फोर्ड मोटर कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम साझेदार के तौर पर महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) की दूसरी पारी शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई है। दोनों कंपनियों ने प्रस्तावित इक्विटी साझेदारी को खत्म करने का निर्णय लिया है जिसके तहत फोर्ड ने अपनी भारतीय सहायक कंपनी का नियंत्रण महिंद्रा को सौंपने की योजना बनाई थी।
प्रस्तावित संयुक्त उद्यम के खत्म होने के साथ ही दोनों वाहन कंपनियां विश्व के पांचवें सबसे बड़े वाहन बाजार में अपनी-अपनी स्वतंत्र रणनीतियों को आगे बढ़ाएंगी। इस बीच महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने सांगयोंग मोटर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए किसी संभावित खरीदार के साथ सौदा फरवरी के अंत तक पूरा होने की उम्मीद जताई है।
इन दोनों खबरों से आनंद महिंद्रा के नेतृत्व वाली कंपनी की पूंजी आवंटन संबंधी रणनीति में सख्ती की झलक मिलती है। यह रुझान चालू वित्त वर्ष के आरंभ से ही दिखने लगा था। यह कोविड-19 वैश्विक महामारी के दूरगामी प्रभाव और घरेलू एवं वैश्विक स्तर परकंपनियों की कारोबारी योजनाओं पर उसके प्रभाव का भी एक संकेत है।
रिलायंस सिक्योरिटीज के अनुसंधान प्रमुख मितुल शाह ने कहा, ‘इन दोनों खबरों (फोर्ड के साथ संयुक्त उद्यम और सांगयोंग में हिस्सेदारी बिक्री) से पूंजी आवंटन संबंधी दृष्टिकोण और इक्विटी पर रिटर्न का पता चलता है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।’ कंपनी ने इक्विटी पर 18 फीसदी रिटर्न का अनुमान लगाया है।
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ पवन गोयनका ने फोर्ड के साथ्थ प्रस्तावित संयुक्त उद्यम की घोषणा करते हुए कहा, ‘दोनों कंपनियों का स्पष्ट मत है कि वर्तमान परिस्थिति में इस सौदे को रद्द करना एक विवेकपूर्ण निर्णय है।’ इससे कंपनी की प्राथमिकताओं में बदलाव का भी पता चलता है। उन्होंने आज संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, ‘हम थोड़े समय में अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी नहीं बता सकते।’
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के ग्रुप सीएफओ अनीश शाह ने कहा कि इस संयुक्त उद्यम को आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं था क्योंकि इसमें उम्मीद से कहीं अधिक निवेश करने की आवश्यता थी। उन्होंने कहा, ‘हमने जो मांग देखी है उसके आधार पर इस संयुक्त उद्यम में 1,400 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ता जो कहीं अधिक है।’
दोनों कंपनियों के बीच प्रस्तावित संयुक्त उद्यम सौदे के तहत फोर्ड को अपने दो संयंत्रों के साथ स्थानीय परिचालन को एक संयुक्त उद्यम कंपनी में बदलने की योजना थी जिस पर महिंद्रा का नियंत्रण होता। फोर्ड को भारत में अपने अधिकांश कारोबार की कमान महिंद्रा की हाथों में देने की तैयारी थी। नई शर्तों के तहत फोर्ड देश में अपने एकल कारोबार को जारी रखेगी।
जहां तक अगले कदम का सवाल है तो दोनों कंपनियां अगले दो से तीन महीनों में उन सभी परियोजनाओं की समीक्षा करेंगी जहां उन्होंने सहयोग करने के लिए सहमति जताई थी। इनमें अन्य बातों के अलावा महिंद्रा द्वारा फोर्ड को इंजन की आपूर्ति और साथ मिलकर मॉडलों का विकास शामिल हैं।
इस बीच, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा कोरिया की अपनी संकटग्रस्त सहायक इकाई सांगयोंग मोटर में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए किसी खरीदार को तलाशने के अंतिम चरण में है। गोयनका ने कहा, ‘अगले सप्ताह हम सांगयोंग मोटर के लिए एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह सौदे केलिए कमोबेश सहमति बन गई है। यदि सबकुछ ठीक रहा तो हम 28 फरवरी तक कोई अंतिम निर्णय ले लेंगे।’ उन्होंने कहा कि बिक्री के बाद सांगयोंग मोटर में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा की हिस्सेदारी घटकर 30 फीसदी के दायरे में रह जाएगी।