संपादकीय

Editorial: टेलीग्राम पर रोक नहीं, NTA में सुधार की जरूरत

नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाना समस्या का समाधान नहीं है

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बीएस संपादकीय   
Last Updated- June 18, 2026 | 8:23 AM IST

सरकार ने टेलीग्राम मेसेजिंग ऐप को 22 जून तक प्रतिबंधित कर दिया है। इस तारीख के एक दिन पहले ही चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह गलत दिशा में उठाया गया कदम है। संकट मेसेजिंग ऐप के माध्यम से लीक हुए प्रश्नपत्रों के प्रसार में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की अक्षमता में है जो परीक्षा आयोजित करती है। विवाद तब शुरू हुआ जब एक शिक्षक ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक अनुमानित या मॉक परीक्षा पत्र और वास्तविक प्रश्नपत्र के बीच महत्त्वपूर्ण समानताएं उजागर कीं।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की फौरी जांच से पता चला कि यह समानता संयोग नहीं बल्कि पुणे स्थित एक रसायनशास्त्र प्रोफेसर और एनटीए पैनल के पेपर सेटर की वजह से थी जिनकी पहुंच गोपनीय परीक्षा सामग्री तक थी। उन्होंने विशेष कोचिंग सत्र आयोजित किए जिनमें उन्होंने प्रश्न और उत्तर चुनिंदा छात्रों को बताए। इन छात्रों को राजस्थान के कोचिंग केंद्रों में संपर्कों के माध्यम से अन्य एनटीए-मान्यता प्राप्त विषय विशेषज्ञों द्वारा जुटाया गया था।

ऐसे में मूल समस्या एनटीए के भीतर है न कि कोई तकनीकी मुद्दा। सरकार के निर्णय के खिलाफ टेलीग्राम ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए का उपयोग करके अब टेलीग्राम को प्रतिबंधित करने के लिए सरकार ने भारी कानूनी तंत्र को सक्रिय कर दिया है। इस धारा के तहत प्रतिबंधित करने के आधारों में अन्य बातों के अलावा भारत की संप्रभुता, अखंडता और रक्षा तथा संज्ञेय अपराधों को रोकना शामिल है।

वास्तव में जिस अपराध की वजह से 22.7 लाख परीक्षार्थियों को 21 जून को नीट-यूजी परीक्षा दोबारा देनी पड़ रही है वह वास्तव में एनटीए की व्यवस्था के भीतर कमजोर प्रणालीगत सतर्कता का मामला था। टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया चैनल इस धांधली के प्रसारक भर थे निर्माता नहीं। सरकार ने टेलीग्राम को बंद करने के अपने निर्णय को इस रूप में समझाया है कि यह उन धोखाधड़ी चैनलों को रोकने का प्रयास है जो शुल्क लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा करते हैं।

हालांकि एनटीए के महानिदेशक ने तब से विस्तार से बताया है कि ये घपले कैसे काम करते हैं और क्यों छात्रों को इनके झांसे में नहीं आना चाहिए। उन्होंने छात्रों से यह भी आग्रह किया है कि वे संदिग्ध दावों की रिपोर्ट माईगव पोर्टल पर करें।
यदि एनटीए के महानिदेशक पहले ही छात्रों को इन धोखाधड़ियों के बारे में चेतावनी दे चुके हैं और यह भी दावा करते हैं कि दोबारा होने वाली परीक्षा के प्रश्नपत्र सुरक्षित हैं तो सोशल मीडिया चैनलों को ब्लॉक करने की भला क्या आवश्यकता है।

सरकार का कुछ आक्रोश इस तथ्य पर केंद्रित है कि टेलीग्राम अपने सर्वर भारत के बाहर रखता है और भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ अपना मेटा-डेटा साझा करने से इनकार करता है। अधिकारियों का कहना है कि इसी वजह से वे धांधली की उत्पत्ति का पता नहीं लगा पाए। यह भी अव्यावहारिक है क्योंकि सीबीआई पहले ही कारण की पहचान और आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। चूंकि भारत में टेलीग्राम के 15 करोड़ उपयोगकर्ता हैं इसलिए अस्थायी रूप से ही सही लेकिन यह पूर्ण प्रतिबंध सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए दिक्कत पैदा करेगा जबकि संभावित धोखेबाज आसानी से अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सऐप या इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब नीट-यूजी प्रश्नपत्रों के लीक होने के आरोप सामने आए हैं। 2024 में भी इसी तरह की घटनाएं रिपोर्ट हुई थीं। हालांकि जांच से पता चला कि लीक बिहार और गुजरात के कुछ विशेष केंद्रों से जुड़ा था। उस समय सर्वोच्च न्यायालय ने व्यवस्थागत खामी की संभावना को खारिज कर दिया था। लेकिन अब ऐसे संकेत हैं कोचिंग संस्थानों और पेपर तैयार करने वालों के बीच ओवरलैप को देखते हुए यह चलन आसानी से बड़े पैमाने पर हो सकता है। यही वह गठजोड़ है जिसे एनटीए को तत्काल संबोधित करना है। अस्थायी सोशल मीडिया प्रतिबंध कारण का नहीं बल्कि केवल लक्षणों का इलाज करते हैं।

 

First Published : June 18, 2026 | 8:23 AM IST