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2030 के बाद Tata Steel का कच्चा माल कहां से आएगा? कंपनी ने खोला पूरा प्लान, शेयर पर कितना है टारगेट

Tata Steel ने 2030 के बाद लौह अयस्क की जरूरत पूरी करने का प्लान बताया है। ब्रोकरेज ने शेयर पर ₹209 से ₹235 तक के टारगेट दिए हैं

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- August 03, 2026 | 11:40 AM IST

Tata Steel भारत में अपनी उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रही है। लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल यह भी है कि 2030 के बाद कंपनी की खदानों के मौजूदा पट्टे खत्म होने लगेंगे, तब बढ़े हुए उत्पादन के लिए लौह अयस्क कहां से आएगा। कंपनी ने अब इस चिंता पर अपना रोडमैप साफ कर दिया है। Tata Steel को उम्मीद है कि 2030 के बाद भी उसकी करीब आधी जरूरत अपनी खदानों से पूरी हो जाएगी। बाकी लौह अयस्क बाजार से खरीदा जाएगा या जरूरत पड़ने पर आयात किया जा सकता है।

कंपनी की इस योजना, भारत में क्षमता विस्तार और यूरोप में सुधार की उम्मीद को देखते हुए ज्यादातर ब्रोकरेज शेयर पर भरोसा बनाए हुए हैं। हालांकि यूरोप के कारोबार, बढ़ते कर्ज और कच्चे माल की लागत को लेकर उनकी राय एक जैसी नहीं है।

खदानों का उत्पादन कितना बढ़ाएगी कंपनी?

कंपनी MKB खदानों से उत्पादन बढ़ाने पर काम कर रही है। यहां मौजूदा उत्पादन 50 लाख टन सालाना से भी कम है, जिसे बढ़ाकर 3 से 3.5 करोड़ टन सालाना करने की योजना है। इसके अलावा NINL के विस्तार को कच्चा माल देने के लिए करीब 1.5 करोड़ टन की अतिरिक्त खनन क्षमता तैयार की जा सकती है।

ICICI Securities की रिपोर्ट के मुताबिक, NINL और भुवन खदानों की संयुक्त उत्पादन क्षमता 2030 तक 3 करोड़ टन से ज्यादा हो सकती है। इससे Tata Steel की कम से कम आधी लौह अयस्क जरूरत पूरी होने की उम्मीद है।

कच्चे माल की चिंता अभी क्यों बड़ी है?

Tata Steel भारत में अपनी स्टील उत्पादन क्षमता को मौजूदा 2.7 करोड़ टन सालाना से बढ़ाकर 4 करोड़ टन करने की योजना पर काम कर रही है। यह विस्तार अगले पांच से छह साल में पूरा होने की उम्मीद है। उत्पादन बढ़ने का सीधा मतलब है कि कंपनी को लौह अयस्क की जरूरत भी काफी ज्यादा होगी।

इसीलिए निवेशकों की नजर इस बात पर है कि मौजूदा खदानों के पट्टे खत्म होने के बाद कंपनी अपनी बढ़ती जरूरत कैसे पूरी करेगी। करीब 50 फीसदी जरूरत अपनी खदानों से पूरी करने की योजना इस चिंता को कम करती है, लेकिन बाजार से खरीदे जाने वाले बाकी अयस्क की कीमत कंपनी की लागत पर असर डाल सकती है।

NINL पर ₹33,870 करोड़ का बड़ा दांव

Tata Steel के बोर्ड ने Neelachal Ispat Nigam Limited यानी NINL के पहले चरण के विस्तार को मंजूरी दी है। इसके तहत क्षमता में 48 लाख टन सालाना की बढ़ोतरी की जाएगी और कुल क्षमता बढ़कर 62 लाख टन सालाना हो जाएगी।

इस परियोजना पर करीब ₹33,870 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। कंपनी ने इसे लगभग 48 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

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इसके अलावा कंपनी महाराष्ट्र में पहले चरण में 50 लाख टन का प्लांट तैयार करने की योजना पर काम कर रही है, जिसे आगे बढ़ाकर 1.5 करोड़ टन किया जा सकता है। कलिंगनगर में भी अगले चरण का विस्तार किया जाएगा।

