Electric Bus Charging Infrastructure: भारत की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) को चलाने में सबसे बड़ी बाधा इनकी उपलब्धता या डिलिवरी नहीं, बल्कि इनके लिए डिपो की तैयारी न होना है। यह बात एका मोबिलिटी के संस्थापक और चेयरमैन सुधीर मेहता ने कही। उन्होंने बस निविदा प्रक्रिया से डिपो और चार्जिंग ढांचे के विकास को अलग करने की वकालत की है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ साक्षात्कार में मेहता ने कहा कि ई-बसों से पहले चार्जिंग ढांचे के विकास पर ध्यान देना होगा और इसके लिए निविदा देनी चाहिए, क्योंकि इसे बनाने में ई-बसों के निर्माण से अधिक समय लगता है। एक डिपो के लिए बिजली कनेक्शन, चार्जिंग उपकरण और नागरिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, ‘डिपो का पूरा तंत्र तैयार करने के लिए अलग आवश्यकताएं होती हैं।’
हाल ही में इलेक्ट्रिक-बस निविदा में एका मोबिलिटी देश की दूसरी सबसे बड़ी बोलीदाता रही। दिसंबर 2025 में उसने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत केंद्र सरकार की 10,900-बसों की निविदा में 3,485 बसों के ऑर्डर हासिल करने में सफलता पाई। उन्होंने कहा कि ई-बस खरीद अपने आप में तेज हो गई है, क्योंकि उद्योग परिपक्व हो गया है। बस प्रारूप और मॉडल अधिक मानक हो गए हैं।
अब खरीद और वित्त जुटाने की प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझा जा रहा है। इसका मतलब है कि अगर बुनियादी ढांचा ठीक कर लिया जाए तो सरकारें बस अनुबंध प्रदान करने और वाहनों को सेवा में लाने के बीच का समय काफी कम कर सकती हैं। मेहता ने सुझाव दिया कि सरकारों को पहले कई वर्षों के लिहाज से आवश्यक डिपो और चार्जिंग ढांचे का खाका तैयार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘अच्छी बात तो यह है कि हम अगले पांच वर्षों के लिए चार्जिंग ढांचे की आवश्यकता का अनुमान लगाएं। पहले इसके लिए निविदा निकालें। इस पूरी प्रक्रिया में 12 से 24 महीने लग सकते हैं। एक बार पूरा ढांचा विकसित खड़ा हो जाए, तो बसें अगले कुछ ही महीनों में उतारी जा सकती हैं।’ उन्होंने कहा कि डिपो तैयार करने में देरी के कारण एका की उत्पादन योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
मेहता ने कहा कि कंपनी के प्लांट में बसें तैयार थीं, लेकिन डिपो तैयार न होने के कारण उन्हें भेजा नहीं जा सका। एका अब अपनी उत्पादन योजना डिपो तैयार होने की संभावनाओं के आधार पर बना रहा है।