कोल इंडिया लि. :सीआईएल: के चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक एस नरसिंग राव ने प्रेट्र से कहा, कुछ कंपनियां यह कहते फिर रही हैं कि कोयले की कमी के कारण
परियोजनाएं फंसी हुई है। उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि उन्हें जो कोयला खान मिला था, उसका विकास वे निर्धारित समय पर क्यों नही कर सकीं। उनसे जिम्मेदारी पूरा करने में विफल रहने को लेकर पूछा जाना चाहिए।
कोयला उत्पादन लक्ष्य से कम रहने को लेकर कोल इंडिया की सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की कंपनियां आलोचना कर रही हैं।
यह अलग बात है कि देश में उत्पादित करीब 54 करोड़ टन कोयला उत्पादन में कोल इंडिया की हिस्सेदारी 84 प्रतिशत है।
इसके अलावा कोयला कंपनी पर खराब गुणवत्ता वाला ईंधन आपूर्ति करने का भी आरोप लगाया गया है।
एनटीपीसी के चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक अरूप राय चौधी ने पिछले सप्ताह कहा था कि कोल इंडिया से प्राप्त कोयले की गुणवत्ता खराब है और इस बारे में बिजली मंत्रालय को सूचना दे दी गयी है।
राव ने कहा कि कोल इंडिया के पास 60 अरब टन का भंडार है। जिसमें से कंपनी ने 2011-12 में 43.5 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया। वहीं दूसरी तरफ विभिन्न कंपनियों को निजी उपयोग के लिये 1997 से 48 अरब टन क्षमता की कोयला खानें आवंटित की गयीं जिसमें से पिछले वित्त वर्ष में केवल 3.6 करोड़ टन का उत्पादन हो सका।
उन्होंने कहा कि कोई भी इस बारे में बात नहीं कर रहा है।
भाषा