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रकम जुटाने की तैयारी में टाटा

Last Updated- December 15, 2022 | 1:21 AM IST

टाटा समूह के पास अपनी होल्डिंग कंपनी टाटा संस में मिस्त्री परिवार की 18.37 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए रकम जुटाने के कई विकल्प मौजूद हैं। इसमें टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज (टीसीएस) में टाटा समूह के शेयरों को गिरवी रखकर अथवा कुछ हिस्सेदारी बेचकर रकम जुटाने का विकल्प भी शामिल है। हालांकि अंतिम मूल्यांकन पर बातचीत होना अभी बाकी है लेकिन बैंकरों ने कहा कि टाटा समूह टीसीएस में 5 से 8 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री, टाटा कैपिटल एवं बीमा कारोबार जैसे उपक्रमों में हिस्सेदारी बेचकर और सॉवरिन वेल्थ फंड के जरिये 20 अरब डॉलर तक जुटा सकता है।
बुधवार को टाटा संस ने द्वितीयक बाजार से थोक सौदे के तहत टाटा केमिकल्स के 63.6 करोड़ रुपये मूल्य के और टाटा मोटर्स डीवीआर के 22.5 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे।
मिस्त्री परिवार ने टाटा संस में अपनी 18.37 फीसदी हिस्सेदारी का मूल्यांकन 1.78 लाख करोड़ रुपये आंका है लेकिन टाटा समूह ने फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वह मिस्त्री परिवार की हिस्सेदारी किस मूल्यांकन पर खरीदाना चाहता है। टाटा के एक अधिकारी ने कहा कि वे अक्टूबर के अंत में सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू होने पर अपना जवाब देंगे।
एक बैंकर ने कहा कि टाटा समूह अगले कुछ वर्षों के दौरान मिस्त्री परिवार की हिस्सेदारी खरीद सकता है क्योंकि यह रकम काफी महत्त्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा, ‘मिस्त्री परिवार की हिस्सेदारी खरीदने के लिए टाटा समूह के पास कई विकल्प है। एक विकल्प यह भी है कि टाटा समूह पहले सॉवरिन फंडों को हिस्सेदारी खरीदने के लिए आमंत्रित करे और उसके बाद पुनर्खरीद कर ले। इसके अलावा वह अपनी तमाम सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी को गिरवी रखकर अथवा उसे बेचकर रकम जुटा सकता है।’
मिस्त्री परिवार की हिस्सेदारी को खरीदने के लिए टाटा समूह जो भी विकल्प अपनाए लेकिन इससे उसके विस्तृत बहीखाते को और मजबूती मिलेगी। समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल ऋण बोझ इस साल मार्च के अंत में 3.27 लाख करोड़ रुपये था जो सालाना आधार पर 17.3 फीसदी अधिक है। इससे समूह का कुल ऋण बनाम इक्विटी अनुपात 1.1 गुना हो जाता है। समूह का लीवरेज अनुपात वित्त वर्ष 2020 में पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक रहा। इसके अलावा टाटा संस की कुल उधारी इस साल मार्च के अंत में 22,000 करोड़ रुपये थी जो इससे एक साल पहले के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है।
समूह के ऋण एवं लीवरेज अनुपात में शुद्ध आधार पर भी वृद्धि हुई है। कंपनियों के बहीखाते पर नकदी एवं नकदी समतुल्य परिसंपत्तियों को समायोजित करने पर समूह का शुद्ध ऋण बोझ सालाना आधार पर 25 फीसदी बढ़कर मार्च 2020 के अंत में 2.19 लाख करोड़ रुपये हो जाता है। जबकि शुद्ध ऋण बनाम इक्विटी अनुपात बढ़कर 0.75 गुना हो जाता है जो पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक है।
यदि टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज (टीसीएस) के आंकड़ों को हटा दिया जाए तो टाटा समूह की वित्तीय स्थिति काफी खराब दिखेगी। टीसीएस को हटाकर समूह का ऋण बनाम इक्विटी अनुपात इस साल मार्च के अंत में बढ़कर 1.53 गुना हो गया जो एक साल पहले 1.45 गुना और मार्च 2018 के अंत में 1.16 गुना रहा था। समान अवधि में शुद्ध ऋण बनाम इक्विटी अनुपात (टीसीएस को छोड़कर) बढ़कर 1.19 गुना हो गया जो वित्त वर्ष 2018 में 0.76 गुना रहा था।
आईआईएएस के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक अमित टंडन ने कहा, ‘एसपी समूह की हिस्सेदारी खरीदने के लिए काफी अधिक रकम की जरूरत होगीऔर उसके लिए बाहरी फाइनैंसर की जरूरत होगी। ऐसा करने से समूह कहीं अधिक ऋण बोझ तले दब जाएगा।’

First Published - September 24, 2020 | 1:33 AM IST

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