facebookmetapixel
Advertisement
‘मेक इन इंडिया’ से ‘ग्लोबल बाजारों तक’: नए FDI नियमों से 1.8 करोड़ मैन्युफैक्चरिंग MSME के लिए खुलेंगे नए दरवाजें RBI ने टाटा संस को अपर लेयर एनबीएफसी की लिस्ट में बरकरार रखा, लिस्टिंग पर अभी भी बना सस्पेंसLIC Q1FY27 Results: प्रीमियम इनकम में उछाल से 23% बढ़ा मुनाफा, कमाए ₹2,37,848 करोड़Cabinet Decision: असम में हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ा बूस्ट, ₹8,970 करोड़ की लागत वाले गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर को हरी झंडीCabinet Decision: ₹23,731 करोड़ की ‘गोबरधन’ योजना को हरी झंडी, बायोगैस उत्पादन को मिलेगा बढ़ावालखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी पर 2 साल का प्रतिबंध, 3 अधिकारी निलंबितPNB हाउसिंग फाइनेंस पर ब्रोकरेज बुलिश, Q1 नतीजों के बाद शेयर में तेजी, ब्रोकरेज ने दिया ₹1,390 तक का टारगेटRBI पॉलिसी से बॉन्ड मार्केट को मिला सहारा, Debt Funds में निवेशक कहां लगा सकते हैं दांव?AI के दौर में छोटी कंपनियां बनेंगी रोजगार का बड़ा जरिया: नंदन नीलेकणिभारत में गूगल के 15 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट पर मंडराया पर्यावरण का खतरा

डीएचएफएल पर फंसेगा कानूनी पेच!

Advertisement
Last Updated- December 10, 2022 | 2:13 AM IST

संकटग्रस्त कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनैंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के लिए बोली सौंपने वाली अमेरिका की ओकट्री और पीरामल समूह ने एक दूसरे के खिलाफ मुहिम तेज कर दी है। दोनों ने डीएचएफएल के कर्जदाताओं को अपने-अपने प्रस्ताव को अधिक ठोस करार दिया है। उन्होंने कहा है कि उनके प्रतिस्पद्र्धी की तरफ से सौंपे गए प्रस्ताव कानूनी तौर पर ठोस नहीं हैं और उन्हें न्यायालयों में चुनौती दी जा सकती है।
सभी बोलीदाताओं द्वारा सौंपे गए प्रस्तावों पर 14 जनवरी को मतदान प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। कर्जदाताओं द्वारा गुणवत्ता एवं मात्रात्मक स्तर पर तय 6 मानदंडों पर पीरामल समूह को 9 अंक दिए गए हैं। दूसरी तरफ ओकट्री का कहना है कि कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) उसकी पेशकश का मूल्यांकन 2,700 करोड़ रुपये कम कर रही है, जिससे पीरामल समूह को फायदा पहुंच रहा है। इस रकम में भविष्य में डीएचएफ की जीवन बीमा इकाई की बिक्री के लिए ओकट्री द्वारा अलग से प्रावधान की गई 1,000 करोड़ रुपये रकम और कर्जदाताओं को अतिरिक्त ब्याज के रूप में पेशकश की गई 1,700 करोड़ रुपये की राशि शामिल हैं। ओकट्री ने अतिरिक्त ब्याज की पेशकश 22 दिसंबर को बोली सौंपने की समाप्त समय सीमा के दो दिनों बाद की थी।
ओकट्री और पीरामल दोनों के प्रवक्ताओं ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि इस मामले पर करीब से नजर रख रहे एक सूत्र ने कहा कि ओकट्री की पेशकश पर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है क्योंकि बीमा नियामक इसे एक बीमा उद्यम में हिस्सेदारी लेने की इजाजत नहीं देगा। सूत्र ने कहा कि इस अधिग्रहण से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सीमा का उल्लंघन होगा क्योंकि 51 प्रतिशत हिस्सा पहले ही एक विदेशी साझेदार-प्रैमेरिका के पास है।
इसके अलावा एक अहम बात यह भी है कि अतिरिक्त 1,700 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव बोली सौंपने की समय सीमा के बाद आया है, इसलिए सीओसी ने पेशकश का मूल्यांकन करने वक्त इस पर विचार नहीं किया है। इससे नाराज होकर ओकट्री ने सीओसी को 6 जनवरी को एक पत्र के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया है कि उसका प्रस्ताव पीरामल से किस लिहाज से बेहतर है और क्यों कानूनी रूप से क्रियान्वयन के लिए उपयुक्त है।
ओकट्री ने कहा कि उचित बाजार मूल्यांकन के आधार पर पीरामल के मुकाबले उसका वित्तीय प्रस्ताव 4,503 करोड़ रुपये अधिक है। कंपनी ने कहा कि पीडब्ल्यूसी द्वारा किए गए उचित बाजार मूल्यांकन और उसके बाद प्रशासक को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर उसका एनसीडी 2 प्रतिशत अधिक मूल्यवान है। ओकट्री ने कहा कि इसकी वजह यह है कि उसके एनसीडी एएए- रेटिंग वाले हैं और 7 वर्ष की अवधि के साथ इस पर 6.65 प्रतिशत ब्याज की पेशकश की गई है।

Advertisement
First Published - January 7, 2021 | 11:18 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement