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सरकार को भर्ती योजनाओं की योजना और क्रियान्वयन क्षमता बढ़ानी होगी

केंद्र सरकार को भर्ती कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने की अपनी क्षमता में सुधार करना चाहिए। विस्तार से बता रहे हैं एके भट्टाचार्य

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ए के भट्टाचार्य   
Last Updated- March 11, 2026 | 9:28 PM IST

वर्ष 2024 के आम चुनाव और नई दिल्ली में सरकार के गठन के तुरंत बाद, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और उनके विभागों में रिक्त पदों को भरने और रोजगार प्रदान करने की आवश्यकता पर काफी चर्चा हुई। संभवतः यह सत्तारूढ़ पार्टी के इस आकलन के बाद हुआ कि रोजगार की कमी उसके कमतर चुनावी प्रदर्शन के कारणों में से एक थी, और इस वजह से वह अपने बहुमत के बल पर सरकार नहीं बना सकी।

कारण चाहे जो भी हों, चुनाव के बाद पहले केंद्रीय बजट में कुछ योजनाओं की घोषणा की गई, जिनमें निजी क्षेत्र में अधिक रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया इंटर्नशिप कार्यक्रम भी शामिल है। साथ ही, सरकार ने अपने मंत्रालयों और विभागों में रोजगार के अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर अधिक ध्यान देने का निर्णय लिया।

पिछले साल जुलाई में कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद को बताया था कि सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को निर्देश जारी किए हैं कि वे रिक्त पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरने के लिए समयबद्ध और अग्रिम कार्रवाई करें। सिंह ने संसद में एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘45-50 शहरों में नियमित अंतराल पर रोजगार मेले आयोजित किए जा रहे हैं, जो केंद्रीय सरकारी मंत्रालयों, विभागों और संगठनों में रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने में उत्प्रेरक का काम करेंगे।’

दिसंबर 2024 में आयोजित एक रोजगार मेले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नव नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को 71,000 से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए थे। इससे पहले अक्टूबर 2024 में मोदी ने एक अन्य रोजगार मेले में सरकारी नौकरियों के लिए 51,000 से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए थे।

यह बात समझ में भी आती है क्योंकि सरकार के स्वयं के रोजगार संबंधी आंकड़ों से एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई थी। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने अनुमान लगाया था कि 1 मार्च, 2023 तक केंद्र सरकार में स्वीकृत कुल पदों में से 24 फीसदी से अधिक पद रिक्त रहे। स्वीकृत 40.4 लाख पदों के मुकाबले 30.6 लाख लोगों को रोजगार मिला, जिसका मतलब है कि 9.8 लाख पद खाली रह गए।

क्या सरकारी पदों को भरने के अभियान के बाद स्थिति में सुधार हुआ है? इस प्रश्न का उत्तर देने से पहले, मई 2014 में मोदी सरकार के गठन के बाद से इस मोर्चे पर उसके प्रदर्शन पर एक संक्षिप्त नजर डालना उपयोगी होगा।

बजट दस्तावेजों के अनुसार, 1 मार्च, 2015 तक सशस्त्र बलों को छोड़कर, केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारी नौकरियों में 33 लाख लोग कार्यरत थे। इनमें से लगभग 10 विभागों (रेलवे, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, पुलिस, स्वास्थ्य, लेखापरीक्षा, राजस्व, नागरिक सुरक्षा, डाक और शहरी विकास) में 31 लाख लोग कार्यरत थे, जो कुल सरकारी कर्मचारियों का 93 फीसदी से अधिक था। स्वाभाविक रूप से, इस समूह में भारतीय रेलवे (13.3 लाख कर्मचारी) का हिस्सा सबसे ज्यादा (40 फीसदी से अधिक) था।

लगभग 10 साल बाद, 1 मार्च, 2025 तक सरकारी कर्मचारियों की कुल संख्या लगभग 33 लाख पर अपरिवर्तित रही। यहां तक ​​कि कुल सरकारी कर्मचारियों में इन 10 विभागों का हिस्सा भी समान रहा। हालांकि, भारतीय रेल में कर्मचारियों की संख्या घटकर 12.1 लाख रह गई, जो कुल कर्मचारियों का लगभग 37 फीसदी है। एक दशक में यह 1 लाख से अधिक कर्मचारियों की कमी थी। यह स्पष्ट नहीं है कि कमी किस वजह से हुई? अ​धिक संविदा कर्मचारियों द्वारा काम किए जाने, आउटसोर्सिंग या प्रौद्योगिकी के कारण।

