वैश्विक मंदी की मार झेल चुके पंजाब के सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) ने ब्याज दर, बैंक शुल्कों में कमी और बीमार एवं सूक्ष्मलघु उद्यमों के पुनर्वास की मांग की है।
इन उद्यमियों का कहना है कि अगर सरकार इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करना चाहती है तो उसे इन उद्यमों पर विशेष ध्यान देना होगा। यह ध्यान देने की बात है कि पंजाब में लगभग 2.04 लाख एमएसई इकाइयां हैं जिनका सालाना उत्पादन 30873 करोड़ रुपये का है और ये 9.15 लाख श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराती हैं।
इन एमएसई इकाइयों की कार्यशील पूंजी लगभग 5100 करोड़ रुपये है। प्रमुख एमएसई इकाइयों लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और मंडी गोबिंदगढ़ जिलों में हैं।
चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रियल ऐंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स के महासचिव अवतार सिंह ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इस क्षेत्र के कायाकल्प के प्रयास के तहत बैंक ऋण पर ब्याज को 12 फीसदी से घटा कर 10 फीसदी किया जाना चाहिए।
इसके अलावा इस उद्योग द्वारा लिए जाने वाले ऋणों की अदायगी के लिए ईएमआई यानी मासिक किस्तों को 36 से 48 महीने से बढ़ा कर 5 से 10 साल किया जाना चाहिए। ऋण की अधिक ब्याज दरों के कारण एसएमई को प्रतिस्पर्धा में बने रहना बेहद मुश्किल हो रहा है।’
उन्होंने यह भी कहा कि ब्याज की वसूली के लिए एनपीए खाते से परहेज करने के लिए इस अवधि को 90 दिन से बढ़ा कर 180 दिन किया जाना चाहिए। इसका प्रमुख कारण खरीदारों की ओर से भुगतान में विलंब है।
पंजाब में एमएसई जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनका पता लगाने, एमएसई पर वैश्विक संकट के विपरीत असर का पता लगाने और एमएसई क्षेत्र के उचित विकास के लिए उन्हें पर्याप्त ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित कराए जाने के लिए पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) द्वारा अमृतसर में ‘बैंकर्स कमेटी, पंजाब’ की एक विशेष बैठक आयोजित की गई।
फेडरेशन ऑफ टिनी ऐंड स्मॉल इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जोगिंदर कुमार ने कहा, ‘एमएसएमई में एक करोड़ रुपये के निवेश पर प्रतिकूल असर पड़ा है, क्योंकि आयातकों ने अपने ऑर्डर रद्द कर दिए हैं। निर्माण इकाइयां, खासकर लाइट इंजीनियरिंग उद्योग बेहद मुश्किल हालात से जूझ रहा है।’
पीएनबी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (एसएमई क्षेत्र) के सी चक्रबर्ती ने कहा कि संयंत्र एवं मशीनरी में 5 लाख रुपये तक का निवेश करने वाले उद्यमों के लिए ऋण में कमी आई है।
वाणिज्यिक बैंकों से समर्थन की मांग करते हुए जोगिंदर ने यह भी कहा कि बैंकों से लिया जाने वाला सेवा शुल्क भी थोड़ा ज्यादा है जिसे कम किया जाना चाहिए।
फेडरेशन का यह भी मानना है कि वाणिज्यिक बैंक रुग्ण इकाइयों के पुनर्वास को लेकर उत्साहित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लघु उद्यमियों की समस्याओं के तुरंत निपटान के लिए सार्वजनिक क्षेत्र का प्रत्येक बैंक एक क्षेत्रीय एमएसएमई केयर सेंटर बनाएगा।
इन केंद्रों के कामकाज पर हेड ऑफिस द्वारा नजर रखी जाएगी और ऐसे केंद्रों की सूची आईबीए पोर्टल और सार्वजनिक क्षेत्र के प्रत्येक बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।