रामलिंग राजू के फर्जीवाड़े का खुलासा करने से करीब एक माह पहले अमेरिकी अधिकारी सत्यम के सीरिया, सूडान, क्यूबा और ईरान के साथ कारोबार की जांच में जांच में जुटे थे।
दरअसल, अमेरिकी सरकार ने इन देशों को आतंकवाद का प्रायोजक करार दिया है और इन पर अमेरिका ने आर्थिक और निर्यात संबंधी प्रतिबंध भी लगा चुका है।
उस समय सत्यम के तत्कालीन अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामलिंग राजू को लिखे पत्र में ग्लोबल सिक्योरिटी रिस्क कार्यालय ने इस बात को इंगित किया था कि कंपनी ने इन देशों के साथ अपने कारोबार का खुलासा नहीं किया है।
पत्र में पहले के सौदों और निकट भविष्य में किए जाने वाले सौदों के बारे में कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि सत्यम को भेजी गई प्रश्नावली का कंपनी ने कोई जबाव नहीं दिया, लेकिन अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग को भेजे गए अपने जवाब में कंपनी ने सीरिया और सूडान स्थित कंपनियों के साथ सौदे की बात स्वीकार की थी।
कंपनी ने बताया था कि कीमतों के लिहाज से सौदों के महत्वपूर्ण नहीं होने के कारण इसका खुलासा नहीं किया गया। कंपनी द्वारा किया गया यह खुलासा न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज यूरोन्क्स्ट वेबसाइट पर भी है।
इससे पूर्व भी ऐसी भारतीय कंपनियां, जिनका कारोबार सूडान और सीरिया स्थित कंपनियों के साथ हुआ है, वे मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में शक के दायरे में आ चुकी हैं।
पिछले साल 26 नवंबर को सीरिया और सूडान में अपने ग्राहकों के नामों का बगैर खुलासा किए कंपनी ने कहा कि इन देशों में सेवा देने के बदले कंपनी को जो राजस्व की प्राप्ति होती है, वह कंपनी के राजस्व का 0.006 फीसदी हिस्से से भी कम थी।
सत्यम ने कहा कि सूडान और सीरिया में कारोबार को देखते हुए कंपनी को यह नहीं लगता कि यह निवेशकों के लिए किसी भी नजरिये से चिंता का कारण है।