राजनीति

घुसपैठ से बदल रही आबादी? केंद्र ने बनाई हाई लेवल कमेटी, 2027 जनगणना से पहले बड़ा एक्शन

अवैध प्रवासन और जनसांख्यिकीय बदलाव के प्रभावों का आकलन करने तथा समाधान सुझाने के लिए केंद्र ने उच्च स्तरीय समिति गठित की है।

Published by
अर्चिस मोहन   
Last Updated- June 01, 2026 | 9:43 AM IST

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले पहले मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण की 12वीं वर्षगांठ पर 26 मई को आयोजित समारोह में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक खास अधिसूचना जारी की। इसमें कहा गया कि केंद्र सरकार ने ‘अवैध घुसपैठ और अन्य असामान्य कारणों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय बदलाव का पता लगाने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति’ का गठन किया है।

यह समिति निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और 2027 की जनगणना के मद्देनजर गठित की गई है, जिसकी प्रक्रिया अगले वर्ष फरवरी में पूरी हो जाएगी। अवैध आप्रवासियों या घुसपैठियों से उत्पन्न सुरक्षा और जनसांख्यिकीय खतरा अक्टूबर 2025 में बिहार विधान सभा चुनावों और हाल ही में संपन्न असम और पश्चिम बंगाल चुनावों में भाजपा के चुनाव अभियानों का मुख्य मुद्दा था। बिहार और पश्चिम बंगाल में एसआईआर और असम में विशेष संशोधन के तहत अवैध अप्रवासियों के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए। एक दर्जन राज्यों में एसआईआर के तहत अवैध अप्रवासियों सहित 5 करोड़ से अधिक नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। असम में सत्ता में वापसी के बाद भाजपा सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया है। इसमें बहु-विवाह के लिए सात साल की कैद सहित कई दंडात्मक उपायों का प्रस्ताव है।

असम गण परिषद (एजीपी) के विधायक पृथ्वीराज रावा ने कहा कि यूसीसी अधिनियम राज्य में बदलती जनसांख्यिकीय संरचना से जुड़ी समस्या दूर करने में सहायक होगा। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान बंगाल में यूसीसी लागू करने का वादा किया था। राज्य सरकार ने कहा है कि वह पश्चिम बंगाल में संदिग्ध घुसपैठियों के लिए जिला स्तरीय हिरासत केंद्र स्थापित करेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि बंगाल घुसपैठियों के खिलाफ ‘पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो’ नीति को सख्ती से लागू करेगा।

पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पाल ने महिलाओं के लिए घोषित नई अन्नपूर्णा योजना के 12 पृष्ठों के विस्तृत आवेदन पत्र का बचाव करते हुए कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ केवल भारतीय नागरिकों को मिले न कि उन रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों को जो बांग्लादेश सीमा के पास लंबी कतारों में खड़े हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने कहा कि कम से कम 30 लाख महिलाएं इस नकद हस्तांतरण योजना के लिए अपात्र पाई गई हैं।

भाजपा शासित अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार ने अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्रों के पुनर्सत्यापन, आंतरिक रेखा परमिट (आईएलपी) तंत्र मजबूत करने और घुसपैठ रोकने के लिए चार उच्च-स्तरीय समितियों का गठन करने का निर्णय लिया है। खांडू ने कहा कि राज्य सरकार आईएलपी प्रणाली सख्ती से लागू करने और स्वदेशी आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए एक अलग विभाग बनाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अरुणाचल प्रदेश में सभी अवैध मस्जिदों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

इस बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम (जो आदिवासियों के बीच काम करता है) अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को 2027 की जनगणना में अपना धर्म ‘हिंदू’ बताने के लिए प्रेरित करने की तैयारी कर रहा है। जनगणना फरवरी 2027 में होगी।

आश्रम के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने आदिवासी क्षेत्रों विशेष रूप से झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि बड़े पैमाने पर ऐसा करने से अंततः देश कमजोर होगा। सिंह ने कहा कि जनगणना अभिलेखों में आदिवासियों द्वारा स्वयं को ‘अन्य धर्म’ श्रेणी में दर्ज कराना धर्मांतरण की दिशा में ‘पहला कदम’ है। पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और संघ परिवार ने देश के सामने मौजूद जनसांख्यिकीय चुनौतियों पर अपने दृष्टिकोण बदले हैं। संघ परिवार ने पहले जनसंख्या विस्फोट का मुद्दा उठाया था क्योंकि उनका आरोप था कि एक विशेष समुदाय में उच्च प्रजनन दर है।

