रिलायंस जियो ने एक बार फिर स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए आवाज बुलंद की है क्योंकि कंपनी ने महसूस किया है कि बेहतर गुणवत्त वाली सेवाओं के लिए दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम की बेहतर जरूरत है। कंपनी ने दूरसंचार विभाग को लिखे एक पत्र में कहा है कि सभी बैंडों में उपलब्ध सभी स्पेक्ट्रम की तत्काल नीलामी करने की सख्त आवश्यकता है। जियो ने यह भी कहा है कि स्पेक्ट्रम नीलामी में हो रही देरी से राष्ट्रीय खजाने को नुकसान हो रहा है और इससे कारोबारी सुगमता के बारे में निवेशकों की धारणा खराब हो रही हे।
जियो ने अपने पत्र में कहा है, ‘माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 2012 के फैसले के बाद से हर साल उपलब्ध सभी स्पेक्ट्रम की सफलतापूर्वक एवं फायदेमंद नीलामी की राह में अचानक ठहराव आने के पीछे हमें कोई उचित कारण नहीं दिखता है।’ सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2012 में 2जी मामले में फैसला दिए जाने के बाद हर साल स्पेक्ट्रक की नीलामी आयोजित की जाती रही है। आखिरी बार इसका आयोजन 2016 में हुआ था। पत्र में कहा गया है, ‘इस क्षेत्र के निरंतर एवं व्यवस्थित विकास के लिए, राष्ट्रीय उद्देश्यों को पूरा करने के लिए और सभी को गुणवत्तायुक्त ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम का आवंटन बेहद जरूरी है। इसलिए हम एक बार फिर कहते हैं कि सभी उपलब्ध स्पेक्ट्रम की तुरंत नीलामी की जानी चाहिए।’
आखिरी नीलामी के बाद पिछले चार वर्षों के दौरान मोबाइल ट्रैफिक एवं डेटा खपत में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इस दौरान इसमें करीब 50 गुना बढ़ोतरी हुई है। जियो ने कहा है कि कुछ ऑपरेटर अपनी 2जी तकनीक को बकरार रखना चाहते हैं और पुराने उपकरणों को अधिक से अधिक भुनाना चाहते हैं। लेकिन हमारा मानना है कि राष्ट्र निर्माण की नीतियां कुछ लोगों के निहित हितों के लिए नहीं हो सकतीं हैं खासकर ऐसे समय में जब देश उन तकनीकों से आगे निकल चुका है।