दिल्ली सरकार और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की दो बिजली वितरण कंपनियों- बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना- को 1,864 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान करने अथवा दिवालिया प्रक्रिया का सामना करने के लिए कहा गया है।
अरावली पावर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (एपीसीपीएल) द्वारा इन दोनों कंपनियों को भेजे गए नोटिस में यह बात कही गई है। एपीसीपीएल सरकारी बिजली कंपनी एनटीपीसी, हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) और इंद्रप्रस्थ पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (आईपीजीसीएल) का संयुक्त उद्यम है। एपीसीपीएल ने अपने झज्जर संयंत्र से खरीदी गई बिजली के भुगतान में चूक के बाद यह नोटिस जारी किया है।
दोनों कंपनियों को 2 जनवरी को भेजे गए नोटिस के अनुसार, एपीसीपीएल ने बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल) से 999 करोड़ रुपये और बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) से 865 करोड़ रुपये की मांग की है। ये बकाया मार्च 2020 तक खरीदी गई बिजली के लिए हैं। उसके बाद के बकाये को इसमें शामिल नहीं किया गया है क्योंकि इस अवधि को वैश्विक महामारी प्रभावित अवधि के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
नोटिस में दोनों कंपनियों से कहा गया है कि इस पत्र की प्राप्ति के 10 दिनों के भीतर बिना किसी शर्त के बकाये का भुगतान कर दिया जाए अन्यथा कॉरपोरेट ऋण शोधन अक्षमता प्रक्रिया के लिए तैयार रहें। ऋण शोध अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के नए प्रावधानों के तहत लेनदारों को अपने बकाये की वसूली के लिए कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी गई है।
इस बाबत जानकारी के लिए बीआरपीएल और बीवाईपीएल से तत्काल संपर्क नहीं हो सका। एपीसीपीएल के पास हरियाणा के झज्जर में कोयला आधारित बिजली संयंत्र है और बीआरपीएल एवं बीवाईपीएल उससे बिजली खरीदती हैं। बीएसपीएल और बीवाईपीएल में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की 51 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि शेष हिस्सेदारी दिल्ली सरकार की है। बीआरपीएल राष्ट्रीय राजधानी में दक्षिण एवं पश्चिम क्षेत्रों के 21 जिलों में बिजली वितरित करती है। बीवाईपीएल पूर्वी दिल्ली में बिजली की आपूर्ति करती है।