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दिलचस्प रहा है रेजरपे का सफर

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Last Updated- December 14, 2022 | 10:49 PM IST

फिनटेक स्टार्टअप रेजरपे के पहले प्रोटोटाइप को 2014 में करीब 100 बैंकों और ऋणदाताओं द्वारा अस्वीकार दिया था। लेकिन उसके बाद देश में सबसे तेजी से उभरने वाली इस फिनटेक यूनिकॉर्न का सफर काफी दिलचस्प रहा है। इसके सह-संस्थापक और सीईओ हर्षिल माथुर फॉर्मूला-1 रेसिंग के प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वह अपना र्ईंधन भरने के लिए पिटस्टॉप तक अभी-अभी पहुंचे हैं और कई पड़ावों का पार करना अभी बाकी है।
माथुर ने कहा, ‘पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत में माहौल काफी परिपक्व हो चुका है। स्टार्टअप को अब एक अलग नजरिये से देखा जाने लगा है। लेकिन हमरा सफर अभी भी काफी लंबा है। वित्तपोषण और यूनिकॉर्न का दर्जा तो महज एक पड़ाव है।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य अभी भी लगातार बेहतर उपकरण, उत्पाद और सॉफ्टवेयर तैयार करना है ताकि कारोबारियों को उनकी रकम का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिल सके।’
बेंगलूरु के इस स्टार्टअप ने इसी सप्ताह यूनिकॉर्न दर्जा (1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाला स्टार्टअप) हासिल किया है। अब वह उस जमात में पहुंच गया है जहां पेटीएम, फ्लिपकार्ट के निवेश वाला फोनपे, बिलडेस्क और पॉलिसी बाजार जैसे अन्य फिनटेक स्टार्टअप पहले से ही मौजूद हैं।
आईआईटी रुड़की के सहपाठी माथुर और शशांक कुमार क्रमश: श्लमबर्गर और माइक्रोसॉफ्ट में काम कर रहे थे। उन्होंने इस कारोबारी अवसर को उस दौरान महसूस किया जब उन्हें पता चलता कि भुगतान गेटवे का फायदा केवल बड़े कारोबारियों को मिल रहा है। छोटे-मोटे कारोबारियों को ऐसी कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। उस दौरान स्टार्टअप नकद भुगतान को प्राथमिका देते थे क्योंकि उन्हें बैंकों से मंजूरी लेने, कागजी कार्रवाई आदि तमाम समस्याओं से जूझना पड़ता था। साथ ही वे कमीशन का भुगतान भी नहीं करना चाहते थे।
दोनों सहपाठियों ने 2014 में अपनी नौकरी छोड़ दी और जयपुर आकर रेजरपे नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया जो एक बिजनेस टु बिजनेस भुगतान समाधान कंपनी है। उनकी नजर उन सभी छोटे-मोटे कारोबारियों को भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने पर थी जिनके पास रेजरपे के गेटवे से भुगतान स्वीकार करने के लिए कोई वेबसाइट नहीं थी। जल्द उन्हें सिलिकन वैली की कंपनी वाई-कंबिनेटर से मदद मिली जो शुरुआती चरण के स्टार्टअप को संरक्षण देती है।
इस फिनटेक कंपनी ने हाल में डी शृंखला के वित्त पोषण के तहत सिंगापुर के सॉवरिन वेल्थ फंड जीआईसी और मौजूदा निवेशक सिकोया इंडिया के नेतृत्व में 10 करोड़ डॉलर का निवेश हासिल किया है। इससे कंपनी का मूल्यांकन बढ़कर 1 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। रेजरपे इस रकम का इस्तेमाल अपने कारोबार को सुदृढ़ करने और दो नए उत्पाद लाइन- रेजरपेएक्स, नियो-बैंकिंग प्लेटफॉर्म और ऋण इकाई रेजरपे कैपिटल को रफ्तार देने में करेगी।

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First Published - October 13, 2020 | 1:12 AM IST

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