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LIC Share Crash: सरकारी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) के शेयरों में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली। सरकार की ओर से कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) शुरू किए जाने के बाद निवेशकों की बिकवाली बढ़ी, जिससे शेयर इंट्रा-डे कारोबार में करीब 8 फीसदी तक टूट गया। सरकार ने इस हिस्सेदारी बिक्री के लिए फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जो बाजार भाव से लगभग 10 फीसदी कम है।
सरकार ने LIC में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए दो दिन का OFS लॉन्च किया है। इसके तहत शुरुआत में 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री के लिए पेश की गई है। इसके साथ 4 फीसदी का ग्रीनशू ऑप्शन भी रखा गया है। यदि निवेशकों की मांग मजबूत रहती है, तो कुल मिलाकर 6.5 फीसदी तक हिस्सेदारी बेची जा सकती है।
फिलहाल सरकार के पास LIC में 96.5 फीसदी हिस्सेदारी है। यदि ग्रीनशू ऑप्शन का पूरा इस्तेमाल किया जाता है, तो यह हिस्सेदारी घटकर करीब 90 फीसदी रह सकती है।
OFS के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है, जो बाजार कीमत की तुलना में लगभग 10 फीसदी कम है। डिस्काउंट पर शेयर उपलब्ध होने के कारण बाजार में दबाव बढ़ा और LIC का शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 8 फीसदी तक फिसल गया।
कारोबार के दौरान शेयर 390 रुपये के आसपास तक पहुंच गया। वहीं, इस दौरान शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी सामान्य से कई गुना अधिक रहा, जिससे साफ है कि निवेशकों की सक्रियता बढ़ गई है।
सरकार की यह हिस्सेदारी बिक्री उसके विनिवेश (Disinvestment) कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके साथ ही इसका उद्देश्य भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों का समय से पहले पालन करना भी है।
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SEBI ने LIC को मई 2026 तक कम से कम 10 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता (Public Shareholding) हासिल करने की समयसीमा दी थी। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार अपनी हिस्सेदारी चरणबद्ध तरीके से घटा रही है।
इससे पहले सरकार ने मई 2022 में LIC के IPO के जरिए 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। वहीं, चालू वित्त वर्ष में सरकार अब तक सात सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री और SUUTI के जरिए कुल 21,082 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।
शेयर में मौजूदा गिरावट के बावजूद भारतीय बीमा उद्योग के दीर्घकालिक विकास को लेकर तस्वीर सकारात्मक बनी हुई है। स्विस री (Swiss Re) की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत आर्थिक आधार, बढ़ती उपभोक्ता मांग और नियामकीय सुधारों के चलते भारत का बीमा क्षेत्र आने वाले वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ सकता है।
LIC की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 से 2030 के बीच भारत का बीमा बाजार वास्तविक आधार पर 6.9 प्रतिशत की औसत सालाना दर से बढ़ने का अनुमान है। इस वृद्धि के साथ भारत दुनिया के प्रमुख बीमा बाजारों में सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार बन सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के सुधारों और सरकार की नीतिगत पहलों से बीमा उद्योग में पारदर्शिता बढ़ रही है। इससे उद्योग का ढांचा मजबूत होगा और अगले चरण की तेज विकास यात्रा को गति मिलेगी।
भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में दूसरा सबसे बड़ा जीवन बीमा बाजार है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले पांच वर्षों में जीवन बीमा कारोबार में 6.8 प्रतिशत की औसत सालाना वृद्धि का अनुमान है। यह बढ़ोतरी वितरण नेटवर्क के विस्तार, रिटायरमेंट प्लान की बढ़ती मांग और क्रेडिट ग्रोथ के कारण संभव हो सकती है।
इसके अलावा, लोगों की बढ़ती जीवन प्रत्याशा, घटती जन्म दर और रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा की बढ़ती जरूरत के चलते गारंटीड इनकम, स्वास्थ्य बीमा और देखभाल से जुड़े बीमा उत्पादों की मांग में भी तेजी आने की संभावना है। ऐसे में बीमा कंपनियों को बदलती जरूरतों के अनुरूप नए और बेहतर उत्पाद विकसित करने होंगे।