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Gold Hallmarking: सोने की हॉलमार्किंग का दायरा बढ़ा, अब देश के 392 जिलों में अनिवार्य हुआ नया नियम

देश में अनिवार्य गोल्ड हॉलमार्किंग का दायरा 12 नए जिलों तक बढ़ा दिया गया है। अब 392 जिलों में शुद्ध और सर्टिफाइड सोना ही मिलेगा

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सुशील मिश्र   
Last Updated- August 10, 2026 | 7:40 PM IST

भारत ने सोने के गहनों और सोने की कलाकृतियों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे इसमें शामिल जिलों की कुल संख्या 380 से बढ़कर 392 हो गई है। इस नए विस्तार में नौ राज्यों के 12 जिले शामिल किए गए हैं, जिससे देश के गोल्ड हॉलमार्किंग सिस्टम का भौगोलिक दायरा और बढ़ गया है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ‘सोने के गहनों और सोने की कलाकृतियों की हॉलमार्किंग (तीसरा संशोधन) आदेश, 2026’ में यह जानकारी दी गई है। यह आदेश भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की सलाह पर भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के तहत 3 अगस्त को जारी किया गया था। आदेश में कहा गया है कि यह सरकारी राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से लागू होगा।

अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे में 12 नए जिले शामिल

नए जोड़े गए 12 जिले असम, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के हैं। इस कदम से भारत के हॉलमार्किंग सिस्टम की पहुंच और बढ़ेगी और संशोधित जिलेवार फ्रेमवर्क के तहत और भी ज्वेलरी बाजार शामिल होंगे।

मध्य प्रदेश के तीन जिले—भिंड, खंडवा और विदिशा—शामिल किए गए हैं। महाराष्ट्र ने अनिवार्य हॉलमार्किंग कवरेज में भंडारा को जोड़ा है।

राजस्थान कोटपूतली-बहरोड़ को अनिवार्य हॉलमार्किंग वाले जिलों की सूची में शामिल किया गया है। तमिलनाडु ने अनिवार्य हॉलमार्किंग फ्रेमवर्क में कांचीपुरम को जोड़ा है। पश्चिम बंगाल ने अपनी अनिवार्य हॉलमार्किंग सूची में झारग्राम को शामिल किया है।

असम के कोकराझार और लखीमपुर को भी सूची में शामिल किया गया है। हरियाणा के पानीपत और उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर का नाम जोड़ा गया है। ओडिशा के अंगुल को भी अनिवार्य हॉलमार्किंग वाली सूची में शामिल किया गया है।

अनिवार्य हॉलमार्किंग का दायरा अब 392 जिलों तक फैला

संशोधित एनेक्शर में 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 392 जिलों की सूची दी गई है। अधिसूचना में राज्यवार जिलों की संख्या को मिलाकर यह बढ़ा हुआ राष्ट्रीय दायरा बना है।

संशोधित सूची में आंध्र प्रदेश के 18, असम के 12, बिहार के 25, चंडीगढ़ का 1, छत्तीसगढ़ के 5, दिल्ली के 8, गोवा के 2 और गुजरात के 25 जिले शामिल हैं।

हरियाणा में 21 जिले हैं, जबकि कर्नाटक में 20 और केरल में 14 जिले हैं। इस सूची में मध्य प्रदेश के 19, महाराष्ट्र के 30, ओडिशा के 12, पंजाब के 20, राजस्थान के 26, तमिलनाडु के 32, तेलंगाना के 13, उत्तर प्रदेश के 39, उत्तराखंड के 7 और पश्चिम बंगाल के 22 जिले भी शामिल हैं।

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हॉलमार्किंग के दायरे को बढ़ाने का क्या मतलब है?

इस विस्तार से भारत की अनिवार्य गोल्ड हॉलमार्किंग प्रणाली की भौगोलिक पहुंच बढ़ गई है। इस ढांचे के तहत और जिलों के शामिल होने से नए क्षेत्रों के ग्राहकों को हॉलमार्क-सर्टिफाइड सोने के गहनों और कलाकृतियों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

नए जोड़े गए जिलों में काम करने वाले ज्वैलर्स के लिए इस विस्तार के बाद BIS के ढांचे के तहत लागू हॉलमार्किंग नियमों का पालन करना और भी जरूरी हो गया है।

पुराने हॉलमार्किंग ढांचे को किया गया अपडेट

अधिसूचना में बताया गया है कि मुख्य आदेश मूल रूप से 15 जनवरी, 2020 को भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया गया था और इसमें आखिरी बार 28 अप्रैल, 2026 को एसओ के जरिए संशोधन किया गया था। अगस्त 2026 का आदेश भारत के गोल्ड हॉलमार्किंग फ्रेमवर्क के तहत जिलेवार कवरेज में एक और अपडेट है।

हॉलमार्किंग क्यों है जरूरी?

सोने की हॉलमार्किंग एक सरकारी प्रमाण-पद्धति है। इसके जरिए सोने के गहनों की शुद्धता और असलियत की पुष्टि की जाती है। भारत में यह काम भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा किया जाता है, जिससे ग्राहकों को मिलावटी सोने से सुरक्षा मिलती है।

सही हॉलमार्किंग खरीदारों को सोच-समझकर फैसले लेने में मदद करती है और बुलियन तथा आभूषण क्षेत्र में होने वाली धोखाधड़ी से बचाने में मदद करती है।

First Published : August 10, 2026 | 7:33 PM IST