चीन के प्रमुख ऐप टिकटॉक ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा उस पर सात महीने के अंतरिम प्रतिबंध को अब स्थायी कर दिया गया है। ऐसे में अब भारत में अपने कार्यबल को कम करने के अलावा उसके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।
टिकटॉक के प्रवक्ता ने कहा, ‘काफी अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि भारत में छह महीने से अधिक समय तक अपने 2,000 से अधिक कर्मचारियों की मदद करने के बाद अब हमारे पास अपने कार्यबल के आकार को घटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हम भारत में टिकटॉक को दोबारा शुरू करने और लाखों उपयोगकर्ताओं, कलाकारों, कहानी प्रस्तोताओं, शिक्षकों एवं कलाकारों का समर्थन हासिल करने के लिए तत्पर हैं।’
सूत्रों के अनुसार, कंपनी अगले कुछ सप्ताह के दौरान दो चरणों में अपने कार्यबल का आकार घटाएगी। उन्होंने बताया कि मौजूदा परियोजनाओं से जुड़े लोगों को उसे पूरा होने तक बरकरार रखा जाएगा। कर्मचारियों ने बताया कि पिछले साल प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद कंपनी ने अप्रैजल और बोनस दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि इस ऐप पर स्थायी तौर पर पाबंदी लगाने के निर्णय से उन्हें झटका लगा है। सूत्रों के अनुसार, टिकटॉक के भारत एवं दक्षिण एशिया प्रमुख निखिल गांधी सहित करीब 100 कर्मचारी अब विश्व के अग्रणी लॉक-स्क्रीन प्लेटफॉर्म ग्लैंस में शामिल हो रहे हैं। यह बेंगलूरु के मोबाइल विज्ञापन नेटवर्क इनमोबि ग्रुप के स्वामित्व वाला प्लेटफॉर्म है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पिछले साल जून में टिकटॉक, शेयरइट, यूसी ब्राउजर और शीन सहित 59 चीनी मोबाइल ऐप पर सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अंतरिम प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 ए और आईटी नियम 2009 के संबंधित प्रावधानों के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह कार्रवाई की थी। पिछले सप्ताह मंत्रालय ने उस अंतरिम प्रतिबंध को स्थायी कर दिया था।
टिकटॉक के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमने 29 जून, 2020 को भारत सरकार द्वारा जारी आदेश का पालन करने के लिए तेजी से काम किया है। हम लगातार कोशिश करते रहे हैं कि हमारे ऐप स्थानीय कानूनों एवं विनियमों का अनुपालन करें और जो भी चिंताएं हैं उन्हें दूर करने की पूरी कोशिश करें। इसलिए यह काफी निराशाजनक है हमारे प्रयासों के बावजूद हमें स्पष्ट तौर पर नहीं बताया गया है कि इस ऐप को दोबारा कब और कैसे शुरू किया जा सकता है।’
लिंक लीगल इंडिया लॉ सर्विसेज के पार्टनर संतोष पई ने कहा, ‘जब यह प्रतिबंध लगाया गया था तो इंटरनेट कंपनियां भारत सरकार के लिए आसान निशाना थीं। यदि एक या दो महीनों में सीमा पर स्थिति सामान्य हो जाती है तो भारत सरकार टिकटॉक सहित अन्य चीनी ऐप को कुछ सुरक्षा निर्देशों के साथ परिचालन जारी रखने की अनुमति दे सकती थीं लेकिन पिछले छह महीनों के दौरान सीमा पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।’ उन्होंने कहा कि टिकटॉक को एक वैश्विक और भारतीय समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उसे कई देशों में समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इन्हीं सब कारणों से अमेरिका में उसे अपना कारोबार बेचना पड़ा होगा। अमेरिका, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में टिकटॉक कई समस्याओं से जूझ रही है।