कोविड-19 संकट ने नए जमाने के स्टार्ट-अप को पहचान दिलाई है। ये स्टार्ट-अप कंपनियां महामारी से पैदा हुए अवसरों का तेजी से लाभ उठा रही हैं और नवाचार पर जोर देकर पुराने बिजनेस मॉडलों में नया बदलाव ला रही हैं। कोविड संकट की प्रमुख लाभार्थी स्टार्ट-अप और टेक कंपनियां रही हैं। वे डिजिटल को अपनाकर तेजी से बढ़ रही हैं। डिजिटल को अपनाने के चलन में महज कुछ महीनों में बड़ी तेजी आई है।
इन क्षेत्रों में ई-कॉमर्स, एडटेक, लॉजिस्टिक्स, फूडटेक और फिनटेक मुख्य रूप से शामिल हैं। अन्य क्षेत्रों में हेल्थकेयर, गेमिंग और सेवा के तौर पर सॉफ्टवेयर शामिल हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ये क्षेत्र सेवाओं के लिए मांग में शानदार वृद्घि दर्ज कर रहे हैं और यह रुझान अगले कुछ वर्षों में भी बरकरार रहने की संभावना है। स्कूलिंग, लर्निंग, बैंकिंग, डॉक्टर अपॉइंटमेंट, वर्कआउट से लेकर शॉपिंग और भोजन एवं किराना की खरीदारी, सभी कुछ ऑनलाइन हो गया है, क्योंकि बड़ी तादाद में लोग घर से ही कार्य कर रहे हैं।
ईवाई इंडिया में पार्टनर और नैशनल लीडर (ई-कॉमर्स और कंज्यूमर इंटरनेट) अंकुर पाहवा ने कहा, ‘भारत में, खासकर उन उभरते क्षेत्रों के लिए यह स्टार्ट-अप के लिए खास वर्ष रहा है, जिन्होंने नवाचार को अपनाने में तेजी दिखाई है।’ पाहवा ने कहा, ‘चूंकि नोटबंदी फिनटेक क्षेत्र के लिए एक बदलाव वाला समय था और नोटबंदी ने सभी सेगमेंट में आक्रामक विस्तार के लिए एक अवसर मुहैया कराया है। चूंकि स्टार्ट-अप उपभोक्ताओं के लिए जरूरी बन गए हैं और तेजी से बढ़ रहे नेटवर्क के कारण हम उनमें बड़ा बदलाव देखेंगे।’
दरअसल, पिछले साल भारत में 11 कंपनियां यूनिकॉर्न या स्टार्ट-अप बनीं और उनकी वैल्यू 1 अरब डॉलर या इससे ऊपर पहुंची, जबकि 2019 में 9 कंपनियां यूनिकॉर्न की श्रेणी में शामिल हुई थीं। वेंचर इंटेलीजेंस के डेटा के अनुसार, महामारी के बावजूद, इस साल अब तक युवा उद्यम 10.6 अरब डॉलर का उद्यम पूंजी निवेश आकर्षित करने में कामयाब रहे हैं। यह 2019 के कुल निवेश 12.5 अरब डॉलर और 2018 के 10.9 अरब डॉलर से कम है। अब तक, उद्यम पूंजी सौदों की कुल संख्या 648 रही है, जबकि 2019 में यह 833 और 2018 में 731 थी।
शिक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इस तरह की तीन कंपनियां हैं बायजू, अनएकेडेमी और वेदांतू। देश का 180 अरब डॉलर का शिक्षा क्षेत्र नई वास्तविकता को स्वीकार करने के लिए ऑनलाइन हो रहा है।
कोविड-19 महामारी से बायजू को डेकाकॉर्न (10 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाली कंपनी) बनने में मदद मिली। सितंबर में 50 करोड़ डॉलर जुटाने के बाद कुछ ही महीनों में बायजू कोष उगाही के ताजा राउंड में 20 करोड़ डॉलर की उगाही में भी सफल रही है। इससे कंपनी का मूल्यांकन बढ़कर 12 अरब डॉलर पर पहुंच गया है जो पिछले कोष उगाही राउंड के तुलना में करीब 1 अरब डॉलर ज्यादा है।
बायजू ने इस साल शानदार वृद्घि दर्ज की। लॉकडाउन शुरू होने के बाद से उसने अपने प्लेटफॉर्म पर 2.5 करोड़ से ज्यादा नए छात्र जोड़े। आज इस ऐप पर 7 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत छात्र और 45 लाख सालाना भुगतान वाले सबस्क्रिप्शन हैं। फेसबुक समर्थित अनएकेडेमी भी पीछे नहीं रही है और वह इस साल बायजू के बाद बेहद मूल्यवान एडटेक स्टार्ट-अप बन गई। कंपनी ने नवंबर में सॉफ्टबैंक और टाइगर ग्लोबल से पूंजी जुटाई। इससे पहले सितंबर में कंपनी ने 15 करोड़ डॉलर की पूंजी जुटाई थी। उस समय अनएकेडेमी का मूल्यांकन महज 6 महीने में तीन गुना बढ़कर 1.45 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। अनएकेडेमी मुख्य रूप से परीक्षा तैयारी क्षेत्र में प्रख्यात नाम रही है। लेकिन अब यह के-12 शिक्षा क्षेत्र और बच्चों के लिए कोडिंग शिक्षा प्रदान कर बायजू का मुकाबला करने की तैयारी कर रही है। वर्ष 2015 में (और यूट्यूब पर 2020 में) स्थापित अनएकेडेमी सबसे बड़े लर्निंग प्लेटफॉर्मों में से एक बन गई है और वह 14 से ज्यादा भारतीय भाषाओं में शिक्षा मुहैया कराने वाले 47,000 शिक्षकों से जुड़ी हुई है। उसके प्लेटफॉर्म पर हर महीने 150,000 से ज्यादा लाइव क्लास संचालित की जाती हैं।
इस साल जब पूरा देश लॉकडाउन से जूझ रहा था, ऑनलाइन शिक्षा मुहैया कराने वाली वेदांतू के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी वमसी कृष्णा ने कोष उगाही के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंंसिंग प्लेटफॉर्म जूम पर निवेशकों के साथ बातचीत की थी। वह 10 करोड़ डॉलर की कोष उगाही में सफल रहे थे। इस कोष उगाही के बाद कंपनी का मूल्यांकन बढ़कर 60 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया था।
विश्लेषकों का कहना है कि कोविड के साथ शिक्षा की दिशा में तेज बदलाव आया है और अन्य उद्योग की तुलना में इस क्षेत्र की मजबूती बरकरार रहने की संभावना है। अगला साल एडटेक कंपनियों के लिए यह साबित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण रहेगा कि रिमोट लर्निंग कारगर साबित हो सकती है।