प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
अधिकांश बैंक ग्राहकों के लिए नो योर कस्टमर (केवाईसी) के मायने यह है कि नए खाते खोलते वक्त या समय-समय पर खाते का विवरण अद्यतन करने के लिए कई तरह के दस्तावेज जमा कराने होंगे। अक्सर यह शिकायत सुनने को मिलती है कि बैंकों द्वारा बार-बार दस्तावेज मांगे जाते हैं या छोटी-छोटी त्रुटियों के कारण ग्राहकों को परेशानी उठानी पड़ती है।
कई मामलों में तो समय पर केवाईसी अद्यतन न होने के कारण ग्राहकों के खातों का संचालन भी प्रभावित हो जाता है। ऐसी परिस्थितियां निश्चित रूप से ग्राहकों के लिए निराशाजनक होती हैं। फिर भी, यह समझना आवश्यक है कि केवाईसी का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं है। यह व्यवस्था वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ ग्राहकों के हितों की रक्षा भी करती है।
केवाईसी का मूल उद्देश्य बैंक और ग्राहकों के बीच संबंध शुरू होने से पहले ग्राहक की सही पहचान सुनिश्चित करना है। समय-समय पर जानकारी अद्यतन करने से यह भरोसा बना रहता है कि बैंक के पास उपलब्ध विवरण सही हैं और सभी विवरण ताजातरीन हैं।
आज बैंकिंग पहले की तुलना में कहीं अधिक डिजिटल, तेज और परस्पर जुड़ी हुई है। अब खाते दूर बैठे खोले जा सकते हैं और कुछ ही मिनटों में धनराशि कई संस्थाओं के बीच स्थानांतरित हो सकती है। इसके साथ ही, ऑनलाइन धोखाधड़ी भी तेजी से बढ़ी है। कुछ दशक पहले मेरे जैसे शाखा प्रबंधक का जीवन सामान्य था क्योंकि हम अपने ग्राहकों को व्यक्तिगत रूप से जानते थे इसलिए दस्तावेजों की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम पड़ती थी। लेकिन बदलते समय के साथ मजबूत पहचान व्यवस्था के लिए यह अनिवार्य हो गई है।
केवाईसी धन शोधन और आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग जैसी गंभीर गतिविधियों की पहचान करने और उसे रोकने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है। अपराधी अक्सर नकली पहचान के आधार पर खाते खोलते हैं या किसी अन्य व्यक्ति के नाम से खाते संचालित करते हैं, जिन्हें ‘म्यूल खाता’ कहा जाता है। इन खातों के माध्यम से अवैध धन को वैध वित्तीय प्रणाली में पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। ऐसे में ग्राहकों की सही पहचान करना और उनकी सामान्य वित्तीय गतिविधियों को समझना आवश्यक है ताकि बैंकिंग व्यवस्था का दुरुपयोग रोका जा सके।
सही केवाईसी के माध्यम से बैंक यह समझ पाता है कि किसी ग्राहक के खाते में सामान्यतः किस प्रकार और कितने स्तर के लेनदेन होते हैं। इसके बाद आधुनिक तकनीक की मदद से यदि किसी असामान्य या संदिग्ध लेनदेन की पहचान होती है तब तंत्र तुरंत उसे पहचानकर जांच के लिए संकेत जारी कर देता है। यदि ग्राहक की जानकारी अधूरी या गलत हो तब सामान्य लेनदेन भी संदेहास्पद दिखाई दे सकते हैं जबकि वास्तविक संदिग्ध गतिविधियां पहचान से बच सकती हैं।
यदि किसी बैंक के पास ग्राहक का मौजूदा सही मोबाइल नंबर, पता और अन्य संपर्क विवरण उपलब्ध हों तब किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में बैंक तुरंत ग्राहक से संपर्क कर सकता है। लेकिन यदि केवाईसी की जानकारी पुरानी हो तो चेतावनी संदेश गलत मोबाइल नंबर पर जा सकता है या बैंक विवरण किसी पुराने पते पर भेजे जा सकते हैं। इससे ग्राहक की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसलिए केवाईसी की जानकारी को समय-समय पर सही और अद्यतन रखना केवल नियामकीय आवश्यकता नहीं बल्कि अपनी वित्तीय पहचान और सुरक्षा बरकरार रखने का भी महत्त्वपूर्ण उपाय है।
यदि केवाईसी केवल दस्तावेज जमा करने और औपचारिकताओं तक सीमित रह जाए तो उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। प्रभावी केवाईसी व्यवस्था के लिए बैंकों को ग्राहकों की आवश्यक जानकारी को समझना, उसे समय-समय पर अद्यतन रखना, जोखिम का सही आकलन करना और लेनदेन की निगरानी के लिए उसका उपयोग करना आवश्यक है।
