अपोलो हॉस्पिटल्स द्वारा अपने प्रोटॉन थेरपी सेंटर के लिए करीब 350 करोड़ रुपये के संभावित पूंजी निवेश के साथ भागीदार तलाशने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। यह सेंटर दुनिया में इस तरह का पहला आधुनिक रेडिएशन थेरेपी सेंटर है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चेन्नई में स्थित इस केंद्र को करीब 1000 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च के साथ विकसित किया जा रहा है और इसे पूरे व्यवसाय को एक अलग इकाई में स्थानांतरित किया जाएगा। अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज की प्रबंध निदेशक सुनीता रेड्डी ने विश्लेषकों से बातचीत के दौरान कहा कि चेन्नई में लॉकडाउन की वजह से विकास की प्रक्रिया प्रभावित हुई है और प्रबंधन जून के अंत या जुलाई के पहले सप्ताह तक इस मुद्दे पर शेयरधारकों का समर्थन हासिल करने में सफल रहेगा। अपोलो हॉस्पिटल्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी ए कृष्णन का कहना है कि हमारी योजना इस परियोजना पर किए जा चुके पूरे पूंजीगत खर्च को विशेष उद्देश्य वाली कंपनी में स्थानांतरित किए जाने और दो भागीदारों के बीच इक्विटी साझेदारी करने की है।
उन्होंने विश्लेषकों को बताया, ‘इसलिए, हम व्यवसाय स्थानांतरण समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें पूरी प्रोटॉन परियोजना को शामिल किया जाएगा, इसे पूरी तरह से अपोलो के बहीखाते से अलग रखा जाएगा। हम कम से कम 350 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश पर विचार कर रहे हैं।’ इस केंद्र को जनवरी 2019 में शुरू किया गया था और कंपनी चरणबद्घ तरीके से इसे पूंजीकृत कर रही है। उन्होंने कहा कि तीसरे ढांचे को अभी पूंजीकृत नहीं किया गया है और करीब 200 करोड़ रुपये का अन्य पूंजीगत खर्च अभी बाकी है।