बाजार नियामक सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह का कहना है कि म्युचुअल फंडों की लोकप्रियता के कारण घरेलू संस्थागत निवेशक भारतीय पूंजी बाजार के लिए बड़ी और स्थिरता देने वाली ताकत बनकर उभरे हैं। ये निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की धन निकासी की वजह से पैदा वैश्विक अस्थिरता के बीच बाजार को मजबूती प्रदान करते हैं।
सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एसोचैम के 17वें म्युचुअल फंड समिट में कहा, एफपीआई की निकासी के दौरान घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी ने एक अहम संतुलनकारी ताकत के रूप में काम किया है। सिंह ने कहा, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) इस मजबूती का एक अहम हिस्सा बन गए हैं।
सेबी के अधिकारी ने बताया कि मार्च 2026 में दुनिया भर में भारी अनिश्चितता के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 1.43 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जबकि सिर्फ इक्विटी म्युचुअल फंडों में ही लगभग 43,000 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया।
इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका-ईरान तनाव के बाद भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण मार्च में भारतीय पूंजी बाजार से एफपीआई ने 13 अरब डॉलर की निकासी की। सिंह के अनुसार हाल के समय में बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान घरेलू निवेशकों, खासकर म्युचुअल फंडों, की मजबूती और उनका दीर्घावधि नजरिया काफी स्पष्ट हुआ।
सिंह ने कहा, भारत में म्युचुअल फंड उद्योग हमारे वित्तीय बाजार में अहम ताकत बनकर उभरा है। यह उद्योग परिवारों को लंबे समय में संपत्ति बनाने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि फंड उद्योग आम नागरिकों को देश की आर्थिक तरक्की में शामिल होने का मौका दे रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि उतार-चढ़ाव भरे समय में निवेशकों का धैर्य अहम बात रही है। सिंह ने बताया कि होल्डिंग-पीरियड के एनालिसिस से पता चलता है कि खुदरा निवेशकों में लंबे समय के लिए निवेश करने का रुझान बढ़ रहा है। खुदरा प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों का 61 फीसदी से ज्यादा हिस्सा 24 महीनों से ज्यादा समय तक निवेशित रहा है।
उन्होंने कहा, यह एक उत्साहजनक संकेत है कि म्युचुअल फंडों का इस्तेमाल अब बाजार में अल्पावधि के मौकों के बजाय लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ज्यादा किया जा रहा है। लेकिन इन उत्साहजनक रुझानों के बावजूद भारत में म्युचुअल फंडों की पहुंच बढ़ाने की अभी भी काफी गुंजाइश है। उन्होंने बताया कि भारत की 5 फीसदी से भी कम आबादी म्युचुअल फंडों में निवेश करती है।
सिंह ने कहा, इसलिए म्युचुअल फंड उद्योग की भविष्य की वृद्धि अलग-अलग इलाकों, आय श्रेणियों और आबादी समूहों के निवेशकों तक पहुंचने पर निर्भर करेगी। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि निवेश के फैसले वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम लेने की क्षमता और निवेश की अवधि के आधार पर लिए जाने चाहिए, न कि इस समय में चल रहे अल्पावधि रुझानों के आधार पर।
सेबी के अधिकारी ने कहा, ऐसे माहौल में जहां सोशल मीडिया आकर्षक रिटर्न को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा सकता है और कुछ छूट जाने का डर पैदा कर सकता है, वहीं लाइफ साइकल फंड जैसी लक्ष्य-आधारित योजनाएं निवेशकों को सही ऐसेट एलोकेशन और लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों पर फोकस में मदद कर सकती हैं।
एसआईपी के बाद, पिछले साल ही शुरू किए गए ‘स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड’ (एसआईएफ) भी काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि एक अच्छे नियमन वाली व्यवस्था के भीतर अलग-अलग तरह के निवेश समाधानों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
उन्होंने कहा, 31 मई तक एसआईएफ ने करीब 56,000 निवेशक फोलियो के जरिए लगभग 13,500 करोड़ रुपये की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां हासिल कर ली हैं। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि मैं एसआईएफ को एक योजना के तौर पर बढ़ावा नहीं दे रहा हूं और इस मामले में तटस्थ हूं। मैं बस यह बता रहा हूँ कि कैसे एक नई श्रेणी लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है।