हालांकि, इस मामले में विदेशी कंपनी के साथ भारत स्थित कंपनी के साथ ग्राहक का रिश्ता होना चाहिये। विदेशों में साफ्टवेयर विकास को निर्यात गतिविधि माना गया है।
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड :सीबीडीटी: की चेयरपर्सन डा. पूनम किशोर सक्सेना ने आज यहां साफ्टवेयर उद्योग की कर संबंधी विभिन्न शंकाओं को दूर किया। उन्होंने कंप्यूटर साफ्टवेयर उद्योग के प्रत्यक्ष कर लाभ से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर रंगाचारी समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिये गये फैसलों के बाद स्पष्टीकरण जारी किये।
साफ्टवेयर कंपनियों को आयकर अधिनियम की धारा 10ए, 10एए और 10बी के तहत कंप्यूटर साफ्टवेयर के निर्यात पर प्रत्यक्ष करों में छूट का प्रावधान है। देश में साफ्टवेयर इकाईयां एसईजैड और कई तरह की रियायती योजनाओं के तहत काम कर रही है। इसमें कर देनदारी को लेकर आईटी उद्योग के कई तरह के विवाद सामने आये। इनके निराकरण के लिये सीबीडीटी और आइआरडीए के पूर्व अध्यक्ष एन. रंगाचारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई। समिति की रिपोर्ट 14 सितंबर को सरकार को सौंप दी गई, उसी के आधार पर ये स्पष्टीकरण जारी किये गये।
साफ्टवेयर विकास के हर ठेके में अलग मास्टर सेवा समझौते का मुद्दा हो या फिर अनुसंधान एवं विकास कार्यों में कर लाभ अथवा किसी साफ्टपवेयर यूनिट को अचानक बेच दिये जाने और पहले से काम कर रही मौजूदा इकाई के साथ दूसरी इकाई लगाने जैसे मामलों में कर लाभ मिलने की शर्तें स्पष्ट कर दी गई हैं।
भाषा
नननन