प्रतीकात्मक फोटो
IT Sector Growth: देश की IT कंपनियां इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रही हैं। एक तरफ उनके ट्रेडिशनल बिजनेस की रफ्तार धीमी है। दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी तकनीक और स्पेशलाइज्ड AI टैलेंट पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है। इसके बावजूद आने वाले समय में कंपनियों की कमाई की स्थिति बेहतर हो सकती है।
ऑटोमेशन बढ़ने और डिजिटल इनवेस्टमेंट का फायदा मिलने से FY27 तक IT कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन 21.8 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ FY26 में 6.1 फीसदी रहने का अनुमान है। FY27 में भी यह करीब 6 फीसदी रह सकती है।
IT कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल सर्विसेज से जुड़े बिजनेस को बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इसके लिए उन्हें स्पेशलाइज्ड AI टैलेंट की जरूरत पड़ रही है, जिसकी सैलरी अन्य के मुकाबले ज्यादा होती है।
साथ ही कंपनियों को मौजूदा कर्मचारियों को नई तकनीक के लिए ट्रेनिंग भी देना पड़ रहा है। इसके अलावा एआई से जुड़े प्लेटफॉर्म, इक्विपमेंट और डेटा सेंटर्स पर भी पैसा खर्च किया जा रहा है। नतीजतन, कंपनियों के मार्जिन पर दबाव देखने को मिला।
रिपोर्ट के मुताबिक FY25 में आईटी कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन घटकर करीब 20.1 फीसदी रह गया था। आसान भाषा में समझें तो हर 100 रुपये की आमदनी पर कंपनियों के पास ऑपनेशनल लेवल पर करीब 20.10 रुपये बच रहे थे।
शुरुआत में AI और नई तकनीक पर खर्च बढ़ता है, लेकिन बाद में इसी तकनीक से कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बेहतर हो सकती है। इससे पहले के मुकाबले कम कर्मचारियों के साथ कम समय में काम पूरा किया जा सकेगा।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स का मानना है कि जैसे-जैसे कंपनियों का डिजिटल इनवेस्टमेंट पूरी तरह काम करना शुरू करेगा, उनकी लागत घट सकती है। इससे FY27 में EBITDA मार्जिन सुधरकर 21.8 फीसदी तक पहुंच सकता है।
भारतीय IT कंपनियों के बड़े कस्टमर अमेरिका और यूरोप में हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता की फॉरेन कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च करने में सतर्कता बरत रही हैं। ऐसे में नई बड़ी डील मिलने में समय लग रहा है। इसके अलावा कुछ कस्टमर्स पुरानी डील की कॉस्ट भी घटाने पर जोर दे रहे।
रिपोर्ट के मुताबिक जून तिमाही में मिड साइज IT कंपनियों की ग्रोथ बड़ी कंपनियों के मुकाबले कुछ बेहतर रही। नए डील्स और AI से होने वाली आमदनी बढ़ने से सेक्टर का मीडियम टर्म का परफॉर्मेंस स्थिर रहने की उम्मीद है।
कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा एनलिसिस, क्लाउड सर्विसेज, साइबर सिक्योरिटी और ऑटोमेशन जैसे सेक्टर पर फोकस कर रही, जिनसे नॉर्मल आईटी काम के मुकाबले बेहतर मार्जिन मिलने की संभावना रहती है।
बता दें कि FY26 में भारत का सर्विस एक्सपोर्ट 418 अरब डॉलर रहा। रिपोर्ट का मानना है कि AI को तेजी से अपनाने और डिजिटल सर्विसेज की डिमांड से आगे भी IT एक्सपोर्ट को सहारा मिल सकता है।
भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े स्किल के डेवलपमेंट में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। भारत एआई मिशन के तहत देश में 38,000 से ज्यादा GPU लगाए जा रहे हैं। इससे कंपनियों को AI मॉडल तैयार करने और नई सर्विस डेवलप करने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता मिल सकती है।
देश में 1,700 से ज्यादा ग्लोबल कैपाबिलिटी सेंटर (GCCs)भी काम कर रहे हैं। ये सेंटर विदेशी कंपनियों के लिए टेक्नोलॉजी, रिसर्च, फाइनेंस और दूसरे जरूरी काम संभालते हैं। घरेलू डेटा सेंटर्स की कैपासिटी सालाना 20 फीसदी से ज्यादा की रफ्तार से बढ़ रही है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में IT सर्विसेज की अलग-अलग कैटेगरी के लिए 15.5 फीसदी का सेफ हारबर मार्जिन भी तय किया गया है, जिससे नियमों का पालन करने वाली कंपनियों को इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन से जुड़े कर विवाद और जांच कम करने में मदद मिल सकती है।
भारतीय IT सेक्टर की अमेरिका और यूरोप पर निर्भरता अब भी काफी ज्यादा है। FY25 में वैश्विक IT खर्च में अमेरिका की हिस्सेदारी 52.9 फीसदी और यूरोप की हिस्सेदारी 32.8 फीसदी थी। इन बाजारों में आर्थिक सुस्ती, कंपनियों के तकनीकी खर्च में कटौती या नीतिगत बदलाव से भारतीय IT कंपनियों की इनकम पर असर पड़ सकता है।