प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए टाटा मोटर्स ने भारत में 7 से 55 टन तक की क्षमता वाले पूरी तरह बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक ट्रकों की पहली श्रृंखला की शुरुआत की है। एक बार चार्ज करने पर ये ट्रक 350 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकेंगे। इन इलेक्ट्रिक ट्रकों को पुणे में भारतीय इंजीनियरों द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए अनुकूल नीतिगत माहौल तैयार करने की पहल की है। राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन नीति वाहन निर्माताओं, उद्योग और परिवहन क्षेत्र के लिए नए अवसर खोल रही है। उन्होंने कहा कि नए इलेक्ट्रिक ट्रक भारत की हरित और टिकाऊ परिवहन क्रांति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं।
महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है, जिसने बैटरी और इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए एक अलग नीति तैयार की है। महाराष्ट्र एक बार फिर देश को हरित परिवहन की दिशा दिखा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए परिवहन क्षेत्र का विद्युतीकरण बेहद महत्वपूर्ण है। इलेक्ट्रिक ट्रक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इलेक्ट्रिक ट्रक न केवल प्रदूषण कम करेंगे, बल्कि ट्रांसपोर्टरों के लिए ईंधन लागत और कुल परिचालन लागत को कम करने में भी मदद करेंगे। इससे परिवहन व्यवसाय अधिक लागत प्रभावी, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनेगा।
इन इलेक्ट्रिक ट्रकों की खासियतों में एक बार चार्ज करने पर 350 किलोमीटर तक की रेंज, फास्ट चार्जिंग की सुविधा और कम परिचालन लागत शामिल हैं। कम समय में चार्जिंग पूरी होने से ट्रक सड़क पर ज्यादा समय तक चल सकेंगे और ट्रांसपोर्टरों की उत्पादकता बढ़ सकती है।
ये ट्रक न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि ट्रांसपोर्टरों और ड्राइवरों के लिए ज्यादा फायदेमंद, भरोसेमंद और किफायती विकल्प भी साबित हो सकते हैं। भविष्य में कमर्शियल ट्रांसपोर्ट की दिशा अब साफ दिखाई दे रही है।
महाराष्ट्र की ईवी पॉलिसी के साथ-साथ केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के जरिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार, वाहन निर्माताओं और ट्रांसपोर्टरों के बीच बेहतर साझेदारी से देश में इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से न सिर्फ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में, बल्कि बैटरी टेक्नोलॉजी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वाहन सर्विस क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर पैदा होंगे।
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पुणे में भारतीय इंजीनियरों द्वारा डिजाइन और विकसित किए गए ये इलेक्ट्रिक ट्रक मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणाओं का बेहतरीन उदाहरण हैं। इन वाहनों में भारतीय विशेषज्ञता, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षमता की ताकत स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
सरनाईक ने कहा कि हम सिर्फ एक इलेक्ट्रिक ट्रक लॉन्च नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक स्वच्छ, आत्मनिर्भर और टिकाऊ भारत के भविष्य का रास्ता तैयार कर रहे हैं। महाराष्ट्र न सिर्फ इस बदलाव का हिस्सा होगा, बल्कि इसका नेतृत्व भी करेगा।
ई-ट्रकों के सामने सबसे बड़ी बाधा उनकी शुरुआती लागत का ज्यादा होना है। डीजल ट्रकों के मुकाबले ई-ट्रकों की कीमत अधिक होने के कारण लोग इन्हें खरीदने से बचते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए भारी उद्योग मंत्रालय ई-ट्रकों को वित्तीय मदद देने की योजना पर काम कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ई-ट्रकों को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय 5 फीसदी तक की सब्सिडी देने पर विचार कर रहा है।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के सीईओ सहर्ष दमानी कहते हैं कि ई-ट्रकों की कीमतें डीजल ट्रकों की तुलना में भले ही अधिक हों, लेकिन एक बार खरीदारी करने के बाद इनके परिचालन का खर्च काफी कम हो जाता है।
डीजल का खर्च खत्म होने के साथ ही ट्रकों के रखरखाव (मेंटेनेंस) का खर्च भी काफी कम हो जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, ट्रक मालिकों का परिचालन खर्च करीब 80 फीसदी तक कम हो जाता है। ट्रकों का भाड़ा कम होने का फायदा ग्राहकों को भी मिलता है।