प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF को मुख्य रूप से नौकरीपेशा लोगों के रिटायरमेंट के बाद का सहारा माना जाता है। ज्यादातर नौकरीपेशा लोग यही जानते हैं कि इस फंड का इस्तेमाल बुढ़ापे को सुरक्षित करने के लिए किया जाता है। कई लोगों को यह भी पता है कि घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई या शादी-ब्याह जैसे जरूरी कामों के लिए नौकरी के दौरान PF खाते से आंशिक निकासी यानी कुछ हिस्सा निकाला जा सकता है। लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी होती है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों में कुछ ऐसी विशेष परिस्थितियां भी शामिल हैं, जिनमें आप रिटायरमेंट से पहले ही अपने PF खाते का पूरा 100 फीसदी पैसा निकाल सकते हैं।
EPFO ने ये नियम इसलिए बनाए हैं ताकि गंभीर संकट या आर्थिक तंगी के समय कर्मचारियों को अपने ही पैसे के लिए परेशान न होना पड़े। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि वे कौन सी खास स्थितियां हैं, जिनमें PF का पूरा पैसा निकाला जा सकता है।
अगर सीधे शब्दों में कहें, तो सामान्य परिस्थितियों में नौकरी करते हुए ऐसा करना मुमकिन नहीं है। चूंकि EPF एक लॉन्ग-टर्म सेविंग स्कीम है, इसलिए जब तक आप नौकरी में हैं, तब तक आपको सिर्फ एडवांस या आंशिक निकासी की ही इजाजत मिलती है। पूरा पैसा निकालने की अनुमति सिर्फ रिटायरमेंट के समय ही होती है। लेकिन अगर कोई कर्मचारी किसी गंभीर संकट या बेहद कठिन परिस्थिति से गुजर रहा है, तो EPFO उसे राहत देने के लिए पूरा फंड निकालने की छूट देता है।
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EPFO के नियमों के मुताबिक, अगर कोई मेंबर नीचे दी गई गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है, तो वह अपने खाते का पूरा पैसा निकाल सकता है:
अगर आपकी कंपनी या संस्थान जहां आप काम करते हैं, वह पिछले 15 दिनों से अधिक समय से बंद है या वहां तालाबंदी चल रही है, और इस वजह से कर्मचारियों को किसी भी तरह का मुआवजा या वेतन नहीं मिल रहा है, तो आप पूरा PF निकाल सकते हैं। इसके अलावा, अगर बिना किसी हड़ताल के कर्मचारियों को पिछले दो महीने से अधिक समय से सैलरी नहीं मिली है, तब भी यह नियम लागू होता है। ऐसे समय में जब नियमित आय बंद हो जाती है, यह फंड कर्मचारियों के लिए बड़ा सहारा बनता है।
यदि किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया है और उसने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी है, तो वह इस ‘स्पेशल कैटेगरी’ के तहत राहत पा सकता है। जब तक मामला कोर्ट में रहता है, तब तक कर्मचारी EPFO की शर्तों और जरूरी डॉक्यूमेंट्स को पूरा करके अपने PF खाते का पूरा पैसा निकालने के लिए अप्लाई कर सकता है।
यदि कोई कंपनी या संस्थान लगातार छह महीने से अधिक समय से बंद पड़ा है और वहां काम करने वाले कर्मचारी अभी भी बेरोजगार हैं, तो वे अपने PF खाते में जमा पूरी राशि निकाल सकते हैं। यह नियम उन लोगों की मदद के लिए है जो लंबे समय से नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं और जिनके पास आय का कोई और साधन नहीं है।
स्वास्थ्य से जुड़ी आपातकालीन स्थिति में भी EPFO अपने मेंबर्स को बड़ी राहत देता है। अगर मेंबर को खुद के या अपने परिवार के किसी निर्भर व्यक्ति के इलाज के लिए बड़े खर्च की जरूरत है, तो वह PF फंड का इस्तेमाल कर सकता है। मेडिकल इमरजेंसी के दौरान यह सुविधा अस्पताल के खर्चों को संभालने में बहुत मददगार साबित होती है।
हालांकि, EPFO इन परिस्थितियों में पूरा पैसा निकालने की इजाजत देता है, लेकिन इसके लिए आपको पुख्ता सबूत और डॉक्यूमेंट देने होते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कंपनी बंद होने का मामला है, तो उससे जुड़े सर्टिफिकेट; अगर कोर्ट का मामला है, तो अदालत के रिकॉर्ड; और अगर इलाज का मामला है, तो डॉक्टर या हॉस्पिटल की बिल और मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने होंगे। इसलिए अप्लाई करने से पहले EPFO की वेबसाइट या दफ्तर से जरूरी कागजातों की लिस्ट अच्छी तरह चेक कर लेनी चाहिए।
आमतौर पर नौकरीपेशा लोग बीमारी, घर की मरम्मत, शादी या बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए जो पैसा निकालते हैं, उसे ‘PF एडवांस’ कहा जाता है। सामान्य मामलों में आप अपने कुल जमा पैसे का सिर्फ एक निश्चित हिस्सा ही निकाल सकते हैं, पूरा नहीं। लेकिन इसके विपरीत, विशेष परिस्थितियों वाली इस कैटेगरी में EPFO आपको पूरा 100 फीसदी फंड निकालने की छूट देता है, क्योंकि यह नियम पूरी तरह नुकसान या आर्थिक संकट के समय मदद के लिए तैयार किया गया है।
भले ही नियमों के तहत आपको पूरा पैसा निकालने का विकल्प मिलता है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसे हमेशा आखिरी रास्ते के तौर पर ही देखना चाहिए। PF का पैसा मुख्य रूप से आपके बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए है। अगर आप इसे रिटायरमेंट से पहले ही पूरा निकाल लेते हैं, तो इससे आपकी भविष्य की योजना प्रभावित हो सकती है। हालांकि, EPFO की यह व्यवस्था यह भी सुनिश्चित करती है कि बेहद मुश्किल वक्त में कोई भी कर्मचारी अपने ही जमा किए पैसों से महरुम न रहे।