भारत बायोटेक), कोवीशील्ड (सीरम इंस्टिट््यूट ऑफ इंडिया) और स्पूतनिक वी (डॉ. रेड्डीज लैब)।
सरकारी सूत्रों और कंपनी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि अहमदाबाद की कंपनी एक हफ्ते में भारतीय दवा नियामक से इसके अपात इस्तेमाल की मंजूरी मांग सकती है। सरकारी अधिकारी ने कहा, फेज-3 ट्रायल के आंकड़ों का विश्लेषण करीब-करीब हो गया है। कंपनी जल्द ही इस टीके के आपात इस्तेमाल की मंजूरी मांग सकती है।
भारत बायोटेक की कोवेक्सीन के बाद दूसरी स्वदेशी वैक्सीन जाइकोव-डी तीन खुराक वाली दवा है जिसे पहली बार लगाने के बाद 28वें दिन और फिर 56 दिन बाद लगाया जाएगा। कंपनी ने कहा है कि वह इस वैक्सीन की दो खुराक वाली दवा पर भी काम कर रही है।
कैडिला हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक श्रविल पटेल ने अप्रैल में बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया था कि कंपनी यह जांचने के लिए परीक्षण कर रही थी कि क्या दो खुराक वाली वैक्सीन भी कारगर है। इसके अलावा इसके वैक्सीन का चिकित्सकीय परीक्षण 12 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों पर किया गया है।
पटेल ने तब कहा था, ‘जब तक हमें नियामक से मंजूरी मिलेगी तब तक हमारे पास सुरक्षा और बच्चों पर टीके के फायदे के बारे में पर्याप्त आंकड़ा होगा। इसके अलावा यह नीडल-मुक्त यानी सुई-मुक्त वैक्सीन है, जिससे यह बच्चों के लिए ज्यादा स्वीकार्य हो सकती है।’
कैडिला हेल्थकेयर की जाइकोव-डी को नीडल-फ्री इंजेक्शन सिस्टम (एनएफआईएस) के जरिये पेश किया जाएगा। पटेल का मानना है कि वैक्सीन सुई लगवाने से डरने वाले बच्चों के बीच ज्यादा स्वीकार्य हो सकती है। जाइकोव-डी कमरे के तापमान में रखे जाने योग्य है जिससे इस वैक्सीन को अन्य कहीं ले जाना आसान है।
वैक्सीन संबंधित आंकड़े से पता चला है कि जाइकोव-डी को लंबे समय तक 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में और कम अवधि के लिए 25 डिग्री सेल्सियस पर रखा जा सकेगा।
कंपनी इस वैक्सीन के लिए हर साल 12 करोड़ खुराक क्षमता का निर्माण संयंत्र लगा रही है जिसके लिए बायोसेफ्टी लेवल-1 (बीएसएल-1) इकाई की जरूरत होती है। वह 20 करोड़ खुराक की कुल उत्पादन क्षमता के लिए भागीदारों के साथ समझौते भी कर रही है।
कंपनी ने कहा है कि यह प्रौद्योगिकी बेहद कारगर है। जब तक वैक्सीन की जरूरत बनी रहेगी, बीएसएल-1 संयंत्र निर्माण के लिए सक्षम होगा। इससे जाइडस कैडिला के लिए उत्पादन बढ़ाने के लिए निर्माण भागीदारियों की संभावनाएं पैदा होंगी, जो उसकी प्रतिस्पर्धी वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक के लिए चुनौती बन गई थी। कोवेक्सीन के लिए बीएसएल-3 लैब की जरूरत होती है।
सरकार ने अनुमान जताया है कि इस साल अगस्त और दिसंबर के बीच जाइकोव-डी की 5 करोड़ खुराक उपलब्ध होंगी।