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वेदांत प्रबंधन और प्रवर्तकों की आज होगी बैठक

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Last Updated- December 14, 2022 | 10:51 PM IST

वेदांत रिसोर्सेस के संस्थापक अनिल अग्रवाल वेदांत की प्रबंधन समिति के साथ सोमवार को बैठक करेंगे और गैर-सूचीबद्धता की कोशिश में मिली नाकामी के बाद आगे की राह पर इस बैठक मेंं चर्चा होगी। वेदांत लिमिटेड के मुख्य कार्याधिकारी सुनील दुग्गल ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, वेदांत लिमिटेड के पप्रबंधन और प्रवर्तकों के बीच वेब कॉन्फ्रेंस सोमवार को होगी और इसमें आगे की राह पर चर्चा की जाएगी। यह बोर्ड बैठक नहीं है। दुग्गल ने बैठक के एजेंडे पर और विस्तार से जानकारी नहीं दी।

इस बीच, सूत्रों ने कहा है कि वेदांत लिमिटेड के मौजूदा कर्ज के पुनर्गठन पर सोमवार को होने वाली बैठक में चर्चा हो सकती है। 30 जून, 2020 को वेदांत लिमिटेड का एकीकृत शुद्ध कर्ज 58.600 करोड़ रुपये था, जिसमें से सिर्फ 13 फीसदी विदेशी मुद्रा में हैं।

चूंकि खुदरा निवेशकों को शुक्रवार को तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ा और वे बोली जमा नहींं करा पाए, ऐसे में इस बैठक में नियामक के संपर्क कर विस्तार की मांग पर चर्चा की जा सकती है।

रेटिंग एजेंसी के वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा, गैर-सूचीबद्धता की मुख्य वजह केयर्न इंडिया और हिंदुस्तान जिंक की नकदी तक पहुंच थी, जिससे वेदांत को अपना कर्ज घटाने में मदद मिलेगी। गैर-सूचीबद्धता की कोशिश हालांकि नाकाम हो गई है, लिहाजा कंपनी को अब कर्ज पुनर्गठन की रणनीति पर दोबारा ध्यान केंद्रित करना होगा।

गैर-सूचीबद्धता की कोशिश से वेदांत रिसोर्सेस के वित्त पर और दबाव पड़ सकता है क्योंकि बताया जाता है कि कंपनी ने गैर-सूचीबद्धता के लिए 3.25 अरब डॉलर के कर्ज का प्रबंध किया है। इसका एक हिस्सा नियम के मुताबिक एस्क्रो खाते में रखा गया है।

एक विश्लेषक ने कहा, गैर-सूचीबद्धता के लिए जुटाई गई रकम से वेदांत रिसोर्सेस पर निश्चित तौर पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कंपनी के लिए यह मुश्किल हालात हैं।

गैर-सूचीबद्धता में नाकामी लंदन की दिग्गज और संस्थागत निवेशकों खास तौर से एलआईसी के बीच मतभेद का ताजा घटनाक्रम है। शेयरधारकों से साथ समूह के गतिरोध में साल 2008 में प्रमुख खनन परिसंपत्तियों का पुनर्गठन, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज का सेसा गोवा व तीन अन्य असूचीबद्ध समूह फर्मों के साथ 2012 में विलय का प्रस्ताव, साल 2014 में केयर्न इंडिया का प्रवर्तकों को 1.25 अरब डॉलर के कर्ज का विस्तार आदि शामिल है। हाल का मामला हिंदुस्तान जिंक से लाभांश का हस्तांतरण वेदांत लिमिटेड को करने में देर है।

साथ ही यह पहला मौका नहीं है जब वेदांत रिसोर्सेस गैर-सूचीबद्धता में नाकाम हुई है। साल 2001 में कंपनी ने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को पुनर्खरीद के जरिए गैर-सूचीबद्ध कराने की कोशिश की थी,  लेकिन नाकाम रही।

इस बीच, शुक्रवार को रिवर्स बुक बिल्डिंग की प्रक्रिया के तहत सिर्फ 1.25 अरब बोली मिली जबकि न्यूनतम जरूरत 1.34 अरब की बोली की है। इससे पहले ट्रेंड बताता है कि समूह ने 1.37 अरब बोली पार कर लिया था। हालांकि 12 करोड़ बोली रद्द हो गई।

वेदांत को न्यूनतम बोली मिल भी जाती है तो ज्यादा संभावना है कि डिस्कवर्ड प्राइस 320 रुपये होगी, जिस कीमत पर 6.4 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली एलआईसी ने शायद अपने शेयरों की बोली लगाई है। यह शायद संभव नहींं होगा कि अग्रवाल बुक

बैल्यू के करीब 4 गुना की कीमत स्वीकार करेंगे।

केआर चोकसी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी ने कहा, गैर-सूचीबद्धता नाकाम हुई क्योंकि यह अल्पांश शेयरधारकों की कीमत पर मोटे तौर पर प्रवर्तकों के फायदे के लिए किया गया। उन्होंने कहा, अगर कीमत बेहतर होती तो गैर-सूचीबद्धता कामयाब रहती। हालांकि प्रवर्तकों को ज्यादा फायदा होगा। उन्हें केयर्न इंडिया व हिंदुस्तान जिंक का पूरा लाभांश मिलता। कंपनी की उचित कीमत उसके मुकाबले काफी ज्यादा है, जिसकी पेशकश वह शेयरधारकोंं को कर रही है।

बाजार के विशेषज्ञों ने कहा कि गैर-सूचीबद्धता में नाकामी से आगे शेयर पर और दबाव पड़ेगा। एस पी तुलस्यान इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी के संस्थापक एस पी तुलस्यान ने कहा, अब यह शेयर 100 ररुपये के आसपास रह सकता है। समूह के ज्यादातर बिजनेस वर्टिकल कारोबारी चक्र के निचले स्तर पर हैं। उन्होंंने कहा, विभिन्न वर्षों में समूह की तरफ से छोड़े गए गलत दृष्टांत अभी भी संस्थागत निवेशकों के दिलो दिमाग में ताजा हैं।

आमसहमति वाला विश्लेषकों का लक्षित भाव अभी 150 रुपये है। करीब 11 विश्लेषकों ने इस शेयर की खरीद की रेटिंग दी है जबकि सिर्फ एक ने बिकवाली की रेटिंग दी है। मार्च के निचले स्तर 60 रुपये के मुकाबले यह शेयर दोगुना हो चुका है। गैर-सूचीबद्धता पर अनिश्चितता के बीच पिछले हफ्ते यह शेयर करीब 12 फीसदी टूट गया।

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First Published - October 11, 2020 | 11:54 PM IST

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