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हीरो फ्यूचर जुटाएगी 25 करोड़ डॉलर

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Last Updated- December 14, 2022 | 10:26 PM IST

हीरो फ्यूचर एनर्जीज (एचएफई) भारत से बाहर अपनी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए 25 करोड़ डॉलर की इक्विटी जारी करेगी। कंपनी कोष उगाही के लिए प्रमुख वैश्विक संस्थागत फाइनैंसरों के साथ बातचीत कर रही है। कोष उगाही के इस चरण के साथ, एचएफई 1 अरब डॉलर की स्वच्छ ऊर्जा कंपनी बन जाएगी।
कोष उगाही योजनाओं की पुष्टि करते हुए एचएफई के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राहुल मुंजाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि कंपनी के लिए यह फंडिंग राउंड तीन साल में 5-गीगावॉट के लक्ष्य पर पहुंचने में मददगार होगा। एचएफई की भारत में 500 मेगावॉट क्षमता और विदेश में 2 जीडब्ल्यू क्षमता निर्माणाधीन है। भारत में उसकी 1.5 जीडब्ल्यू की चालू क्षमता है। मुंजाल ने कहा, ‘हम पूंजी जुटाने के लिए बाजार में हैं और हम ताजा इक्विटी जारी करेंगे। हमारा मकसद गैर-भारतीय बाजारों में अपने परियोजना प्रवाह के वित्त पोषण के लिए 25 करोड़ डॉलर तक रकम जुटाना है।’
बी एम मुंजाल समूह की स्वच्छ ऊर्जा इकाई एचएफई ने हाल में बांग्लादेश, यूक्रेन और वियतनाम में अपनी पहली सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं हासिल की हैं। कंपनी द्वारा हासिल की गई कुल परियोजना क्षमता 2 गीगावॉट की है।
एचएफई ने इस सौदे के लिए एचएसबीसी को नियुक्त किया है। कोष उगाही की पहल पैतृक कंपनी स्तर पर की जा रही है। पैतृक कंपनी का मुख्यालय लंदन में है। वर्ष 2019 में, एचएफई ने अपनी ब्रिटिश स्थित इकाई को नया स्वरूप प्रदान किया था। उसकी भारतीय और सिंगापुर की सहायक इकाइयां अब ऐसी विशेष उद्देश्य वाली कंपनियों की होल्डिंग कंपनियां हैं जो सौर संयंत्र संचालित करती हैं। अपना आधार किसी अन्य क्षेत्र को स्थानांतरित करने वाली यह पहली भारतीय अक्षय ऊर्जा कंपनी है।
इस कदम का मकसद ब्रिटेन और वैश्विक बाजार में बेहतर वित्तीय अवसरों के लिए एचएफई ग्लोबल को तैयार करना था। साथ ही, अपना आधार बढ़ाने के लिए कंपनी ने कई देशों (खासकर अफ्रीकी क्षेत्र) के साथ ब्रिटेन की व्यापार संधियों का इस्तेमाल करने की की योजना बनाई है।
मुंजाल ने कहा, ‘भारत में हमारी परियोजनाओं ने हमारा दायरा बढ़ाया है, लेकिन पर्याप्त जोखिम समायोजित प्रतिफल नहीं मिला है। इसके लिए, हम ऐसी परियोजनाएं तलाश रहे हैं जो वैश्विक हैं। हमारी कई परियोजनाएं भारत से बाहर की हैं और इनका प्रतिफल डॉलर से संबंधित है जिससे विदेशी मुद्रा का जोखिम नहीं है।’
भारत में परियोजनाओं को बेचने की योजनाओं का खंडन करते हुए मुंजाल ने कहा कि हम इस क्षेत्र पर ध्यान बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा, ‘लेकिन हमें अच्छे प्रतिफल के प्रयास में वैश्विक रूप से परियोजनाओं पर ध्यान देना होगा। यदि हम सिर्फ भारत पर केंद्रित बने रहेंगे तो मार्जिन पर भी दबाव रहेगा। मेगावॉट के संदर्भ में, हम सर्वोच्च नहीं बन सकते हैं, लेकिन मुनाफा प्रतिशत के संदर्भ में हम ऐसा कर सकते हैं।’
हालांकि एचएफई राजस्थान में अपनी 250 मेगावॉट की बड़ी परियोजना में हिस्सेदारी बेच रही है। मुंजाल ने कहा, ‘जब हम होल्डिंग कंपनी के स्तर पर पूंजी जुटाते हैं, निवेशक को भी हमारी परियोजनाएं स्थापित करने के लिए विशेष उद्देश्य वाली कंपनी में अल्पांश हिस्सेदारी मिलती है।’

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First Published - October 19, 2020 | 11:45 PM IST

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