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RBI का नया फरमान: बैंक बोर्डों को अब रणनीति और जोखिम प्रबंधन पर देना होगा ज्यादा समय, नियम बदले

संशोधित दिशानिर्देशों के तहत बोर्डों को स्पष्ट बताना होगा कि उन्होंने कौन से मसले मंजूरी के लिए रखे हैं और उन्हें अपने अधिकारों की समय-समय पर समीक्षा भी करनी होगी

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अनुप्रेक्षा जैन   
Last Updated- July 14, 2026 | 10:43 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने आज बैंकों के निदेशक मंडलों (बोर्ड) की बैठकों के लिए मुद्दे तय करने के संबंध में संशोधित दिशानिर्देश जारी किए ताकि बोर्ड अपने समय का ज्यादा कारगर तरीके से इस्तेमाल कर पाएं। केंद्रीय बैंक चाहता है कि बैंक बोर्ड रणनीति तथा जोखिम प्रशासन पर ज्यादा बेहतर तरीके से विचार करें।

संशोधित दिशानिर्देशों के तहत बोर्डों को स्पष्ट बताना होगा कि उन्होंने कौन से मसले मंजूरी के लिए रखे हैं और उन्हें अपने अधिकारों की समय-समय पर समीक्षा भी करनी होगी। संशोधित व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। संशोधित नियमों के मुताबिक बोर्ड को जोखिम प्रबंधन, नीति तथा रणनीति, संबंधित इकाइयों को कर्ज या उनमें निवेश पर नजर रखनी होगी तथा यह भी तय करना होगा कि कॉरपोरेट प्रशासन का पूरा ध्यान रखा जाए।

रिजर्व बैंक के संशोधित दिशानिर्देशों में कहा गया है, ‘बैठक का एजेंडा तय करने की मूल जिम्मेदारी बोर्ड के चेयरपर्सन की होगी।’ बैंकिंग नियामक ने कहा कि बैंक की कारोबारी रणनीति, वित्तीय सेहत, प्रशासन के ढांचे, कर्मियों से जुड़े प्रमुख फैसलों, जोखिम प्रबंधन और अनुपालन की आखिरी जिम्मेदारी बोर्ड की ही होगी।

दिशानिर्देशों के अनुसार बोर्ड को सुनिश्चित करना होगा कि अपनी भूमिका कारगर तरीके से निभाने के लिए उसे प्रबंधन से पर्याप्त जानकारी मिलती रहे। बोर्ड को स्पष्ट करना होगा कि उसे प्रबंधन से किस तरह की जानकारी चाहिए और कितने अंतराल पर चाहिए। रिजर्व बैंक ने प्रस्ताव रखा है, ‘जरूरत पड़ने पर बोर्ड बाहर से रिपोर्ट मंगा सकता है।’

बोर्ड खास मामले बोर्ड समितियों या प्रबंधन समितियों को सौंप सकता है बशर्ते उन्हें साफ तौर पर बताया जाए कि क्या जानकारी देनी है। बोर्ड से यह भी स्पष्ट बताने के लिए कहा गया है कि कौन से मामलों में उनकी मंजूरी जरूरी है और यह भी कहा गया है कि उन्हें रणनीति एवं जोखिम प्रशासन के लिए पर्याप्त समय देना होगा।

आरबीआई के बयान में कहा गया है, ‘निदेशक मंडल समय-समय पर उन विषयों की समीक्षा करेगा जिन्हें उसके समक्ष रखा जाना है। साथ ही उन विषयों की भी समीक्षा करेगा जिन्हें बोर्ड समितियों या प्रबंधन समितियों को सौंपा गया है।’ इस समीक्षा में यह भी देखा जाएगा कि एजेंडा समय पर प्रसारित हुआ या नहीं, एजेंडे में दी गई जानकारी पर्याप्त है या नहीं तथा महत्त्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय आवंटित किया गया या नहीं।

बोर्ड को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह प्रबंधन से अपेक्षित जानकारी की प्रकृति और उसकी आवृत्ति तय करे तथा समय-समय पर यह समीक्षा करता रहे कि सौंपे गए विषय, एजेंडा की गुणवत्ता, एजेंडा प्रसारित करने की समय-सीमा और प्रमुख मुद्दों के लिए निर्धारित समय उपयुक्त है या नहीं।

सरकारी बैंकों पर लागू कॉरपोरेट गवर्नेंस  प्रावधानों को आवश्यक संशोधनों के साथ निजी क्षेत्र के बैंकों पर भी लागू किया गया है।

First Published : July 14, 2026 | 10:39 PM IST