हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) ने आज कहा कि उसने 1,508 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज मूल्य पर अपनी फरक्का रायगंज राजमार्ग परियोजना की बिक्री क्यूब हाईवेज को की है। कंपनी अगले साल तक विभिन्न स्रोतों से 1,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त जुटाने की भी संभावनाएं तलाश रही है।
यह सौदा एचसीसी के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत कंपनी स्तर पर ऋण बोझ को घटाने की कोशिश की जा रही है। एक अलग प्रक्रिया के तहत वह अपनी एक विशेष उद्देशीय कंपनी (एसपीवी) को बेच रही है जिसके पास कंपनी का आधा ऋण बोझ और उल्लेखनीय देनदारी है। आज की राजमार्ग परियोजना की बिक्री से कंपनी का ऋण बोझ करीब 1,000 करोड़ रुपये कम हो जाएगा जिसमें परियोजना वित्त पोषण मद में 900 करोड़ रुपये और 100 करोड़ रुपये की ऋण अदायगी शामिल है।
जनवरी में एचसीसी के लेनदारों ने ऋण बोझ वाली परिसंपत्ति को एक विशेष उद्देशीय कंपनी (एसपीवी) में शामिल करने की मंजूरी दी थी। कंपनी के ग्रुप सीईओ अर्जुन धवन ने कहा, ‘हमारे मौजूदा 5,600 करोड़ रुपये में से करीब आधा ऋण बोझ एसपीवी के पास हस्तांतरित हो जाएगा जहां दावों के लिए 2.2 गुना कवर होगा।’ उन्होंने कहा कि इस एसपीवी के लिए एक निवेशक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही लेनदारों और कंपनी को बाध्यकारी बोलियां पहले ही मिल चुकी हैं।
धवन ने उम्मीद जताई कि चालू कैलेंडर वर्ष के अंत से पहले यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। कंपनी ने कहा कि एचसीसी के लेनदारों ने कंपनी के बहीखाते पर शेष ऋण के लिए 4 से 5 साल की मोहलत देने के लिए सहमति दी है। इसके अलावा एचसीसी अपने भूखंडों और गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों की बिक्री आदि के जरिये एक साल के भीतर 1,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त जुटाने की संभावनाएं तलाश रही है। धवन ने कहा कि इस रकम का इस्तेमाल कंपनी के कारोबार के विस्तार में किया जाएगा।
फरक्का रायगंज राजमार्ग परियोजना की बिक्री क्यूब को करने के साथ ही एचसीसी की सड़क परियोजनाओं के पोर्टफोलियो में परिालन वाली ब्रह्मपुर-फरक्का राजमार्ग परियोजना बची रहेगी जिसके लिए 18 महीने का निर्माण कार्य लंबित है। धवन ने कहा कि कंपनी इसे पूरा होने पर 1,300 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज मूल्य पर बेचने की योजना बना रही है। इसकी बिक्री के साथ ही एचसीसी निर्माण, परिचालन एवं हस्तांतरण (बीओटी)- टोल मॉडल परियोजना से बाहर हो जाएगी।