आईबीसी निलंबन पर अभी फैसला नहीं

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 10:53 AM IST

कंपनियों के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया लंबित रखने की अवधि को अब एक सप्ताह बचा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि सरकार ने अभी यह निलंबन आगे जारी रखने या खत्म करने को लेकर कोई फैसला नहीं किया है, क्योंकि इस मसले पर ‘दोनों पक्षों के तर्क मजबूत’ हैं।
अधिकारी ने कहा कि एक तरफ अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं और शेयर बाजार चढ़ रहा है, वहीं दूसरी बात यह है कि दिवाला एवं ऋण शोषण अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत मामले आगे नहीं बढ़ रहे हैं। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘दोनों तर्क उचित हैं। अब तक कोई फैसला नहीं किया गया है। लेकिन इसके लिए अंतिम तिथि है और वित्त मंत्री इस मसले पर आखिरी फैसला लेंगी।’
निलंबन की तिथि बढ़ाने पर सरकार के विचार के बारे में पूछे जाने पर वित्त और कंपनी मामलों के राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘फिलहाल अभी निलंबित रखे जाने की तिथि सिर्फ 24 दिसंबर तक है। अगर कोई बदलाव होता है तो उसके बारे में आपको जानकारी दे दी जाएगी।’
महामारी के कारण दबाव झेल रही कंपनियों को राहत देने के लिए जून में सरकार एक अध्यादेश लाई थी, जिसमें किसी भी चूक के मामले में कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया का सामना कर रही कंपनियों को 25 मार्च से 6 महीने तक के लिए राहत दी गई थी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इस अवधि के दौरान चूक के मामलों में इस तरह की प्रक्रिया की कोई पहल न की जाए।
यह निलंबन सितंबर महीने में 3 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था, जिसकी अवधि 24 दिसंबर को खत्म हो रही है। आईबीसी कानून सरकार को यह अधिकार देता है कि वह निलंबन बढ़ा सकती है, लेकिन यह अवधि एक साल से ज्यादा नहीं हो सकती, जिसका मतलब यह है कि इसे 24 मार्च 2021 तक बढ़ाया जा सकता है।
सरकार जहां इसे लंबित रखने के विकल्प पर विचार कर रही है, वहीं उच्चतम न्यायालय ने भी कर्ज की किस्त टालने (मॉरेटोरियम) की अवधि को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। शीर्ष न्यायालय कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहाहै, जिसमें 6 महीने से आगे किस्त टालने की सुविधा के विस्तार या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज माफ किए जाने की मांग की गई है।
अर्थव्यवस्था में बदलाव आसान करने के लिए विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 3 चरणों के कदमों का सुझाव दिया है, जिससे अर्थव्यवस्था सकारात्मक दिशा में जा सके। पहला दिवाला और कर्ज वसूली की गतिविधियों से जुड़े कदमों को रोकना है। दूसरे चरण में जब बड़े पैमाने पर दिवाला मामले आने के अनुमान हैं, इसका समाधान न्यायालय के बाहर विशेष समाधान के तरीके अपनाकर करने का सुझाव है। तीसरे चरण में नियमित ऋण समाधान के साथनों का इस्तेमाल है, जिससे शेष मामलों को सुलझाया जा सके और मध्यावधि के हिसाब से आर्थिक वृद्धि को समर्थन दिया जा सके।
वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘इन तीन क्षेत्रों में कुछ काम पहले ही किया जा चुका है। दबाव वाली संपत्तियों के लिए प्री पैकेज्ड स्कीम और एमएसएमई के लिए विशेष ढांचे जैसे कदम उठाए गए हैं।’
दिवाला मामलों का एक अहम हिस्सा संपत्ति की बिक्री का सामना कर रहा है, ऐसे में विशेषज्ञों का माना है कि दबाव वाली संपत्तियों में इस समय निवेशकों की रुचि कम है और निलंबन को विस्तार दिए जाने से तमाम कंपनियों को राहत मिल सकती है, जो महामारी के कारण कठिन दौर से गुजर रहे हैं।  सीआरआईपी के आदेश के मुताबिक संपत्ति की बिक्री  के 50 प्रतिशत मामले आए हैं, जिनकी तुलना में 13.41 प्रतिशत मामलों को ही समाधान योजना से खत्म किया जा सका है।

First Published : December 17, 2020 | 11:52 PM IST