वाईनेट न्यूज की खबर के अनुसार, ऑब्जर्वर से गैर सदस्यीय देश का दर्जा पाने के लिए पीए इस महीने की 15 या 29 तारीख को मतदान कराने को इच्छुक है ।
यह दोनों ही तारीख फलस्तीन के राष्ट्रीय आंदोलन के लिहाज के बहुत महत्वपूर्ण हैं । 15 नवंबर 1988 को फलस्तीनी नेता यासर अराफात ने अल्जीरिया से फलस्तीन की स्वतंत्रता की घोषणा की थी और 29 नवंबर 1947 को संयुक्त राष्ट्र ने फलस्तीन के बंटवारे की योजना पर मतदान कर उसे स्वीकार किया था ।
प्रति वर्ष 29 नवंबर को फलस्तीन के लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शन दिवस के रूप में मनाया जाता है । इसकी शुरूआत संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1977 में की ।
फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस मुद्दे पर न्यूयॉर्क में सितबंर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में ही मतदान कराने की मांग की थी लेकिन अमेरिका के अनुरोध पर इसे टाल दिया गया । अमेरिका ने कहा था कि इसके लिए फलस्तीन को अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव समाप्त होने तक इंतजार करना होगा ।
इस मतदान में फलस्तीन के पक्ष में फैसला होने पर उसे इस्राइल के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है । ऐसा होने पर फलस्तीन को इस्राइल द्वारा पीए के लिए वसूली गई कर की राशि भी नहीं मिलेगी और उसे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा । यह कर की राशि फलस्तीन की बजट का लगभग एक तिहाई हिस्सा है ।
फलस्तीनी प्राधिकरण को बजट संबंधी सहायता की पेशकश करने वाला और देने वाला पहला देश भारत है ।