आईटी

माइक्रोसॉफ्ट में होगी बड़ी छंटनी! 4,800 कर्मचारियों की जाएगी नौकरी, AI का बढ़ता खर्च बना बड़ी वजह

AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च और शेयरों में गिरावट के बीच माइक्रोसॉफ्ट ने अपने 4,800 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का बड़ा फैसला किया है

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- July 06, 2026 | 8:18 PM IST

दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने वर्कफोर्स (कर्मचारियों की संख्या) में करीब 2.1 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला किया है। इसके तहत कंपनी लगभग 4,800 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही है। टेक जगत में छंटनी का यह नया दौर ऐसे समय पर आया है जब विंडोज बनाने वाली यह कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर पानी की तरह पैसा बहा रही है और अपने बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए इस तकनीक का सहारा ले रही है।

दरअसल, इस साल बड़ी टेक कंपनियों का AI पर खर्च 700 अरब डॉलर के पार जाने की उम्मीद है। ऐसे में कंपनियों पर इस भारी-भरकम निवेश के बदले मुनाफा कमाने और बढ़ते खर्चों को कम करने का भारी दबाव है। माइक्रोसॉफ्ट से पहले इस साल अमेजन और मेटा जैसी बड़ी कंपनियां भी हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं।

माइक्रोसॉफ्ट ने नौकरी में इस कटौती का ऐलान सोमवार को एक बेहद चुनौतीपूर्ण छमाही के बाद किया है। साल 2026 के शुरुआती छह महीनों में कंपनी के शेयरों में करीब 23 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो साल 2022 के बाद से इसका सबसे खराब प्रदर्शन है।

इससे पहले इसी साल कंपनी ने अपने अमेरिकी वर्कफोर्स के करीब 7 फीसदी यानी लगभग 9,000 कर्मचारियों को अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ने यानी वॉलंटरी रिटायरमेंट की पेशकश भी की थी। आमतौर पर माइक्रोसॉफ्ट जून में अपना वित्त वर्ष खत्म होने के दौरान इस तरह की छंटनी करती है, ताकि नए साल के लिए खर्चों की प्लानिंग की जा सके।

 Also Read: भारत में नहीं आएगा व्हाट्सऐप का नया ‘यूजरनेम फीचर’? सरकार की आपत्ति के बाद Meta बैकफुट पर!

बिजनेस में मंदी के चलते बड़े बदलाव की तैयारी में कंपनी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती मांग ने माइक्रोसॉफ्ट के ‘अज्यूर’ (Azure) क्लाउड कंप्यूटिंग बिजनेस को तो आगे बढ़ाया है, लेकिन डेटा सेंटर्स बनाने में आ रही भारी लागत ने कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव बना दिया है। कंपनी ने साल 2026 के लिए 190 अरब डॉलर के पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) का अनुमान लगाया है, जो एक्सपर्ट्स की उम्मीदों से काफी ज्यादा है।

इसके अलावा, डेटा सेंटर्स की मांग के कारण मेमोरी चिप्स की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे मजबूरन माइक्रोसॉफ्ट को अपने गेमिंग कंसोल ‘एक्सबॉक्स’ के दाम बढ़ाने पड़े हैं, जबकि बाजार में इसकी मांग पहले से ही कमजोर थी।

गेमिंग डिवीजन की नई प्रमुख आशा शर्मा ने पिछले महीने कर्मचारियों को भेजे एक मैसेज में साफ कहा था कि इस बिजनेस को एक ‘रीसेट’ की जरूरत है क्योंकि इसका प्रॉफिट मार्जिन घटकर महज 3 फीसदी रह गया है। उन्होंने बताया कि एक्टिविजन ब्लिजार्ड किंग को छोड़कर, पिछले पांच वर्षों में कंटेंट, प्लेटफॉर्म और हार्डवेयर सब्सिडी पर 20 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए गए, लेकिन इस दौरान सालाना कमाई में आधा अरब डॉलर की गिरावट आई। उन्होंने दो टूक कहा कि आगे ऐसा नहीं चल सकता। यही वजह है कि कंपनी अब एक्सबॉक्स गेमिंग यूनिट में बदलाव या इसे एक अलग सहायक कंपनी के रूप में स्थापित करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।

(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

First Published : July 6, 2026 | 8:09 PM IST