नाइजीरियाई नियामक नैशनल एजेंसी फॉर फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ऐंड कंट्रोल (एनएएफडीएसी) ने घटिया दवा निर्माण की वजह से वड़ोदरा की मार्स रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड को काली सूची में डाल दिया है।
एनएएफडीएसी ने कंपनी द्वारा नाईजीरिया को निर्यात के लिए फर्जी तरीके से सिप्रोफ्लॉक्सेसिन 500एमजी फिल्म कोटेड टैबलेट के आठ बैच निर्माण के संबंध में दवा उत्पाद निरीक्षण उल्लंघन के मामले के आधार पर मार्स रेमेडीज के खिलाफ यह कदम उठाया है। मार्स रेमेडीज नाइजीरिया की दवा कंपनियों के लिए अनुबंध के तौर पर निर्माण में लगी हुई है।
नियामक ने कंपनी को लिखे पत्र में कहा है, ‘हमारे पास इसका रिकॉर्ड है कि एजेंसी द्वारा मान्यताप्राप्त व्हाइट कलर्ड पिनेकल सिप्रोफ्लॉक्सेसिन 500एमजी फिल्म कोटेड टैबलेट बीपी &10 एलू-एलू स्ट्रिप ब्लिस्टर प्राइमरी पैकेज में पैक्ड हैं, जबकि आपकी कंपनी द्वारा येलो कलर की टैबलेट और व्हाइट कलर्ड टैबलेट &10 (एलू-पीवीसी ब्लिस्टर पैक में) के तौर पर फर्जी तरीके से तैयार की गई हैं। इस अंतर से उत्पाद गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और इस तरह के बदलाव करने से पहले इन दवाओं की शेल्फ-लाइफ के बारे में भी एजेंसी को नहीं बताया गया था। इसलिए यह एनएएफडीएसी ऐक्ट का उल्लंघन है।’
एनएएफडीएसी ने कंपनी के वड़ोदरा स्थित वाघोडिया संयंत्र को काली सूची में डाल दिया है और उसे तैयार दवा उत्पादों की हाई-रिस्क विदेशी निर्माता के तौर पर घोषित किया है। साथ ही इस संयंत्र द्वारा निर्मित उत्पाद नाईजीरिया में बिकने की अनुमति नहीं होगी।
मार्स रेमेडीज को काली सूची में डाले जाने के मामले पर गुजरात में राज्य खाद्य एवं दवा नियंत्रक प्रशासन (एफडीसीए) द्वारा भी चिंता जताई गई है। दरअसल, कुछ महीने पहले, मार्स रेमेडीज को एफडीसीए द्वारा उत्पादन बंद करने के नोटिस के साथ साथ कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।
एफडीसीए गुजरात के कमिश्नर एच जी कोशिया ने कहा, ‘ब्लैकलिस्टिंग का मामला हमारे पास आया है। हमने कुछ महीने पहले भी जांच की थी और कुछ अनियमितताएं पाई थीं जिसके बाद नियामकीय मानकों के उल्लंघन के तहत हमने निर्माण बंद करने का नोटिस जारी किया था। बाद में कंपनी ने जरूरी उपाय करने और बाद की जांच में नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया था।’