कमोडिटी

त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुईं दालें, मांग बढ़ने और कमजोर सप्लाई से भाव 20% तक बढ़े

देश में दाल की कोई कमी नहीं है, सरकार के पास बफर स्टॉक भी मौजूद है, विदेशी बाजारों की अपेक्षा घरेलू बाजार में कीमतें अभी भी कम है।

Published by
सुशील मिश्र   
Last Updated- August 25, 2026 | 4:10 PM IST

Pulses Price Hike पिछले एक महीने में दालों के दाम 15-20 फीसदी बढ़े हैं। आगामी दिनों में त्योहारों के कारण दालों की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे अरहर सहित दूसरे दालों के भाव बढ़ना तय माना जा रहा है। बाजार जानकारों का कहना है कि देश में दाल की कोई कमी नहीं है, सरकार के पास बफर स्टॉक भी मौजूद है, विदेशी बाजारों की अपेक्षा घरेलू बाजार में कीमतें अभी भी कम है। कीमतों में हालिया बढ़ोत्तरी सीजनल है। लेकिन असली चुनौती अक्टूबर के बाद शुरु होगी ।

त्योहारी मांग से महंगी हुई दाल

मानसून सीजन में सप्लाई कमजोर होने और त्योहारी सीजन की मांग रफ्तार पकड़ने की वजह से दालों के दाम बढ़े हैं। बाजार में उड़द दाल की कीमत बढ़कर 130 से 180 रुपये प्रति किलो, अरहर दाल 175 से 195 रुपये, मैसूर दाल 140-150 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। दलहन कारोबार पुखराज चोपड़ा कहते हैं कि हाल के दिनों में चना, उड़द और तुअर की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन ऊंचे आयात के कारण तुअर की कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी होने वाली नहीं है। त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ रही हैं।

साल की पहली छमाही में 31.80 लाख टन दालों का हुआ आयात

इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के आंकड़ों के मुताबिक कैलेंडर वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में भारत का दाल आयात घटकर 31.80 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले के 32.27 लाख टन से 1.46 पुीसदी कम है। इस अवधि के दौरान तुअर का आयात 5.05 लाख टन रहा। अधिकांश आपूर्ति मोजाम्बिक, तंजानिया और सूडान जैसे अफ्रीकी उत्पादक देशों से हुई। इस वर्ष जनवरी-जून के दौरान मोजाम्बिक 1.83 लाख टन से अधिक आपूर्ति के साथ तुअर का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा। इसके बाद म्यांमार से 1.23 लाख टन, तंजानिया से 1.01 लाख टन और सूडान से लगभग 49,049 टन दाल का आयात हुआ।

Also Read: हॉर्मुज में फिर बढ़ा खतरा! कच्चा तेल चढ़ा, ब्रेंट 91 डॉलर के पार

महंगाई पर लगाम लगाने की तैयारी

खाद्य एवं आपूर्ति मामलों के अधिकारियों का कहना है कि सरकार आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए दालों की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है। सरकार के पास करीब 30 लाख टन दालों का बफर स्टॉक है। जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक से बाजार में दालों की आपूर्ति की जाएगी। इस बफर स्टॉक में अरहर, उड़द, मूंग, चना और मसूर शामिल हैं। सरकार बाजार की कीमतों पर लगातार नजर रखे हुए है। जैसे ही कीमतों में असामान्य तेजी दिखेगी, तय अंतराल और योजनाबद्ध तरीके से दालों को बाजार में उतारा जाएगा।

अल-नीनो के खतरें से भड़क सकती है महंगाई

अल-नीनो के खतरे के कारण घरेलू उत्पादन में गिरावट की चिंताओं के बीच दालों के घटते आयात ने महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ा दिया है। फिलहाल देश में दलहन फसलों की बुवाई अच्छे स्तर पर पहुंच गई है लेकिन मुख्य चिंता प्रति हेक्टेयर पैदावार को लेकर है। दालों की फसल को बीच के चरण में अच्छी बारिश की जरूरत होती है। अगस्त के अंत से सितंबर तक अल नीनो के मजबूत होने के संकेत हैं, जिसका सीधा नकारात्मक असर दालों की उत्पादकता और कीमत पर पड़ सकता है।

अभी से करनी होगी चुनौती से निपटने की तैयारी

फॉर्मर्स ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील बलदेवा कहते हैं कि दालों की कीमतों में बढ़ोत्तरी सीजनल है, हर साल इस मौसम में 8-10 फीसदी की बढ़ोत्तरी होती है। सरकार और व्यापारियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है इसीलिए दाल के दामों में फिलहाल बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी होने वाली नहीं है। असली चुनौती अक्टूबर के बाद आने वाली है। इस साल अभी तक करीब 14 फीसदी बारिश कम हुई है। कम बारिश के कारण जमीन में नमी भी कम होगी जिससे आने वाले रबी सीजन की बुवाई प्रभावित हो सकती है और चालू खरीफ सीजन की पैदावार (प्रति हेक्टेयर) कम होने की आशंका हो रही है। यदि ऐसा हुआ तो अक्टूबर के बाद कीमतें तेजी से भागेंगी। इस चुनौती से निपटने की तैयारी अभी से करनी होगी।

खरीफ सीजन में दलहन की बुवाई बेहतर

दलहन के मामले में तस्वीर बेहतर रही है। 21 अगस्त तक दलहन का कुल रकबा 113.63 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 112.14 लाख हेक्टेयर था। इस तरह दलहन की बुवाई में 1.49 लाख हेक्टेयर यानी 1.33% की वृद्धि हुई है। उड़द के रकबे में पिछले साल की तुलना में 12.22% की मजबूत वृद्धि हुई है, जबकि अरहर की बुवाई 0.97% बढ़ी है। दूसरी ओर, मूंग का रकबा 3.67% घटा है।

First Published : August 25, 2026 | 4:10 PM IST