कोरोना मरीजों पर पौधे से बनी दवा का परीक्षण शुरू

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 8:04 PM IST

भारत की सबसे बड़ी दवा निर्माता सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को कहा कि उसने एक्यूसीएच पर दूसरे चरण का चिकित्सीय परीक्षण शुरू कर दिया है। एक्यूसीएच दवा को पौधे से तैयार किया गया है जिसे मूल रूप से डेंगू के उपचार के लिए विकसित किया गया था। अब यह देखने की जरूरत होगी कि क्या यह दवा कोविड-19 का उपचार कर सकती है या नहीं। यह परीक्षण भारत में 210 केंद्रों पर किया जाएगा। यह पहली फाइटोफार्मास्युटिकल दवा (पौधे पर आधारित) भी है जिसे देश के दवा नियामक ने कोविड-19 के लिए चिकित्सीय परीक्षण के तौर पर मंजूरी प्रदान की है। कंपनी ने कहा है कि परीक्षण का परिणाम इस साल अक्टूबर तक आने की संभावना है। कंपनी ने कहा है, ‘एक्यूसीएच का मानव सुरक्षा अध्ययन पहले ही पूरा किया जा चुका है और इस दवा को फेज-2 अध्ययन के लिए सुझाई गई खुराक के तौर पर सुरक्षित पाया गया है।’
सन फार्मा के प्रबंध निदेशक दिलीप सांघवी ने कहा, ‘डीसीजीआई द्वारा चिकित्सीय परीक्षण के लिए स्वीकृत यह पहली वनस्पति आधारित दवा है। आईसीजीईबी, इटली की भागीदारी में किए गए अध्ययनों में एक्यूसीएच में सार्स-कोव-2 विरोधी असर देखा गया। इन अध्ययनों ने कोविड-19 मरीजों के लिए संभावित उपचार विकल्प के तौर पर इस दवा के प्रति हमारा भरोसा बढ़ाया है।’
सन फार्मा सरकारी शोध संस्थानों के साथ मिलकर इस दवा को विकसित कर रही है। 2016 में, कंपनी ने डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी-इंटरनैशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग ऐंड बायोटेक्नोलॉजी (डीबीटी-आईसीजीईबी) और काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटिग्रेटिव मेडिसिन (सीएसआईआर-आईआईआईएम) के साथ इस वनस्पति-आधारित दवा पर काम शुरू किया था। अप्रैल में कंपनी ने इस दवा की उपयोगिता जांचने के लिए कोविड-19 पर चिकित्सीय परीक्षण करने के लिए डीसीजीआई को प्रस्ताव सौंपा था। जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सचिव रेणु स्वरूप ने कहा, ‘डेंगू के खिलाफ एक सुरक्षित, प्रभावी और किफायती दवा विकसित करने की हमारी कोशिश करीब 13 साल पहले शुरू हुई थी। सहयोगी टीम ने कोविड-19 के खिलाफ इस दवा के विकास के लिए तुरंत अध्ययन शुरू कर दिया है।

First Published : June 6, 2020 | 12:17 AM IST