चेन्नई की शासुन केमिकल्स एंड ड्रग्स (एससीडीएल) ठेके पर दवा बनाने वाली उन भारतीय कंपनियों की सूची में शामिल हो गई है, जो देश से बाहर अपना उत्पादन बंद कर रही हैं।
इसकी वजह यह कि भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप में दवा उत्पादन करना अब लाभ का सौदा नहीं रहा। स्कॉटलैंड से मिल रही खबरों के मुताबिक, शासुन ने पिछले हफ्ते स्कॉटलैंड के अन्नान में अपना उत्पादन बंद करके अमेरिका, ब्रिटेन और भारत में स्थानांतरित कर दिया।
कुछ ही दिन पहले चोटी के 10 ठेके पर दवा बनाने वाली कंपनियों में शुमार पीरामल हेल्थकेयर ने ब्रिटेन में हडर्सफील्ड इकाई पर ताला जड़ दिया था। यहां करीब 90 लोग कार्यरत थे। कंपनी के अध्यक्ष अजय पीरामल ने बताया कि इस निर्णय से फार्मा सोल्यूशन कारोबार में अब 6 से 8 फीसदी ज्यादा मुनाफा हो सकेगा।
गौरतलब है कि भारत में दवा उत्पादन की लागत पश्चिमी देशों के मुकाबले महज एक-चौथाई है। पश्चिमी देशों में पर्यावरण के नियम बड़े कठोर हैं। इस वजह से भी कंपनियां वहां अपना उत्पादन बंद कर रही हैं। बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां लागत कम करने के मकसद से भारत जैसे देशों में उत्पादन आउटसोर्स कर रहे हैं।
दक्षिण पश्चिम स्कॉटलैंड के अन्नान के न्यूबी में 27 एकड़ में फैली ईकाई उन 2 उत्पादन ईकाइयों का हिस्सा है, जिसका कंपनी ने फ्रांस के रोडिया फार्मा सोल्यूशंस से 2006 में अधिग्रहण किया था। यहां 86 लोगों को रोजगार मिला हुआ था। इस ईकाई से एक्टिव फार्मास्यूटिकल सामग्री का उत्पादन होता था।
दूसरी ईकाई ब्रिटेन के डडली में है, जहां एक्टिव फार्मास्यूटिकल सामग्री का परीक्षण के साथ-साथ व्यावसायिक उत्पादन भी हो रहा है। अन्नान में उत्पादन के दौरान आ रही समस्याओं की वजह से पिछले 2 साल से शासुन को आर्थिक नुकसान हो रहा था। उत्पादन स्थानांतरित करने के मकसद से पिछले साल शासुन ने अमेरिका में प्रोसेस डेवलपमेंट सुविधाओं में निवेश किया था।
शासुन की तरफ से पहले कहा गया था कि ग्राहकों की मांग और गतिविधियों की व्यापक समीक्षा के बाद कंपनी इस निर्णय पर पहुंची है कि अन्नान की ईकाई को चलाना लाभकारी नहीं है। इसे मार्च 2009 के आखिर तक बंद कर दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, शासुन अन्नान इकाई के लिए ग्राहक तलाश रही थी, लेकिन अब तक उसे ग्राहक नहीं मिल पाया है।