वोडाफोन समूह के खिलाफ कर मध्यस्थता का मामला हारने के बाद सरकार ने यह तय नहीं किया है कि आगे क्या कदम उठाया जाए मगर महाधिवक्ता के के वेणुगोपाल फैसले को दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चुनौती दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं। सरकारी सूत्रों ने बताया कि नीदरलैंड में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय पंचाट से प्रतिकूल फैसला आने के बाद वेणुगोपाल नहीं चाहते कि इसे कहीं और चुनौती दी जाए। मगर सरकार तमाम विकल्पों पर विचार कर रही है।
वेणुगोपाल ने अनौपचारिक रूप से अपनी राय जाहिर करते हुए कहा है कि भारत को मध्यस्थता पंचाट के निर्णय के खिलाफ अपील नहीं करनी चाहिए। वित्त मंत्रालय ने सितंबर के अंत में वोडाफोन मामले में आए फैसले पर महाधिवक्ता की राय केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के जरिये मांगी है। सरकार के पास हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत के निर्णय के खिलाफ सिंगापुर में अपीली पंचाट में अपील करने का विकल्प है। सरकार हचीसन वाम्पोआ की हिस्सेदारी खरीदने के मामले में वोडाफोन से 20,000 करोड़ रुपये कर मांग रही है।
महाधिवक्ता के रुख की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘सरकार के भीतर अपील को चुनौती देने के पक्ष और विपक्ष में जमकर चर्चा हुई है। महाधिवक्ता ने भी अपना पक्ष रखा और कहा कि पंचाट के निर्णय के खिलाफ जाने के प्रतिकूल नतीजे हो सकते हैं।’ मगर उन्होंने सरकार को औपचारिक तौर पर अपनी राय नहीं बताई है। इस संबंध में महाधिवक्ता, सीबीडीटी, वित्त मंत्रालय को भेजे ई-मेल का कोई जवाब नहीं आया। महाधिवक्ता ने फोन पर बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया था कि वह उन गोपनीय मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, जिनमें वे सरकार को सलाह दे रहे हैं।