केवाईसी से जुड़े अधिकांश नियम धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के अंतर्गत बनाए गए हैं। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहकों की सुविधा का भी ध्यान रखा है और परिस्थितियों के अनुसार सरल प्रक्रियाएं लागू की हैं। यदि ग्राहकों की केवाईसी संबंधी जानकारी में कोई बदलाव नहीं हुआ है या केवल मामूली बदलाव जैसे पते में बदलाव हुआ है तब कई मामलों में केवल स्व-घोषणा के जरिये केवाईसी अद्यतन किया जा सकता है और सभी दस्तावेज दोबारा जमा करने की आवश्यकता नहीं होती है।
इसके अलावा बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट और वीडियो-आधारित केवाईसी जैसी सुविधाओं के माध्यम से ग्राहक बिना बैंक शाखा गए भी अपनी दोबारा केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
केवाईसी का उद्देश्य ग्राहकों की परेशानी बढ़ाना नहीं बल्कि बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। सही और अद्यतन केवाईसी से न केवल वित्तीय अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलती है बल्कि ग्राहकों की धनराशि और पहचान की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है जिससे सहूलियत बढ़ जाती है।
नियमन केवाईसी की रूपरेखा तय कर सकते हैं और नई तकनीक ग्राहकों के लिए अधिक सुविधाजनक माध्यम उपलब्ध करा सकती है। लेकिन किसी भी ग्राहक का वास्तविक अनुभव इस बात पर निर्भर करता है कि केवाईसी प्रक्रिया को व्यवहार में कितनी अच्छी तरह लागू किया जाता है। हर कमी या त्रुटि का जोखिम समान नहीं होता।
उदाहरण के लिए, किसी नाम की वर्तनी में मामूली अंतर या किसी वरिष्ठ नागरिक को बायोमेट्रिक सत्यापन में आने वाली कठिनाई को उसी दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए, जिस प्रकार जानबूझकर अपनी पहचान छिपाने की कवायद या संदिग्ध गतिविधियों को देखा जाता है। ऐसे में प्रभावी केवाईसी के लिए केवल नियमों का पालन ही नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण निर्णय लेना भी आवश्यक है।
अधिकांश ग्राहकों के लिए बैंक कर्मचारी ही सबसे बड़े मददगार बन सकते हैं। उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कौन-सी जानकारी या दस्तावेज अधूरे हैं, उनकी आवश्यकता क्यों है और उन्हें सरल तरीके से कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है। साथ ही, जमा किए गए दस्तावेजों की रसीद दी जानी चाहिए, केवाईसी अद्यतन की प्रक्रिया पूरी होने की सूचना ग्राहक तक पहुंचनी चाहिए और यदि किसी समस्या का समाधान न हो सके तो उसके लिए प्रभावी शिकायत एवं अपील की व्यवस्था भी उपलब्ध होनी चाहिए।
केवल बैंक ही नहीं बल्कि ग्राहकों की भी कुछ महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। ग्राहकों को सही और पूर्ण जानकारी देनी चाहिए, अपना पता, मोबाइल नंबर तथा अन्य आवश्यक विवरण समय-समय पर अद्यतन रखने चाहिए और बैंक से आने वाले संदेशों का उचित समय पर उत्तर देना चाहिए। इसके साथ ही ग्राहकों को धोखेबाजों से भी सतर्क रहना चाहिए। कई साइबर अपराधी केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों से पासवर्ड, एटीएम पिन या ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारी मांगने की कोशिश करते हैं। ऐसी कोई जानकारी कभी भी किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
केवाईसी की वास्तविक आजमाइश इस बात में है कि वह एक ओर वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग करना अपराधियों के लिए कठिन बना दे, वहीं दूसरी ओर वैध ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान बनी रहे।
इसके लिए केवल कठोर नियम पर्याप्त नहीं हैं बल्कि जरूरी यह है कि विवेकपूर्ण निर्णय लिए जाएं, परिस्थितियों के अनुरूप सरल प्रक्रियाएं हों और ग्राहकों के प्रति संवेदनशील एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाया जाए। एक प्रभावी केवाईसी व्यवस्था वही है जिसमें नियमों का पालन और मानवीय संवेदनशीलता दोनों का समान रूप से समावेश हो।
(लेखक आरबीआई के डिप्टी गवर्नर हैं। ये उनके निजी विचार हैं)