देश में कोयले को तरल पेट्रोलियम बनाने की 6 से 8 अरब डॉलर की प्रतिष्ठित परियोजना की दौड़ में रिलायंस इंडस्ट्रीज पिछड़ गई है।
दक्षिण अफ्रीका के सासोल के साथ टाटा समूह के संयुक्त उद्यम और जिंदल स्टील ऐंड पावर ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और गेल को पीछे छोड़ते हुए शार्टलिस्ट की गई कंपनियों की सूची में नाम दर्ज करा लिया है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि 22 कंपनियों के आवेदनों की जांच के बाद अंतर-मंत्रालय समूह टाटा और सासोल के संयुक्त उद्यम- स्टै्रटेजिक एनर्जी टेक्नोलॉजी सिस्टम्स लिमिटेड और जेएसपीएल को कोल टू लिक्विड (सीटीएल) की पायलट परियोजना देने की सिफारिश की है।
उल्लेखनीय है कि भारत में भारी मात्रा में कोयला पाया जाता है, इसलिए आयातित तेल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सीटीएल परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा था। इस परियोजना से कोयला भंडार के तरलीकरण से रोजाना 80,000 बैरल कच्चा तेल का उत्पादन किया जा सकेगा।
अंतर मंत्रालय समूह ने उड़ीसा में स्थापित की जाने वाली इस परियोजना के लिए जिन 22 कंपनियों के आवेदन की जांच की थी, उसमें आरआईएल, अनिल अंबानी समूह की रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, सेल, गेल, इंडियन आयल, जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर और वेदांता शामिल हैं।
अधिकारी ने कहा कि आरआईएल के प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार नहीं किया गया, क्यो कि इसने प्रत्यक्ष तरलीकरण की प्रक्रिया की पेशकश की थी जिसे स्वीकार नहीं किया गया।
गेल और जीएमआर ने दस्तावेजों के साथ किसी प्रौद्योगिकी प्रदाता के साथ समझौतों की प्रति नहीं जमा कराई थी, जो आवश्यक थी।
उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियो ने हालांकि प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के पत्र की प्रति आईएमजी को तब सौंपी थी, जबकि उसने रिपोर्ट तैयार कर ली थी। इधर, सेल ने अपना आवेदन वापस ले लिया जबकि वेदांता ने कोई अतिरिक्त सूचना नहीं दी।
रिलायंस को मात
छह से आठ अरब डॉलर की सीटीएल परियोजना में रिलायंस इंडस्ट्री पिछड़ी
टाटा समूह के संयुक्त उद्यम और जिंदल स्टील ऐंड पावर का चयन
22 कंपनियों के आवेदनों की जांच के बाद अंतर मंत्रालय समूह ने सौंपी रिपोर्ट