मौजूदा मंदी और अनिश्चितताओं के बीच बांग्लादेश और वियतनाम के बाद एशिया में भारतीय लघु एवं मझोले कारोबारी तीसरे सबसे अधिक आशावादी उद्यमी हैं।
द्विवार्षिक एचएसबीसी एशिया-पैसीफिक स्मॉल बिजनेस कॉन्फिडेंस मॉनिटर के मुताबिक 98 फीसदी लघु एवं मझोले उद्यम (एसएमई) को अपने कर्मचारियों की संख्या का स्तर बरकरार रहने या इसमें इजाफा होने की उम्मीद है।
यह सर्वे अक्टूबर और नवंबर 2008 में 10 एशियाई देशों में कराया गया जिसमें लगभग 3,000 एसएमई को शामिल किया गया। सर्वेक्षण के निष्कर्ष में पाया गया है कि भारत, बांग्लादेश और वियतनाम में एसएमई अपने कारोबार को लेकर ज्यादा आशावादी हैं जबकि सिंगापुर, ताईवान और हांगकांग के छोटे उद्यमी सबसे ज्यादा निराशावादी हैं।
भारत के 38 फीसदी छोटे कारोबारी आर्थिक परिदृश्य को लेकर आशान्वित हैं जबकि 6 महीने पहले यह प्रतिशत 59 था। भारत के 47 फीसदी छोटे उद्यमियों ने पूंजी खर्च में इजाफा करने और 46 फीसदी अन्य उद्यमियों ने अपने पूंजी खर्च को समान स्तर पर बनाए रखने की योजना बनाई है।
एचएसबीसी के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख (कमर्शियल बैंकिंग) पुनीत चङ्ढा ने कहा, ‘सर्वेक्षण में मिली प्रतिक्रिया में भारतीय अर्थव्यवस्था और स्थानीय मांग में मजबूत भरोसा जताया गया है।
तकरीबन 93 फीसदी एसएमई, जो कारोबार में गिरावट की उम्मीद कर रहे थे, अभी भी पूंजी निवेश पर आगे बढ़ रहे हैं और इन सभी को अपने कर्मचारियों की संख्या के स्तर को बरकरार रखने या इसमें इजाफा किए जाने की उम्मीद है।’
भर्ती के मोर्चे पर, भारत में 98 फीसदी एसएमई ने अपने कर्मचारियों की संख्या बरकरार रखने या इसमें इजाफा करने की योजना बनाई है। सर्वे में पाया गया है कि ज्यादातर एशियाई एसएमई ने अपने स्टाफ की संख्या बढ़ाने और पूंजी निवेश को बरकरार रखने का ऐलान किया है।
इस सर्वेक्षण में कंपनियों से अगले 6 महीने के लिए उनके स्थानीय आर्थिक परिदृश्य के बारे में पूछ गया। उनसे पूंजी खर्च में बढ़ोतरी करने या इसमें कटौती करने, कर्मचारियों के स्तर और चीन, शेष एशिया और शेष दुनिया के साथ कारोबार की उनकी संभावनाओं के बारे में भी पूछा गया।
भारतीय एसएमई ने यह भी भरोसा जताया है कि भविष्य में उनके विकास के लिए बैंकों की वित्तीय मदद एक अहम भूमिका निभाएगी।