प्रतीकात्मक फोटो
SEBI Technology Resilience Rules: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने शेयर बाजार से जुड़े संस्थानों की तकनीकी व्यवस्था मजबूत बनाने के लिए नए नियमों का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी खराबी आने पर शेयर बाजार का कामकाज लंबे समय तक प्रभावित न हो और जरूरी आंकड़े सुरक्षित रहें।
ये नियम शेयर बाजार, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉरपोरेशन जैसे बाजार से जुड़े अहम संस्थानों पर लागू होंगे। SEBI ने आपदा के समय इस्तेमाल होने वाली वैकल्पिक व्यवस्था की जांच का समय कम से कम चार घंटे करने का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्ताव के मुताबिक बाजार से जुड़े संस्थानों को छुट्टी वाले दिन आपदा से निपटने की तैयारी की जांच करनी होगी। इस दौरान काम की शुरुआत मुख्य डेटा केंद्र से होगी। इसके बाद पूरे कामकाज को आपदा के समय इस्तेमाल होने वाले दूसरे केंद्र पर भेजा जाएगा। यह जांच कम से कम चार घंटे चलेगी। इसमें मुख्य डेटा केंद्र से वैकल्पिक केंद्र पर कामकाज ले जाने में लगने वाला समय भी शामिल होगा।
इस अभ्यास में बाजार के कामकाज से जुड़ी सभी परिस्थितियों को शामिल करना होगा। संस्थानों को वैसा ही भार और लोगों की भागीदारी तैयार करनी होगी, जैसा वास्तविक कारोबारी दिन में दिखाई देता है। संस्थानों को उन अलग-अलग हालात की भी जांच करनी होगी, जिनसे उनकी तकनीकी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसे हालात की पूरी सूची को संस्थान की तकनीक पर बनी स्थायी समिति देखेगी।
शेयर बाजारों ने SEBI से आपदा से निपटने की जांच का समय घटाने का अनुरोध किया था। खास तौर पर जिंस वायदा कारोबार करने वाले बाजारों के लिए पूरे कारोबारी समय तक यह अभ्यास करना मुश्किल होता है।
कुछ जिंस उत्पादों में कारोबार रात 11:55 बजे तक चलता है। ऐसे में पूरे कारोबारी सत्र के बराबर जांच करना बाजार के संस्थानों और इसमें हिस्सा लेने वाले लोगों, दोनों के लिए मुश्किल हो सकता है।
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इसी वजह से सेबी ने जांच को कम से कम चार घंटे में पूरा करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, कम समय में भी वास्तविक कारोबार से जुड़ी सभी अहम परिस्थितियों की जांच जरूरी होगी।
सेबी ने मुख्य डेटा केंद्र की मजबूती जांचने के लिए बड़े स्तर पर दबाव और नकली कारोबारी परिस्थितियों की जांच करने का भी प्रस्ताव दिया है। अब जांच केवल लेनदेन की संख्या और हर सेकंड आने वाले ऑर्डर तक सीमित नहीं रहेगी।
इसमें डेटाबेस के रिकॉर्ड, अलग-अलग तालिकाओं का आकार, जरूरी आंकड़े और लेनदेन से बाहर के दूसरे तकनीकी हिस्से भी शामिल होंगे। इसका मकसद यह देखना है कि बाजार में कारोबार या निवेशकों की संख्या अचानक बढ़ने पर तकनीकी व्यवस्था कितना भार उठा सकती है।
बाजार से जुड़े संस्थानों को अपने मुख्य और वैकल्पिक डेटा केंद्रों की नियमित जांच करनी होगी। यह देखना होगा कि किसी उपकरण, स्विच या सर्वर के खराब होने पर दूसरा उपकरण अपने आप काम संभाल लेता है या नहीं।
संस्थानों को अपने तकनीकी तंत्र की सीमा भी पहले से पहचाननी होगी। इनमें डेटाबेस, तकनीकी बनावट और तालिकाओं के आकार जैसी सीमाएं शामिल होंगी। इन पर लगातार नजर रखनी होगी, ताकि बाजार का कामकाज बढ़ने के साथ तकनीकी रुकावट पैदा होने से पहले ही जरूरी कदम उठाए जा सकें।
सेबी ने शेयर बाजारों के लिए खोए हुए कारोबारी आंकड़े वापस पाने की नई व्यवस्था का भी प्रस्ताव रखा है। अभी किसी तकनीकी खराबी के दौरान बाजार अपने पास के वैकल्पिक केंद्र या आपदा से निपटने वाले डेटा केंद्र से जानकारी वापस पाने की कोशिश करता है। लेकिन संभव है कि तकनीकी खराबी के कारण इन दोनों जगहों पर आंकड़ों की नकल तैयार करने का काम भी प्रभावित हो जाए।
ऐसी स्थिति में शेयर बाजार क्लियरिंग कॉरपोरेशन से खोया हुआ कारोबारी डेटा वापस ले सकेगा। इसके लिए शेयर बाजारों और क्लियरिंग कॉरपोरेशन को काम करने का एक तय तरीका तैयार करना होगा।
सेबी का कहना है कि इन प्रस्तावों से आपदा से निपटने वाली जांच करना आसान होगा। साथ ही बाजार से जुड़े संस्थानों की तकनीकी मजबूती और आंकड़े वापस पाने की क्षमता बेहतर होगी। सेबी ने इन प्रस्तावों पर लोगों और बाजार से जुड़े पक्षों से 5 अक्टूबर तक सुझाव मांगे हैं।