इसके विपरीत, कुछ विभागों में कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि भी देखी गई। प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के बावजूद, इस अवधि के दौरान राजस्व विभाग (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों सहित) में कर्मचारियों की संख्या में 16 फीसदी की वृद्धि हुई, जो लगभग 96,500 से बढ़कर 1,12,000 से अधिक हो गई। असैनिक सुरक्षा कर्मचारियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई, लेकिन केंद्रीय पुलिस और डाक कर्मचारियों की संख्या में एक अंक की मामूली वृद्धि रही।

लेकिन 2014 से 2023 के बीच सरकारी विभागों में कर्मचारियों की भर्ती की तुलना में 2023 से 2025 के बीच एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला। मोदी सरकार के पहले नौ वर्षों में सरकारी कर्मचारियों की संख्या 2014-15 में 33 लाख से घटकर 2022-23 में 31 लाख रह गई। लेकिन अगले दो वर्षों में यह संख्या बढ़ी और मार्च 2025 तक यह लगभग 33 लाख हो गई। दूसरे शब्दों में कहें तो, मंत्रालयों और विभागों में रिक्त पदों को भरने पर सरकार के जोर देने से फर्क पड़ा, हालांकि इससे केवल छह फीसदी की वृद्धि हुई। यह मानते हुए कि स्वीकृत पदों की संख्या 40.4 लाख पर अपरिवर्तित रही, रिक्त पदों का स्तर 24 फीसदी से घटकर 18 फीसदी रह गया।

सरकार के बजट दस्तावेजों से कर्मचारियों की संख्या के संबंध में एक और दिलचस्प प्रवृत्ति सामने आती है। हर साल बजट पेश करते समय वित्त मंत्रालय उस वर्ष मार्च की शुरुआत में सरकार के कर्मचारियों की अनुमानित संख्या और उसी दिन पिछले वर्ष की वास्तविक संख्या प्रस्तुत करता है। उदाहरण के लिए, 2025-26 के बजट में 1 मार्च, 2024 तक की वास्तविक संख्या और 1 मार्च, 2025 तक की अनुमानित संख्या प्रस्तुत की गई थी। हालांकि, जब अगले वर्ष ये अनुमान वास्तविक संख्या में परिवर्तित होते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि योजना के अनुसार लोगों को भर्ती करने की सरकार की क्षमता बेहद कमजोर है, या उसके अनुमान थोड़े भ्रामक हैं।

इस पर विचार करें। वर्ष2025-26 के बजट में 1 मार्च, 2025 तक अनुमानित कर्मचारियों की संख्या 36.5 लाख दिखाई गई थी, लेकिन एक वर्ष बाद 2026-27 के बजट में जारी वास्तविक आंकड़े कर्मचारियों की संख्या 33 लाख ही बताते हैं। यह एक लंबे समय से चली आ रही प्रवृत्ति है और कई वर्षों से ऐसा ही हो रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में यह अंतर और बढ़ गया है। लेकिन इससे पता चलता है कि सरकार की भर्ती करने की क्षमता या तो सीमित है या उसकी योजना में आवश्यक मजबूती का अभाव है।

बेशक, सरकार अपनी योजना के अनुसार कर्मचारियों की भर्ती न कर पाने से कुछ धन की बचत करती है। उदाहरण के लिए, 2024-25 के दौरान इन सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और यात्रा पर व्यय के लिए संशोधित अनुमान लगभग 3.39 लाख करोड़ रुपये का था। लेकिन इस मद पर वास्तविक व्यय लगभग 3.35 लाख करोड़ रुपये था।

लोगों की भर्ती करने की प्रशासनिक क्षमता से जुड़े ये मुद्दे ऐसे समय में और भी महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं जब सरकार अपने मंत्रालयों और विभागों में अधिक कर्मचारियों की भर्ती पर जोर दे रही है। बहस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि सरकार को और अधिक लोगों की भर्ती करनी चाहिए या नहीं, बल्कि इस बात पर भी है कि स्वीकृत 40 लाख पदों की समीक्षा की जानी चाहिए या नहीं और क्या मंत्रालयों को अतिरिक्त भर्ती के प्रस्ताव देने और उन लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहने के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस वर्ष के बजट के आंकड़े पहले ही यह दर्शाते हैं कि सरकार की धन खर्च करने की क्षमता कितनी सीमित है। ऐसा लगता है कि अधिक लोगों की भर्ती करने की क्षमता भी उतनी ही सीमित है।

First Published : March 11, 2026 | 9:23 PM IST