संपादकीय

Editorial: ऑफलाइन पेमेंट के लिए बेहतर साइबर सुरक्षा और मजबूत नियमों की दरकार

एनपीसीआई बिना इंटरनेट 2,000 रुपये तक के भुगतान हेतु एनएफसी आधारित ऑफलाइन यूपीआई 'टैप-ऐंड-पे' सुविधा ला रहा है, जो रोजमर्रा के लेन-देन को आसान बनाएगी

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बीएस संपादकीय   
Last Updated- July 24, 2026 | 9:18 PM IST

भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र एक और बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (एनएफसी) का उपयोग करके एक ऑफलाइन ‘टैप-ऐंड-पे’ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) सुविधा विकसित की है, जिससे इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी लगभग 2,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकेगा। प्रस्तावित प्रणाली उपयोगकर्ताओं को एनएफसी-सक्षम उपकरणों को टैप करके भुगतान करने और प्राप्तकर्ता की यूपीआई आईडी या वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (वीपीए) को कैप्चर करने की अनुमति देगी, जिससे क्विक-रिस्पॉन्स (क्यूआर) कोड को स्कैन करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

यह सुविधा यूपीआई लाइट एक्स जैसी पिछली पहलों पर आधारित है और यूपीआई तथा संपर्क रहित कार्ड भुगतान के बीच के अंतर को पाटने का प्रयास करती है। इसके लिए समय बिल्कुल उपयुक्त है। 

भारत दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम भुगतान बाजार के रूप में उभरा है, जो वैश्विक रियल-टाइम भुगतान लेनदेन का लगभग आधा हिस्सा है। यूपीआई का विकास जारी है। जून में इसने लगभग 22.02 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 22.71 अरब लेनदेन प्रोसेस किए, जो प्लेटफॉर्म के असाधारण पैमाने और अर्थव्यवस्था में बढ़ती स्वीकृति को दर्शाता है।

भारतीय रिजर्व बैंक की भुगतान प्रणाली रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई लेनदेन का औसत टिकट आकार 2021 में लगभग 1,848  रुपये से घटकर 2025 में लगभग 1,313 रुपये हो गया है।

यह दर्शाता है कि यूपीआई का उपयोग नियमित, कम मूल्य की खरीदारी के लिए तेजी से बढ़ रहा है, जिससे नया ऑफलाइन भुगतान विकल्प रोजमर्रा के खुदरा खर्च के लिए, विशेष रूप से लगभग 2,000 रुपये तक के लेनदेन के लिए, प्रासंगिक हो जाता है।

इसके फायदे सिर्फ सुविधा तक ही सीमित नहीं हैं। ऑफलाइन एनएफसी भुगतान से हवाई यात्रा, मेट्रो रेल नेटवर्क, भूमिगत परिवहन प्रणाली, कमजोर कनेक्टिविटी वाले ग्रामीण क्षेत्रों और आपदाग्रस्त इलाकों में जहां संचार नेटवर्क बाधित हैं, निर्बाध लेनदेन संभव हो सकता है। छोटे व्यापारियों के लिए, यह सुविधा अस्थायी नेटवर्क रुकावटों के दौरान नकदी पर निर्भरता कम कर सकती है, जबकि उपभोक्ता सुपरमार्केट, पेट्रोल पंप और सार्वजनिक परिवहन जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर तेजी से भुगतान का अनुभव कर सकेंगे।

हालांकि, ऑफलाइन लेनदेन की पुष्टि कनेक्टिविटी बहाल होने के बाद ही होती है। इससे दोहरे खर्च, भुगतान में देरी और भुगतान के सफलतापूर्वक सिंक्रनाइज (डेटा मिलान) न होने पर व्यापारियों से विवाद जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। खोए या चोरी हुए उपकरणों का दुरुपयोग भी हो सकता है। यदि शुरुआत से ही उचित सुरक्षा उपाय स्थापित नहीं किए गए तो जैसे-जैसे ऑफलाइन लेनदेन आम होता जाएगा, परिचालन और साइबर सुरक्षा जोखिम उपभोक्ता विश्वास को कम कर सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव से पता चलता है कि टैप-ऐंड-पे सिस्टम के विस्तार के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा उपायों को भी लागू करना आवश्यक है। ब्रिटेन (यूके) की वित्तीय वार्षिक धोखाधड़ी रिपोर्ट 2026 के अनुसार, वहां खुदरा दुकानों में आमने-सामने कार्ड धोखाधड़ी, जिसमें संपर्क रहित भुगतान भी शामिल हैं, 2025 में 8.63 करोड़ पाउंड तक पहुंच गई।

इसमें से संपर्क रहित धोखाधड़ी 4.68 करोड़ पाउंड की थी, जो 2024 की तुलना में 8 फीसदी अधिक है। यह मजबूत प्रमाणीकरण, लेनदेन सीमा, धोखाधड़ी की निगरानी और उपभोक्ता जागरूकता के महत्त्व को रेखांकित करता है, साथ ही भुगतान नवाचार को भी। भारत को एक सुनियोजित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

भारतीय रिजर्व बैंक और एनपीसीआई को व्यापारी उपकरण प्रमाणीकरण, अंतरसंचालनीयता मानकों, साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और सुरक्षित क्रिप्टोग्राफिक प्रमाणीकरण के संदर्भ में परिचालन तत्परता सुनिश्चित करनी चाहिए। अनधिकृत लेनदेन से उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए समय पर शिकायत निवारण प्रणाली का निर्माण भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन से पहले परिवहन नेटवर्क, खुदरा दुकानों और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक रूप से प्रायोगिक प्रोजेक्ट चलाए जाने चाहिए।

ऑफलाइन यूपीआई में डिजिटल भुगतान को अधिक लचीला और समावेशी बनाने की क्षमता है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक सफलता केवल तकनीकी नवाचार पर ही नहीं, बल्कि इसे आधार प्रदान करने वाले सुरक्षा उपायों की मजबूती पर भी निर्भर करती है।

First Published : July 24, 2026 | 9:18 PM IST