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रसना के संस्थापक खंबाटा का निधन

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Last Updated- December 10, 2022 | 11:13 AM IST

घरेलू पेय ब्रांड रसना के संस्थापक और चेयरमैन अरीज पिरोजशॉ खंबाटा का शनिवार को अहमदाबाद में 85 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। पिरोजशॉ के पुत्र खंबाटा 1962 में व्यवसाय में शामिल होने वाली दूसरी पीढ़ी के सदस्य थे। नारंगी रंग के पेय रसना ने 80 के दशक में उस समय लोकप्रियता हासिल की जब भारतीय पेय बाजार में लिम्का, गोल्ड स्पॉट और थम्स-अप जैसे कार्बोनेटेड पेय ब्रांडों का बोलबाला था। आज रसना न सिर्फ देश के लाखों घरों में उपलब्ध है, बल्कि दुनिया के 60 देशों में भी निर्यात होता है। 
कपंनी की शुरुआत 1940 में हुई थी, आरंभ में रसना सिर्फ पेय बेचती थी और उसका कारोबार व्यवसाय-से-व्यवसाय के बीच ही सीमित था। बाद में कंपनी ने व्यवसाय-से-उपभोक्ता बाजार में कदम रखा और शुरुआत में जाफ ब्रांड के तहत पेय बेचा। उस समय उत्पाद केवल गुजरात के भीतर ही वितरित किया जाता था। 1970 के दशक के अंत में जाफ को रसना के रूप में फिर से लॉन्च किया गया।

जब खंबाटा व्यवसाय से जुड़े तो उन्होंने पीओमा इंडस्ट्री को व्यवसाय-से-व्यवसाय और व्यवसाय-से-उपभोक्ता इकाई दोनों के रूप में चलाना जारी रखा। उस समय रसना 5 रुपये के पैक में बेचा जाने वाला एक गाढ़ा घोल था। इसके विज्ञापन में दिखाया जाता था कि रसना का एक पैक कुल 32 गिलास संतरे की स्वाद वाला नागंरी रंग का पेय बना सकता है। 
कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘यह उल्लेख करना गलत नहीं होगा कि खंबाटा ने विश्व प्रसिद्ध ‘रसना’ ब्रांड बनाकर भारत का असली स्टार्टअप शुरू किया, जो आज भी लाखों भारतीयों की प्यास फल, विटामिन और पोषक तत्वों के साथ मुश्किल से 1 रुपये की कीमत पर बुझाता है।’ 

कंपनी ने यह भी कहा कि खंबाटा ने अपने प्रयासों से देश भर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नौकरीयों का सृजन किया। उनके द्वारा विकसित फल आधारित उत्पाद से देश भर में लाखों किसानों को उनकी फसलों का बेहतर मूल्य मिला हैं।
खंबाटा के पुत्र पिरूज खंबाटा ने वर्ष 1992 में 18 साल की छोटी उम्र में व्यवसाय में कदम रखा। रसना को ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक सुलभ बनाने का फैसला किया और 2 रुपये का पैक लॉन्च किया, जो 6 गिलास नारंगी रंग का पेय बना सकता है।

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First Published - November 22, 2022 | 1:52 AM IST

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