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महंगाई पर नियंत्रण पहली प्राथमिकता, विकास उसके बाद: आरबीआई गवर्नर

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी।

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- July 17, 2026 | 3:12 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देते हुए महंगाई को नियंत्रित करने को अपनी प्राथमिकता बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि कम और स्थिर महंगाई टिकाऊ आर्थिक विकास की नींव होती है, क्योंकि इससे कारोबार और परिवारों को लंबे समय के निवेश संबंधी फैसले लेने में मदद मिलती है।

दूरदर्शन को दिए एक साक्षात्कार में मल्होत्रा ने कहा कि  फ्लेक्जीबल मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण ढांचे (Flexible Inflation Targeting Framework) के तहत महंगाई नियंत्रण आरबीआई का मुख्य दायित्व है, जबकि आर्थिक विकास उसका दूसरा मकसद है। उन्होंने कहा, “दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे का समर्थन करते हैं।” उन्होंने बताया कि स्थिर कीमतों से आर्थिक योजना बनाने और निवेश संबंधी फैसले लेने में आसानी होती है।

अर्थव्यवस्था के 6.6% बढ़ने की उम्मीद

गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद (मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स) मजबूत बनी हुई है। केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि मजबूत मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीतियों और औद्योगिक नीतियों के समर्थन से संभव होगी।

उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति और मॉनसून से जुड़ी मौसम संबंधी अनिश्चितताएं अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बनी हुई हैं। हालांकि, भारत बाहरी झटकों से निपटने की मजबूत स्थिति में है। मौद्रिक नीति पर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई केवल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई के आंकड़े पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि वह महंगाई की संरचना, कोर महंगाई और कीमतों में बदलाव के मूल कारणों का भी बारीकी से विश्लेषण करता है।

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जून में बैंक लोन 18 फीसदी बढ़े

गवर्नर ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में कर्ज वृद्धि व्यापक आधार पर बनी हुई है। जून में कुल बैंक ऋण में सालाना आधार पर करीब 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं मई के क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार कृषि क्षेत्र में कर्ज वृद्धि करीब 15 प्रतिशत, उद्योग में 17 प्रतिशत, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) में 24-25 प्रतिशत, बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 11-12 प्रतिशत और आवास क्षेत्र में करीब 11 प्रतिशत रही।

सोने के कर्ज में तेज वृद्धि पर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई को किसी खास क्षेत्र में तत्काल चिंता नजर नहीं आ रही है। उन्होंने कहा, “हम सभी क्षेत्रों, बैंकों और विनियमित संस्थाओं की लगातार निगरानी करते हैं। फिलहाल हमें किसी भी क्षेत्र में कोई खतरा नहीं दिख रहा है।”

वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले रुपया स्थिर

रुपये के बारे में गवर्नर ने कहा कि हाल में भू-राजनीतिक तनावों के कारण अमेरिकी डॉलर में मजबूती के बावजूद भारतीय मुद्रा अन्य वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अपेक्षाकृत स्थिर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के हालिया कदम, जिनमें सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर कर छूट, लंबी अवधि वाले सॉवरेन बॉन्ड के लिए फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) का विस्तार और सेवाओं के निर्यात व प्रेषण (Remittances) में मजबूती शामिल हैं, देश के बाहरी क्षेत्र को समर्थन देंगे।

एफटीए से निर्यात को दम

मल्होत्रा ने बताया कि पिछले साल भारत में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह करीब 95 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर रहा। वहीं चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में शुद्ध FDI प्रवाह करीब 7 अरब डॉलर रहा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन और अन्य देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) समय के साथ निर्यात को बढ़ावा देंगे और चालू खाते (Current Account) को मजबूत करेंगे। वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता पर मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय बैंक मजबूत स्थिति में हैं। बैंकों की पूंजी पर्याप्तता दर 17 प्रतिशत से अधिक है, जबकि लिक्विडिटी कवरेज रेशियो करीब 120 प्रतिशत है।

डिजिटल फ्रॉड पर आरबीआई गवर्नर ने जताई चिंता

डिजिटल धोखाधड़ी पर चिंता जताते हुए गवर्नर ने कहा कि आरबीआई ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है और अब सक्रिय व पहले से रोकथाम वाली कार्रवाई पर अधिक जोर दिया जा रहा है। उन्होंने सीमित देयता ढांचे (Limited Liability Framework) का भी उल्लेख किया, जिसे जनवरी 2027 से लागू किया जाना है। इसके तहत कुछ छोटे डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी मामलों में ग्राहकों को 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकेगा।

एआई से बेहतर होगी बैंकिंग सेवा

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई बैंकों को ग्राहक सेवा बेहतर करने, परिचालन लागत घटाने और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए एआई अपनाने को प्रोत्साहित कर रहा है। हालांकि, इसके साथ साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से जुड़े जोखिमों से बचाव के उपाय जरूरी हैं।

खुदरा निवेशकों के लिए गवर्नर ने कहा कि म्यूचुअल फंड और अन्य बाजार आधारित उत्पादों में बढ़ती भागीदारी स्वस्थ विविधीकरण को दर्शाती है। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे अपनी वित्तीय जरूरतों, निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर परिसंपत्ति आवंटन तय करें। वैश्विक अनिश्चितता को भारत की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती बताते हुए मल्होत्रा ने कहा कि देश की नीतिगत व्यवस्था और मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति उसे बाहरी जोखिमों से निपटने का भरोसा देती है।

First Published : July 17, 2026 | 3:11 PM IST