पिछले कुछ वर्षों से संघ परिवार और केंद्र सरकार दोनों ही सीमावर्ती जिलों में घुसपैठ और अवैध अप्रवासन से होने वाले संभावित बदलावों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसका अंतर्निहित संदेश यह है कि सीमावर्ती जिलों में आबादी में यह ‘अस्वाभाविक’ वृद्धि देश के एक और विभाजन का कारण बन सकती है।

भाजपा वर्तमान में बांग्लादेश से सटे पांच राज्यों में से तीन यानी पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम में सत्ता में है। राजग सहयोगी कॉनराड संगमा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जन पार्टी मेघालय में सत्ता में है। पश्चिम में पंजाब को छोड़कर भाजपा गुजरात और राजस्थान में सत्ता में है जबकि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश हैं।

भाजपा के नेतृत्व वाले राजग की असम और पश्चिम बंगाल के चुनावों में जीत के कुछ ही हफ्तों बाद गृह मंत्रालय की जनसांख्यिकीय बदलाव संबंधी उच्च स्तरीय समिति (एचएलसीडीसी) की घोषणा की गई। इस समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नौलेकर करेंगे। यह समिति एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। नई दिल्ली स्थित इस समिति में जनगणना आयुक्त, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि भी सदस्य होंगे। समिति एक वर्ष में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

गृह मंत्रालय ने कहा कि अवैध अप्रवासन के कारण जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से व्यापक चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं। अधिसूचना में कहा गया है कि अवैध अप्रवासन के कारण जनसांख्यिकीय परिवर्तन केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि इनका प्रभाव शहरी केंद्रों, औद्योगिक गलियारों, आदिवासी क्षेत्रों और अन्य सामाजिक और आर्थिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों तक फैल गया है। समिति देश में पहले से रह रहे अवैध अप्रवासियों की कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए एक स्थायी परिचालन प्रणाली की सिफारिश करेगी। यह समिति सीमा प्रबंधन, जनसंख्या स्थिरीकरण और इस तरह के रुझानों की निरंतर निगरानी के लिए पहचान प्रणालियों को मजबूत करने हेतु एक संस्थागत तंत्र की सिफारिश करेगी, साथ ही ऐसे मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा भी प्रस्तावित करेगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह वर्तमान में राजस्थान और गुजरात के सीमावर्ती जिलों के दौरे पर हैं और जून में त्रिपुरा और बंगाल के सीमावर्ती जिलों का दौरा करने वाले हैं। उन्होंने कहा है कि केंद्र की उच्च-स्तरीय समिति इस बात का भी आकलन करेगी कि क्या राज्यों को अवैध प्रवासियों की समस्या से निपटने के लिए कानून की आवश्यकता है। उन्होंने बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ भारत की सीमाओं की सुरक्षा करने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के परिचालन दायरे को नए क्षेत्रों को आवंटित कर विस्तारित करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमाओं पर ‘स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी’ परियोजना का जिक्र किया है। इसके लिए लिए केंद्र ने पर्याप्त बजट आवंटित किया है।

शाह ने बाड़ लगाने के उद्देश्य से सभी आवश्यक भूमि आवंटित करने के लिए बंगाल मंल भाजपा सरकार की सराहना की है। उन्होंने कहा है कि यदि अवैध प्रवासी अपनी मर्जी से चले जाते हैं तो पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार उनके खिलाफ कानूनी मामले दर्ज नहीं करेगी और पड़ोसी देश जाने में उनकी मदद करेगी। गृह मंत्री ने कहा है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर में 121 हेक्टेयर भूमि केंद्र को हस्तांतरित कर दी गई है। शाह ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे देश की सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में अवैध निर्माणों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति सख्ती से लागू करें और पिछले कुछ वर्षों में बने ऐसे सभी ढांचे हटा दें।

पिछले 12 वर्षों में राजग सरकार ने जनसांख्यिकीय चुनौती के मुद्दे पर अपने रुख में अहम बदलाव किए हैं। 15 अगस्त 2019 को अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री ने जनसंख्या विस्फोट को चिंता का विषय बताया। उन्होंने परिवार का आकार सीमित रखने वालों को देशभक्त कहा। छह साल बाद 15 अगस्त 2025 को अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ और अवैध प्रवासन के कारण जनसांख्यिकीय असंतुलन के खतरों पर चिंता व्यक्त की और एक उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन शुरू करने की घोषणा की। वर्ष 2022 में अपने सालाना विजयादशमी भाषण में आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने धर्म-आधारित जनसंख्या असंतुलन के खतरों को लेकर आगाह किया और 21वीं सदी में दक्षिण सूडान, पूर्वी तिमोर और कोसोवो जैसे नए देशों के निर्माण का उदाहरण दिया।

First Published : June 1, 2026 | 9:43 AM IST