शिपिंग कॉर्पोरेशन के लिए बोली आमंत्रित

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 10:37 AM IST

सरकार ने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में पूरी हिस्सेदारी बेचने के लिए बोली आमंत्रित की है। बीपीसीएल के बाद अब एक और सरकारी कंपनी के निजीकरण का रास्ता साफ हो गया है।
इच्छुक खरीदारों को शिपिंग कंपनी में सरकार की 63.75 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए 13 फरवरी, 2021 तक रुचि पत्र दाखिल करना होगाा। सरकार की ओर से जारी प्राथमिक सूचना ज्ञापन में कहा गया है कि खरीदार 23 जनवरी तक लेन देन सलाहकार से पूछताछ कर सकते हैं।
भारत में कुल ढुलाई में एक तिहाई का परिचालन शिपिंग कॉर्पोरेशन करता है। जहाजरानी से जुड़े हर क्षेत्र में इसका कारोबार है। कंपनी की 6 संयुक्त उद्यम इकाइयां हैं, जिनमें से 4 को बिक्री में शामिल किया गया है।  दो संयुक्त उद्यमों- ईरानो हिंद शिपिंग कंपनी और सेल एससीआईएल शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड को भंग कर दिया गया है। एक सहायक इकाई इनलैंड ऐंड कोस्टल शिपिंग लिमिटेड भी लेनदेन का हिस्सा है।
कंपनी की गैर प्रमुख संपत्तियों को खत्म किया जाएगा और वे बिक्री का हिस्सा नहीं होंगे।
पिछले साल नवंबर में सरकार ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और कंटेनर कॉर्पोरेशन आफ इंडिया के निजीकरण के साथ इस कंपनी बेचने को मंजूरी दी थी।  कोविड-19 महामारी ने बिक्री प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया है। अगर कंपनी इस साल बिक जाती है तो सरकार के विनिवेश से प्राप्तियों के मद में कुछ धन आ सकेगा। सरकार की इस कंपनी में 63.75 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसका मूल्य 2,535 करोड़ रुपये है।
इसे खरीदने में दिलचस्पी लेने वाले की कुल पूंजी कम से कम 2,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए और पिछले 5 वित्त वर्ष में कम से कम 3 साल  सकारात्मक परिचालन लाभ होना चाहिए। कंपनी के लिए कोई भी निजी कंपनी, सेबी में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष या कंपनी या भारत के बाहर का फंड बोली लगा सकेगा। कर्मचारी भी कंसोर्टियम बनाकर इस लेन देन में स्वतंत्र रूप से शामिल हो सकते हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इस लेन-देन में हिस्सा लेने की पात्र नहीं होंगी।
खरीदार को कर्मचारियों के संरक्षण और वीआरएस सहित सेवानिवृत्ति नीति, असेट स्ट्रिपिंग, कारोबार जारी रखने, शेयरों के लिए लॉक इन अवधि, जहाजों पर भारत का झंडा लगाने जैसी बाध्यताएं होंगी, जिसका उल्लेख शेयर खरीद समझौते में होगा। कंपनी में 1 दिसंबर 2020 तक के आंकड़ों के मुताबिक 3,281 कर्मचारी थे।
फर्म का अधिग्रहण करने के इच्छुक बोलीकर्ताओं की छंटनी के बार उन्हें दूसरे चरण में आरएफपी, मसौदा शेयर खरीद समझौता से गुजरना होगा। उसके बाद वित्तीय बोली प्रस्तुत करनी होगी, जिसके लिए आरक्षित मूल्य तय होगा। सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को सार्वजनिक शेयरधारकों को कम से कम 26 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने के लिए खुली पेशकश करनी होगी। खुली पेशकश किसी न्यूनतम स्तर की स्वीकार्यता के आधार पर सशर्त नहीं की जाएगी।

First Published : December 23, 2020 | 12:17 AM IST