भारत का कारोबार बना सबसे बड़ा सहारा

जून तिमाही में Tata Steel के भारत कारोबार का प्रदर्शन मजबूत रहा। भारतीय कारोबार का EBITDA सालाना आधार पर 29 फीसदी बढ़कर करीब ₹9,183 करोड़ रहा। प्रति टन EBITDA भी 18.5 फीसदी बढ़कर ₹17,762 पहुंच गया। बेहतर स्टील कीमतों और ज्यादा वैल्यू-एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी से कंपनी को फायदा मिला।

हालांकि दूसरी तिमाही में भारत में स्टील की औसत कीमत करीब ₹1,500 प्रति टन घटने का अनुमान है। कोकिंग कोल की लागत भी करीब 5 डॉलर प्रति टन बढ़ सकती है। इसके बावजूद कंपनी और ब्रोकरेज को उम्मीद है कि उत्पादन सामान्य होने और बिक्री की मात्रा बढ़ने से कुल EBITDA में सुधार हो सकता है।

यूरोप अभी भी सबसे बड़ी चिंता

भारत में मजबूत प्रदर्शन के बावजूद यूरोप के कारोबार ने कंपनी की कमाई पर दबाव डाला। नीदरलैंड में Direct Sheet Plant बंद रहने की वजह से उत्पादन और मुनाफे पर बड़ा असर पड़ा।

नीदरलैंड कारोबार का EBITDA पिछली तिमाही के करीब ₹624 करोड़ से गिरकर सिर्फ ₹39 करोड़ रह गया। वहीं UK कारोबार का घाटा ₹591 करोड़ से घटकर करीब ₹341 करोड़ रह गया।

कंपनी को उम्मीद है कि नीदरलैंड प्लांट दोबारा शुरू होने से दूसरी तिमाही में उत्पादन और मुनाफे में सुधार होगा। UK कारोबार को वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में EBITDA ब्रेक-ईवन के करीब लाने का लक्ष्य है, हालांकि इसमें एक तिमाही की देरी हो सकती है।

Emkay की राय

Emkay का कहना है कि भारत में Tata Steel का कारोबार मजबूत है। बेहतर स्टील कीमतों से प्रति टन कमाई बढ़ी है। दूसरी तिमाही में उत्पादन बढ़ने से मुनाफे में सुधार हो सकता है। हालांकि यूरोप में बार-बार आ रही दिक्कतें चिंता बनी हुई हैं। ब्रोकरेज ने BUY रेटिंग के साथ ₹230 का टारगेट रखा है।

Motilal Oswal की राय

Motilal Oswal को भारत कारोबार और यूरोप में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है। हालांकि उसने FY27 के मुनाफे के अनुमान घटाए हैं। इसके बावजूद ब्रोकरेज ने BUY रेटिंग और ₹220 का टारगेट बरकरार रखा है।

Nuvama की राय

Nuvama का नजरिया थोड़ा सावधानी वाला है। उसे दूसरी तिमाही में प्रति टन कमाई घटने और यूरोप में सीमित सुधार की उम्मीद है। इसलिए उसने HOLD रेटिंग के साथ ₹209 का टारगेट दिया है।

ICICI Securities की राय

ICICI Securities का मानना है कि भारत में क्षमता बढ़ने और 2030 के बाद भी आधा लौह अयस्क अपनी खदानों से मिलने से कंपनी को सहारा मिलेगा। हालांकि उसने टारगेट ₹250 से घटाकर ₹235 किया है, लेकिन BUY रेटिंग बरकरार रखी है।

ब्रोकरेज रेटिंग टारगेट प्राइस ₹190 से संभावित बढ़त
ICICI Securities BUY ₹235 करीब 24%
Emkay BUY ₹230 करीब 21%
Motilal Oswal BUY ₹220 करीब 16%
Nuvama HOLD ₹209 करीब 10%

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : August 3, 2026 | 11:40 AM IST