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सरकार ने कच्ची चीनी आयात की शर्तें बदलीं, रिफाइनिंग-बिक्री के लिए दिया 2 महीने का समय

पिछले आदेश के तहत टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को घरेलू बाजार में 31 अक्टूबर तक बेचने के लिए काफी पहले ही रिफाइंड चीनी में प्रोसेस करना जरूरी था

Published by
ऋषभ शर्मा   
संजीब मुखर्जी   
Last Updated- August 25, 2026 | 7:07 PM IST

आयातकों को राहत देते हुए केंद्र सरकार ने ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी के आयात की शर्तों में बदलाव किया है। सरकार ने आयात की गई चीनी को प्रोसेस करने और रिफाइंड चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की 31 अक्टूबर की समयसीमा हटा दी है। सोमवार को जारी एक सरकारी नोटिफिकेशन में, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 20 अगस्त को जारी अपने पिछले आदेश में संशोधन किया। पिछले आदेश के तहत टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को घरेलू बाजार में 31 अक्टूबर तक बेचने के लिए काफी पहले ही रिफाइंड चीनी में प्रोसेस करना जरूरी था। हालांकि, अब आयातक कच्ची चीनी को प्रोसेस कर इसे घरेलू बाजार में दिसंबर तक बेच सकते हैं।  

आयातकों को नई शर्तों से बड़ी राहत

संशोधित शर्त के तहत, आयात की गई कच्ची चीनी को सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचना होगा। यह प्रक्रिया बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। बिल ऑफ एंट्री वह कस्टम्स घोषणा है, जिसे आयातक आने वाली खेप के लिए दाखिल करता है। हालांकि, चीनी के आयात की 31 अक्टूबर की अंतिम तारीख में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

सरकार ने क्यों बदला फैसला?

यह फैसला उद्योग की ओर से पहले तय की गई 31 अक्टूबर की समयसीमा को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद लिया गया है। चीनी आयात के संभावित प्रमुख स्रोत ब्राजील से भारत तक खेप पहुंचने में करीब 40-45 दिन लगते हैं। इसके बाद बंदरगाह पर हैंडलिंग, रिफाइनरी तक परिवहन और आयात से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं में भी समय लगता है। इसके बाद ही कच्ची चीनी को प्रोसेस किया जा सकता है। खेप के भारत पहुंचने के बाद रिफाइनर्स को कच्ची चीनी को सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलने और उसे घरेलू बाजार में उपलब्ध कराने में भी समय लगता है।

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आयातकों को चीनी बेचने की नई छूट

एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत चीनी रिफाइनर्स बिना आयात शुल्क चुकाए कच्ची चीनी का आयात कर सकते हैं। इसके बदले उन्हें भारत में चीनी को प्रोसेस करके तैयार उत्पाद को निर्यात करना होता है।

20 अगस्त के नोटिफिकेशन के मुताबिक, इस योजना के तहत पहले ही कच्ची चीनी आयात कर चुके रिफाइनर्स को उस मात्रा को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) में ट्रांसफर करने की अनुमति दी गई है। इसके लिए उन्हें आयात के समय मिली GST छूट की राशि का भुगतान करना होगा। इसके बाद वे उस चीनी को रिफाइन करके भारत में बेच सकते हैं, यानी उन्हें इसे निर्यात करने की जरूरत नहीं होगी।

महंगी चीनी से निपटने की सरकारी पहल

सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। करीब एक दशक में यह इस तरह का पहला फैसला है। यह कदम त्योहारी सीजन से पहले घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और 2025-26 के चीनी उत्पादन अनुमान में कमी के बाद उठाया गया है। चीनी का यह मार्केटिंग वर्ष अक्टूबर से सितंबर तक चलता है।

सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी तय की है। इसके साथ ही राज्यों को जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए जांच तेज करने का निर्देश दिया गया है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

First Published : August 25, 2026 | 6:58 PM IST