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भारतीय मीडिया उद्योग में तीन गुना बढ़ने की क्षमता, नियमों के शिकंजे से मिले आजादी: सुभाष चंद्रा

सुभाष चंद्रा ने कहा कि भारतीय मीडिया उद्योग में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन सरकारी नियमों, बिखराव और रणनीतिक सोच की कमी के कारण यह अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर पाया

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वनिता कोहली-खांडेकर   
Last Updated- August 08, 2026 | 9:34 AM IST

एस्सेल समूह के चेयरमैन और ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के संस्थापक और मानद चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने 40 साल की उम्र में 1991 में पहली बार सीएनएन देखा। उस समय भारत में मीडिया की पहुंच बहुत कम थी। उन्होंने रिचर्ड ली से ट्रांसपोंडर के लिए संपर्क किया, जिन्होंने एशिया में एकमात्र सैटेलाइट प्रसारण करने वाले एशियासैट 1 पर स्टार टीवी लॉन्च किया था। इसमें उन्हें एक साल से ज्यादा का समय लग गया और अक्टूबर 1992 में भारत का पहला निजी सैटेलाइट चैनल ज़ी टीवी (अब ज़ी) शुरू हुआ। अब 75 साल के हो चुके चंद्रा से वनिता कोहली-खांडेकर ने फोन पर बात की। मुख्य अंश:

उदारीकरण ने मीडिया और मनोरंजन व्यवसाय पर क्या असर डाला है? आप इन 35 वर्षों को किस नजरिये से देखते हैं?

इस दौरान मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र 2.7 लाख करोड़ रुपये के बड़े क्षेत्र के तौर पर उभरा है, जो देश भर में 1.2 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। 1992 में इस क्षेत्र में केवल 20,000 लोग कार्यरत थे। 900 से ज्यादा निजी सैटेलाइट चैनल, 70 ओटीटी प्लेटफॉर्म, 5 करोड़ से अधिक कंटेंट क्रिएटर और 1,000 रेडियो स्टेशनों के साथ मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र की भूमिका अब केवल जानकारी देने और मनोरंजन करने से कहीं आगे बढ़ गई है।

दूसरा, इसने भारत और यहां के लोगों, हमारी संस्कृति, फैशन, डिजाइन, खान-पान आदि के बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत जागरूकता पैदा की है।

इसने लोगों में बहुत अधिक महत्त्वाकांक्षाएं भी पैदा की हैं, चाहे यह अच्छी है या बुरी यह व्यक्तिपरक मुद्दा है। दूसरी ओर, लोगों का एक वर्ग सोचता है कि मीडिया ने अति-महत्त्वाकांक्षी वर्ग का निर्माण किया है।

इन 35 वर्षों की मुख्य उपलब्धियां क्या रही हैं?

उदारीकरण के तीन दशक को तीन बदलावों से सबसे अच्छी तरह समझा जा सकता है जो मीडिया एवं मनोरंजन व्यवसाय के सफर को दर्शाते हैं। पहला यह क्षेत्र केवल मनोरंजन देने वाले से बदलकर एक ऐसा अहम जरिया बन गया है, जिसमें आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रभाव कायम करने की बड़ी क्षमता है।

अब इसकी पहचान अलग-अलग प्लेटफॉर्म से नहीं बल्कि दुनिया भर में एक ही समय पर ब्रांड और प्लेटफॉर्म से जुड़ने वाले अरबों ग्राहकों से होती है। यह क्षेत्र पयर्टन, आतिथ्य, फैशन और वेलनेस जैसे जुड़े हुए उद्योगों को भी बढ़ावा देता है।

आज भारत दुनिया के सबसे बड़े कंटेंट क्रिएटर में से एक है, जिसमें वै​श्विक स्तर पर इस्तेमाल के लिए खास बौद्धिक संपदा बनाने की क्षमता है। तीसरी बात, भले ही वै​श्विक बाजार में भारतीय मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र की हिस्सेदारी कम हो लेकिन भारत से बाहर रहने वाले 6.8 अरब लोगों पर इसका सांस्कृतिक प्रभाव काफी है। भारत को विदेशी मु्द्रा में से इस क्षेत्र से 10,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष राजस्व मिलता है। अप्रत्यक्ष राजस्व कई गुना ज्यादा हो सकता है।

भारत फिल्मों का सबसे बड़ा निर्माता, टीवी का दूसरा सबसे बड़ा बाजार और विशाल उपभोक्ता बाजार है। 31 अरब डॉलर के साथ, हमारा मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र कभी भी वैश्विक पैमाने पर नहीं पहुंच पाया है। यह सकल घरेलू उत्पाद का महज 0.8 फीसदी बना हुआ है। इसकी वजह?

मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र इससे कहीं अधिक हासिल कर सकता था। समस्या यह है कि सरकारों ने इसे कभी रणनीतिक उद्योग के रूप में देखा ही नहीं। इसे प्रधानमंत्रियों और उनकी सरकारों के बारे में जानकारी प्रसारित करने के साधन के रूप में देखा गया है और इससे परे कुछ नहीं।

दूसरा, वे हमेशा विभिन्न नियमों और विनियमों के माध्यम से इस उद्योग पर कड़ी नज़र रखते हैं। इस व्यवसाय ने जितना किया है उससे तीन गुना अधिक हासिल कर सकता था। इस उद्योग का अर्थव्यवस्था में न्यूनतम योगदान जीडीपी के कम से कम 5 फीसदी होना चाहिए।

साल 2000 में यह उम्मीद थी कि मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वैसा ही साबित होगा जैसा कि आईटी क्षेत्र रहा था। आज इसकी क्या स्थिति है?

रोजगार सृजन के मामले में, इसने वह किया है। लेकिन इसका वह प्रभाव नहीं पड़ा है जो पड़ना चाहिए था क्योंकि यह अभी भी बंटा हुआ है। इस व्यवसाय के चार भाग हैं। कंटेंट क्रिएटर, प्रसारक, मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर और केबल ऑपरेटर। ये सभी अलग-अलग काम करते हैं। मेरी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद हम उन्हें एक उद्योग के रूप में एक साथ एक मंच पर लाने में सफल नहीं हुए हैं।

डीडी फ्रीडिश और यूट्यूब वीडियो व्यवसाय का तेजी से बढ़ता हुआ हिस्सा हैं। टीवी गिरावट में दिख रही है। क्या यह समाप्त होता उद्योग है?

यह वह कहानी है जो वैश्विक तकनीकी कंपनियों ने फैलाई है। जैसा कि मैंने उल्लेख किया, हमारा उद्योग विभाजित है। हम एक-दूसरे से लड़ते हैं। इसके परिणामस्वरूप, हमारी कोई आवाज नहीं है।

लेकिन क्या नियामक की कोई भूमिका नहीं है? नियामक मूल्य निर्धारण से लेकर रेटिंग तक सब कुछ तय करता है लेकिन क्या व्यापक स्तर पर कोई दृष्टिकोण नहीं रखता है?

दुर्भाग्य से, भारत एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था है जहां नियामक की सीमित भूमिका है। इसे अधिक एक अनुशंसित निकाय माना जाता है। उन्होंने कुछ चीजों की सिफारिश की है जो पिछले कुछ वर्षों से सरकार के पास है। सरकार न तो उन्हें स्वीकार कर रही है और न ही अस्वीकार कर रही है।

अगर आप पिछले 35 वर्षों में कुछ बदल सकते, तो वह क्या होता?

मैं इस उद्योग को कंटेट को छोड़कर सभी चीज के मामले में नियमन से आज़ाद कर देता। आज यह आज़ाद नहीं है।

किस तरह की आज़ादी?

राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं की सोच को बिगाड़ने वाले कंटेंट को छोड़कर बाकी सब कुछ। यहां तो उल्टा हो रहा है। युवाओं की सोच को बिगाड़ने वाला कंटेंट यूट्यूब आर फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हैं।

आईपीएल में टीमों का मूल्यांकन और उसके मीडिया अधिकारों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ज़ी के क्रिकेट और अन्य खेलों में उतरने के विभिन्न प्रयासों को देखते हुए खेल मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर कोई टिप्पणी?

मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि ज़ी खेल निकायों को अच्छा बौद्धिक संपदा अधिकार बनाने में मदद कर रहा है, जिसमें हम भी हिस्सेदारी करेंगे।

स्ट्रीमिंग से व्यवसाय में क्या बदलाव आया?

यह एक स्वाभाविक बदलाव है। पहले कंटेंट को सैटेलाइट के जरिये, एनालॉग और पारंपरिक तरीके से देखा जाता था, लेकिन अब आप इसे इंटरनेट के माध्यम से देख रहे हैं। यह कंटेंट पहुंचाने का एक और तरीका है। मैं इसे बस इसी नजरिये से देखता हूं। कई लोग इसे एक वरदान की तरह देखते हैं। कंटेंट में बदलाव का यह सिलसिला जारी रहेगा। शॉर्ट्स के बाद इमर्सिव कंटेंट का दौर आएगा।

आपके हिसाब से भारत में मीडिया एवं मनोरंजन व्यवसाय किस दिशा में जा रहा है?

यह बढ़ता रहेगा। और टीवी भी। मुझे उम्मीद है और मैं चाहता हूं कि उद्योग एकजुट हो और कुछ बड़ी कंपनियों द्वारा फैलाई जा रही झूठी बातों पर लोगों का पैसा बरबाद न होने दे।

First Published : August 8, 2026 | 9:34 AM IST