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US-Iran तनाव व कच्चे तेल की कीमतों से तय होगी इस हफ्ते बाजार की चाल, निवेशक इन ट्रिगर्स पर रखें नजर

मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव, कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे और खुदरा व थोक महंगाई के आंकड़े इस हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- July 12, 2026 | 4:09 PM IST

आने वाले समय में शेयर बाजार की चाल कैसी रहेगी, इसे लेकर निवेशकों और बाजार के जानकारों की नजरें कई घरेलू और वैश्विक ट्रिगर्स पर टिकी हुई हैं। एनालिस्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान के बीच चल रहा भू-राजनीतिक तनाव, कंपनियों के तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव इस हफ्ते निवेशकों के मूड को तय करेगा। इसके अलावा, मानसून की रफ्तार, महंगाई के आंकड़े और विदेशी निवेशकों (FPIs) का रुख भी बाजार के लिए काफी अहम साबित होने वाला है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू स्तर पर इस हफ्ते निवेशक मुख्य रूप से जून महीने के लिए आने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी खुदरा महंगाई और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) यानी थोक महंगाई के आंकड़ों पर करीबी नजर रखेंगे। 

साथ ही, देश के विदेशी मुद्रा भंडार के ताजा आंकड़े भी देखे जाएंगे। इस दौरान पहली तिमाही के नतीजों का सीजन भी रफ्तार पकड़ेगा। कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री (भविष्य को लेकर उनकी राय) से यह तय होगा कि बाजार की दिशा क्या होगी और अलग-अलग सेक्टर कैसा प्रदर्शन करेंगे।

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कई कंपनियों के आएंगे नतीजे, महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी नजर

इस हफ्ते कॉर्पोरेट जगत में हलचल तेज रहने वाली है क्योंकि HCL टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, यूनियन बैंक और फेडरल बैंक समेत कई बड़ी कंपनियां अपने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित करने जा रही हैं।

इसके साथ ही, व्यापक आर्थिक मोर्चे (मैक्रोइकॉनॉमिक फ्रंट) पर सोमवार को खुदरा महंगाई और मंगलवार को थोक महंगाई के आंकड़े जारी होंगे, जो बाजार के लिए एक बड़ा ट्रिगर बन सकते हैं। इसके अलावा मानसून पर भी नजर रहेगी, क्योंकि इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों में मांग और महंगाई पर पड़ता है।

वैश्विक मोर्चे की बात करें तो अमेरिका और ईरान के बीच की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा क्योंकि इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है। साथ ही, अमेरिका में मंगलवार को आने वाले खुदरा महंगाई (CPI) और बुधवार को आने वाले उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़े भी बहुत महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इन्हीं से तय होगा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों को लेकर आगे क्या फैसला ले सकता है।

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बाजार के लिए एक अच्छी खबर यह है कि लगातार चार महीनों तक लगातार बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों ने जुलाई महीने में भारतीय बाजार में वापसी की है। बेहतर घरेलू आर्थिक संकेतकों, मजबूत रुपये और वैश्विक स्तर पर सुधरे माहौल के चलते विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय शेयरों में 15,157 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। आपको बता दें कि पिछले हफ्ते हल्की गिरावट के साथ बाजार बंद हुआ था, जहां BSE सेंसेक्स 194.52 अंक (0.25 फीसदी) और NSE निफ्टी 63.95 अंक (0.26 फीसदी) कमजोर हुआ था।

First Published : July 12, 2026 | 3:55 PM IST